MP की वर्ल्ड चैंपियन बेटियों का सम्मान: प्रदेश की तीनों महिला ब्लाइंड क्रिकेटर्स को 25-25 लाख रुपए देने का ऐलान, कोच को भी मिलेगा इनाम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शनिवार, 13 दिसंबर को ब्लाइंड विमेंस टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 विजेता टीम की मप्र की तीनों प्लेयर्स ने भेंट की। इस मौके पर सीएम ने  इन खिलाड़ियों को 25-25 लाख  रुपए प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया।

Indian Womens Blind World Cup Champion

Indian Womens Blind World Cup Champion: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शनिवार, 13 दिसंबर को ब्लाइंड विमेंस टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 विजेता टीम की मप्र की तीनों प्लेयर्स ने भेंट की। इस मौके पर सीएम ने  इन खिलाड़ियों (सुनीता सराठे, सुषमा पटेल व दुर्गा येवले ) को 25-25 लाख  रुपए प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया। वहीं इन प्लेयर्स के कोच को एक-एक लाख रुपए देने की बात कही।

कोच को भी मिलेगी प्रोत्साहन राशि

इन खिलाड़ियों में सुनीता सराठे-नर्मदापुरम, सुषमा पटेल-दमोह और दुर्गा येवले-बैतूल की रहने वाली हैं। तीनों खिलाड़ियों को प्रोत्साहन के रूप में 10-10 लाख रुए कैश और 15-15 लाख रुपए एफडी के रूप में प्रदान किए जाएंगे। साथ की मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सीएम हाउस में मुलाकात के दौरान खिलाड़ियों के कोचों को भी सम्मानित करने का फैसला किया है। जिसमें तीन प्लेयर्स के कोच को एक-एक लाख रुपए दिए जाएंगे। इनमें सोनू गोलकर, ओमप्रकाश पाल और दीपक पाहड़े शामिल हैं।

CM Mohan Yadav blind cricketer
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रथम महिला T20 वर्ल्ड कप क्रिकेट( ब्लाइंड) 2025 की विजेता भारतीय टीम में शामिल प्रदेश की तीन महिला खिलाड़ियों से मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में भेंट की।

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प्लेयर्स की पढ़ाई और कोचिंग अब सरकार कराएगी

चैंपियन टीम इंडिया की इन खिलाड़ियों के आगे की पढ़ाई और कोचिंग आदि की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा किी जाएगी।

जानकारी के मुताबिक, भारतीय विमेंस ब्लाइंड क्रिकेट टीम ने महिला टी-20 वर्ल्ड कप क्रिकेट के फाइनल में नेपाल को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इस टीम में मध्यप्रदेश की सुनीता सराठे, सुषमा पटेल और दुर्गा येवले शामिल थीं। टीम में सुनीता सराठे और सुषमा पटेल ऑलराउंडर खिलाड़ी तथा दुर्गा येवले बल्लेबाज-विकेट के रूप में खेलती हैं।

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 स्पोर्ट्स पॉलिसी के बिना नहीं सुधरेंगे हालात

गोलकर कहते हैं- मैंने भी तीन वर्ल्ड कप खेले हैं, लेकिन कभी किसी नेता का व्यक्तिगत फोन नहीं आया। आज अगर इन लड़कियों के लिए लड़ाई लड़नी पड़ी तो मैं पीछे नहीं हटूंगा। ये बेटियां भी इसी देश की हैं। क्या सिर्फ इसलिए इन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है क्योंकि ये दिव्यांग हैं?

उन्होंने कहा- दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए एक खास स्पोर्ट्स पॉलिसी के बिना हालात नहीं सुधरेंगे। अगर आज इन बच्चियों को सम्मान नहीं मिला तो यह भेदभाव होगा। क्रांति के लिए खजाना खोल दिया गया है…तो ये बेटियां किस गुनाह की सजा भुगत रही हैं?

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