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Indore ARO Rajesh Parmar ED Action: मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी (ARO) राजेश परमार अब केंद्रीय जांच एजेंसी के शिकंजे में हैं। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए परमार और उनके परिवार की 1.06 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि अधिकारी के पास उनकी वैध आय से 175 प्रतिशत अधिक संपत्ति मौजूद है।
आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई
इंदौर नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के इंदौर सब-जोनल कार्यालय ने यह बड़ी कार्रवाई की है। यह मामला मूल रूप से ईओडब्ल्यू (EOW) भोपाल द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पर आधारित है। ईओडब्ल्यू ने परमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था, जिसके बाद ईडी ने इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।
आय से 175% ज्यादा निकली संपत्ति
ईडी की जांच में साल 2007 से 2022 के बीच का कच्चा चिट्ठा सामने आया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस 15 साल की अवधि में राजेश परमार ने लगभग 1.66 करोड़ रुपये की संपत्तियां अर्जित कीं। जब इनकी तुलना उनकी आधिकारिक सैलरी और आय के वैध स्रोतों से की गई, तो पता चला कि यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय से 175 प्रतिशत अधिक है। एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि अपराध से अर्जित कुल संदिग्ध आय लगभग 1.21 करोड़ रुपये है।
मकान, प्लॉट और जमीन जब्त
अटैच की गई 1.06 करोड़ रुपये की संपत्तियों में राजेश परमार और उनके परिजनों के नाम दर्ज कई महत्वपूर्ण संपत्तियां शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
- एक आलीशान आवासीय मकान।
- विभिन्न क्षेत्रों में स्थित प्लॉट और एक फ्लैट।
- बेशकीमती कृषि भूमि।
काली कमाई को 'सफेद' करने की कोशिश
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि भ्रष्टाचार के जरिए कमाए गए पैसे को छिपाने के लिए राजेश परमार ने शातिराना तरीका अपनाया। अवैध रूप से अर्जित बड़ी मात्रा में नकदी (Cash) को पहले उन्होंने खुद के और अपने परिवार के बैंक खातों में जमा कराया। इसके बाद, उसी पैसे को बैंक ट्रांसफर के जरिए अचल संपत्तियों को खरीदने में निवेश किया गया। ईडी का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया का मकसद धन के वास्तविक और अवैध स्रोत को छुपाना था, ताकि इसे कानूनी कमाई दिखाया जा सके।
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