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'अनवर डकैत' को बड़ी राहत: इंदौर में लव जिहाद फंडिंग केस और 26 अपराधों के आरोपी पूर्व पार्षद कादरी को HC से जमानत

इंदौर हाईकोर्ट ने लव जिहाद के लिए फंडिंग करने और दर्जनों आपराधिक मामलों के आरोपी पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी की जमानत मंजूर कर ली है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की बेंच में सुनवाई के बाद याचिका स्वीकार की गई है।

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Vikram Jain
Indore Love Jihad Funding Case Anwar Kadri Bail

Indore Love Jihad Funding Case Anwar Kadri Bail: इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र से जुड़े सनसनीखेज 'लव जिहाद' फंडिंग मामले में मुख्य आरोपी और पूर्व पार्षद अनवर कादरी को बड़ी राहत मिली है। इंदौर हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के बाद कादरी की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। लगभग 26 आपराधिक मामलों का सामना कर रहे और अपनी पार्षदी गंवा चुके अनवर कादरी लंबे समय से जेल में बंद थे। जिला कोर्ट द्वारा जमानत खारिज होने के बाद हाईकोर्ट के इस फैसले ने मामले में नया कानूनी मोड़ ला दिया है।

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पूर्व पार्षद अनवर का कादरी को बड़ी राहत

इंदौर में लव जिहाद की फंडिंग करने के आरोपी पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी उर्फ 'अनवर डकैत' को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने बुधवार, 4 फरवरी को मामले की सुनवाई करते हुए कादरी को राहत दे दी। हालांकि, जमानत का विस्तृत औपचारिक आदेश आना अभी बाकी है। जिला कोर्ट से राहत न मिलने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद जून 2025 में बाणगंगा इलाके में तब शुरू हुआ था, जब एक युवती ने साहिल शेख और अन्य के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। युवती का आरोप था कि साहिल ने उसे प्रेम जाल में फंसाकर शारीरिक शोषण किया, धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया और उसे बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया।

फंडिंग का खुलासा और गिरफ्तारी

मामले की जांच के दौरान गिरफ्तार हुए मुख्य आरोपी साहिल शेख ने चौंकाने वाला खुलासा किया था। उसने पुलिस को बताया कि इस तरह के कार्यों के लिए पूर्व पार्षद अनवर कादरी उसे 2 लाख रुपये की फंडिंग मुहैया कराता था। इस बयान के आधार पर पुलिस ने कादरी को सह-आरोपी बनाया। कादरी लंबे समय तक फरार रहा और बाद में कोर्ट में सरेंडर किया, जिसके बाद से वह जेल में बंद था।

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हाईकोर्ट में क्यों मिली जमानत?

पूर्व पार्षद अनवर कादरी की ओर से दलील दी गई कि इस मामले के अन्य सह-आरोपी, जिनमें साहिल शेख भी शामिल है, उन्हें पहले ही जिला कोर्ट या हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। 'समानता के सिद्धांत' (Parity Ground) को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने कादरी की याचिका को स्वीकार कर लिया।

जिला कोर्ट ने दिखाई थी सख्ती

अनवर कादरी की रिहाई की पहली कोशिश जिला कोर्ट में नाकाम साबित हुई थी। 10 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने साफ कर दिया था कि अन्य सह-आरोपियों को जमानत मिलना कादरी की रिहाई का आधार नहीं हो सकता। जिला न्यायालय के अनुसार, कादरी पर इस अपराध के लिए वित्तीय संसाधन (2 लाख की फंडिंग) जुटाने के जो आरोप हैं, वे उसे मामले का केंद्र बिंदु बनाते हैं। इसी 'मुख्य आरोपी' वाली छवि के चलते निचली अदालत ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया था।

अपराधों का लंबा इतिहास

अनवर कादरी का रिकॉर्ड काफी विवादित रहा है। उस पर डकैती, हत्या का प्रयास (307), हत्या (302), आर्म्स एक्ट और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम सहित कुल 26 गंभीर मामले दर्ज हैं। डकैती के पुराने प्रकरणों के कारण ही उसे अपराधी जगत में ‘अनवर डकैत’ के नाम से जाना जाता था।

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गंवा चुके हैं पार्षद पद और चुनाव का अधिकार

इस मामले के सामने आने के बाद इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कड़ा रुख अपनाया था। निगम परिषद ने प्रस्ताव पारित कर कादरी की पार्षदी खत्म करने की सिफारिश की थी। इसके बाद संभागायुक्त डॉ. सुदाम पी. खाड़े ने न केवल उसे पद से हटाया, बल्कि भविष्य में चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया था।

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