IAS Santosh Verma Controversy Update: IAS संतोष वर्मा पर एक्शन न लेने से नाराज प्रदर्शनकारियों को CM आवास जाने से रोका, वॉटर कैनन चलाया

ब्राह्मण बेटियों को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान के बाद भी IAS संतोष वर्मा खिलाफ एक्शन न लेने पर ब्राह्मण समाज का आक्रोश बढ़ गया। ब्राह्मण समाजजन सीएम मोहन यादव के सरकारी आवास की ओर पैदल निकल पड़े।

IAS Santosh Verma Controversy

IAS Santosh Verma Controversy Update: ब्राह्मण बेटियों को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान के बाद भी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी संतोष वर्मा खिलाफ एक्शन न लेने पर ब्राह्मण समाज का आक्रोश बढ़ गया।

रविवार, 14 दिसंबर, 2025 दोपहर करीब 1 बजे एकजुट होकर ब्राह्मण समाजजन सीएम मोहन यादव के सरकारी आवास की ओर पैदल निकल पड़े। रास्ते में जगह-जगह पुलिस ने बेरिकेड तो कहीं रस्सा बांधकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन फिर भी आगे बढ़ रहे हैं।

रोशनपुरा में वॉटर केनन की बौछार से रोका

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रोशनपुरा चौराहा के पास बेरिकेड से पूरा रास्ता बंद किया गया है। हालांकि, फिर भी प्रदर्शनकारी बेरिकेड को हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वॉटर कैनन चलाना शुरू कर दिया। पानी की तेज बौछार में भीगने पर महिला प्रदर्शनकारी पीछे हट गईं।

आईएएस पर एफआईआर-बर्खास्तगी की मांग

कुछ ही समय में फिर प्रदर्शनकारी बेरिकेड के पास एकजुट हो गए। पुलिस ने वॉटर कैनन की बौछार के बीच जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारी अधिकारी संतोष वर्मा के बयान को ब्राह्मण बेटियों का अपमान बताते हुए उन पर तत्काल FIR दर्ज करने और उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं।

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अजाक्स सम्मेलन में दिया था ये विवादित बयान

IAS संतोष वर्मा ने अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) के एक कार्यक्रम में कथित तौर पर विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि "जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता... तब तक आरक्षण जारी रहे।" बाद में अधिकारी ने बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने की बात कहकर माफी मांगी थी। इस बयान से ब्राह्मण समाज में गहरा आक्रोश है, जिसे लेकर प्रदेशभर में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

फर्जी पदोन्नति मामले में जेल जा चुके आईएएस

इस विवाद के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले का संज्ञान लिया और अधिकारी संतोष वर्मा को उनके सभी वर्तमान पदों से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) में अटैच कर दिया है। सरकार ने उनकी बर्खास्तगी के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की प्रोसेस भी शुरू कर दी है, क्योंकि उन पर पूर्व में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पदोन्नति पाने के आरोप भी हैं, जिसके चलते वे जेल भी जा चुके हैं।

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