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Aadhaar Card Voter ID Not Proof of Date of Birth: 'आधार कार्ड और वोटर आईडी को जन्म तारीख का प्रमाण नहीं माना जा सकता।'... ये महत्वपूर्ण बात मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान कही। MP हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में धार जिले के एडिशनल कलेक्टर के आदेश को चुनौती देते हुए एक रिट पिटीशन दायर की थी। एडिशनल कलेक्टर ने हीरालाल बाई की उस याचिका को मंजूरी दी थी, जिसमें उनके रिटायरमेंट को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज डेट ऑफ बर्थ ही मान्य है।
आंगनवाड़ी सहायिका बहाल
हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने हीरालाल बाई को आंगनवाड़ी सहायक के पद पर फिर से बहाल कर दिया और पिटीशनर को नौकरी से हटा दिया, क्योंकि आंगनवाड़ी सहायक का सिर्फ एक ही पद मंजूर था।
2018 में जारी हुआ था अपॉइंटमेंट ऑर्डर
याचिकाकर्ता ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी पॉलिसी गाइडलाइन के मुताबिक सिलेक्शन प्रोसेस के बाद उन्हें आंगनवाड़ी सहायक के पद पर नियुक्त किया गया था। उन्हें जून 2018 में अपॉइंटमेंट ऑर्डर मिला था।
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62 साल की उम्र में रिटायर हुईं याचिकाकर्ता
हाईकोर्ट को बताया गया कि हीरालाल बाई पहले भी आंगनवाड़ी सहायिका के पद पर काम कर रही थीं। ऑफिस सर्विस रिकॉर्ड के अनुसार वे 62 साल की उम्र में रिटायर हो गई थीं। रिटायरमेंट के इस आदेश पर हीरालाल बाई ने कभी सवाल नहीं उठाया, न ही उसे चुनौती नहीं दी। पद खाली होने के बाद, सक्षम अधिकारी ने एक विज्ञापन निकाला और सिलेक्शन प्रोसेस पूरा की।
रिटायरमेंट के 2 साल बाद की अपील
रिटायरमेंट के करीब 2 साल बाद हीरालाल बाई ने अपील की और दावा किया कि उनकी जन्म तारीख गलत दर्ज की गई थी और उनका जन्म 5 मार्च 1955 को नहीं, बल्कि उनके आधार कार्ड और वोटर ID कार्ड के आधार पर 1 जनवरी, 1964 को हुआ था।
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रिटायरमेंट ऑर्डर रद्द
याचिकाकर्ता हीरालाल बाई के वकील ने कहा कि एक बार अपील अथॉरिटी ने उनके रिटायरमेंट ऑर्डर को रद्द कर दिया, तो डिपार्टमेंट उसे मानने के लिए मजबूर था, क्योंकि आंगनवाड़ी सहायक के लिए केवल एक ही पोस्ट थी। हाईकोर्ट ने कहा कि हीरालाल बाई अपने ऑफिशियल सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज जन्म तिथि के आधार पर 5 मार्च 2017 को रिटायर हो गई थीं।
कर्मचारी सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज जन्म तारीख ही मान्य
हाईकोर्ट इंदौर बेंच ने दोहराया कि जो कर्मचारी सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज जन्मतिथि को स्वीकार करता है और उसे फाइनल होने देता है, उसे रिटायरमेंट के बाद उसे चैलेंज करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने दोहराया कि सर्विस मामलों में, ऑफिशियल सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज जन्म तारीख को सही माना जाता है और ये सर्विस की अवधि, सीनियरिटी और रिटायरमेंट तय करने का आधार बनी रहती है। इसलिए ऐसी एंट्री को जल्द से जल्द चुनौती दी जानी चाहिए और इसके साथ इंपीचेबल सबूत होने चाहिए।
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याचिकाकर्ता को नहीं मिला सुनवाई का मौका
हाईकोर्ट ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता को उसकी सर्विस खत्म करने का ऑर्डर पास करने से पहले कभी सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। हाईकोर्ट बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी एडमिनिस्ट्रेटिव या क्वासी-ज्यूडिशियल ऑर्डर जिसके सिविल नतीजे हों, उसे नैचुरल जस्टिस के प्रिंसिपल्स, खासकर ऑडी अल्टरम पार्टम के सिद्धांत का पालन करना चाहिए। इसलिए बेंच ने माना कि अपील अथॉरिटी का ऑर्डर अमान्य था और पिटीशनर की सर्विस खत्म करने का ऑर्डर टिकने लायक नहीं था। हाईकोर्ट बेंच ने इंपीच किए गए ऑर्डर रद्द कर दिए और रेस्पोंडेंट्स को पिटीशनर को पोस्ट पर वापस लाने का आदेश दिया।
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