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Advocate Anil Mishra Released:ग्वालियर के चर्चित वकील अनिल मिश्रा सेंट्रल जेल से रिहा हो गए हैं। दरअसल, डॉ अंबेडकर का चित्र जलाने के मामले में अनिल मिश्रा समेत 4 लोग 6 दिनों से जेल में बंद थे। उनपर चित्र जलाने के साथ-साथ नारेबाजी का भी आरोप है।
हालांकि, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका मंजूर करते हुए इस मामले में पुलिस द्वारा की गई जल्दबाजी और प्रक्रियागत गलतियों पर असंतोष जताया है। कोर्ट ने ₹1 लाख के मुचलके पर रिहाई का आदेश देते हुए मामले से जुड़ी किसी भी प्रकार की रैलियों या जुलूस निकालने पर सख्त पाबंदी लगाई है।
एक लाख के बांड पर मिली रिहाई
हाई कोर्ट ने एडवोकेट अनिल मिश्रा को एक लाख रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया। कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए किसी भी प्रकार की भीड़ इकट्ठा करने या विजय जुलूस निकालने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी नियमों के विरुद्ध थी। अब इस मामले के अन्य आरोपियों की रिहाई की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।
जुलूस और रैलियों पर सख्त पाबंदी
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि रिहाई के बाद किसी भी प्रकार का शक्ति प्रदर्शन या विवादित जुलूस नहीं निकाला जाएगा। कोर्ट का उद्देश्य क्षेत्र में शांति और सद्भाव बनाए रखना है। एडवोकेट अनिल मिश्रा की टीम अब इस पूरे मामले की FIR को निरस्त कराने के लिए कानूनी रास्ता अपनाने पर विचार कर रही है। उनका तर्क है कि पुलिस ने दबाव में आकर यह कार्रवाई की है।
क्या था पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत 1 जनवरी को डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर जलाने और कथित तौर पर आपत्तिजनक नारेबाजी करने से हुई थी। इस घटना के विरोध में 2 जनवरी को ग्वालियर में भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी जैसे दलित संगठनों ने कलेक्ट्रेट के बाहर ढाई घंटे तक उग्र प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने अनिल मिश्रा पर एनएसए (रासुका) लगाने की मांग की थी।
इसके बाद, एडवोकेट अनिल मिश्रा सहित 8 लोगों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस ने गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया का सही पालन नहीं किया। अदालत ने कहा कि एफआईआर दर्ज करने और हिरासत में लेने के दौरान पुलिस ने गलतियां की हैं। साथ हीं, पुलिस उन्हें दंड प्रक्रिया संहिता के नियमों के तहत नोटिस देकर भी छोड़ सकती थी, लेकिन उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया।
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