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Shahpura-Bhitoni ROB collapse Update: भोपाल-जबलपुरनेशनल हाईवे क्रमांक-45 पर शहपुरा-भिटोनी आरओबी धंसने के मामले में कॉन्ट्रैक्टर कंपनी के टीम लीडर समेत 2 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
मध्यप्रदेशरोड डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन (MPRDC) की ओर से लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव को लेटर लिखकर रिटायर्ड डिवीजनल मैनेजर और असिस्टेंट जनरल मैनेजर की पेंशन रोकने या वापस लेने की मांग की।
सितंबर 2025 में धंस चुका ROB का एक हिस्सा
दरअसल, जबलपुर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-45) पर शहपुरा-भिटोनी के पास ओवरब्रिज (ROB) का एक हिस्सा 9 सितंबर 2025 को दूसरी ओर का हिस्सा धंस गया था। जिसके बाद से आरओबी का मरम्मत काम चल रहा था। इस बीच रविवार, 22 फरवरी 2026 को दूसरा हिस्सा धंस गया।
देखें लेटर...
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आरओबी की उम्र 50 साल, 4 साल में धंस गया
शहपुरा-भिटोनी आरओबी का काम राजस्थान के बासवाड़ा की वागड़ कंपनी के पास था। 19 दिसंबर 2017 को कॉन्ट्रेक्टर कंपनी से अनुबंध हुआ। 23 जनवरी 2018 से काम शुरू होना था, जिसे 7 फरवरी 2022 तक पूरा किया गया। इस आरओबी की उम्र 50 वर्ष होना चाहिए थी, लेकिन सिर्फ 4 साल में ही निर्माण जवाब देने लगा है।
जांच में ये सामने आए चौंकाने वाले खुलासा
- सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा की गई तकनीकी जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
- आरओबी के निर्माण के दौरान कॉन्ट्रेक्टर कंपनी ने मानकों के खिलाफ काम किया।
- आरओबी के निर्माण काम में घटिया किस्म के मटेरियल का उपयोग किया गया।
- अथॉरिटी इंजीनियर और संबंधित अधिकारियों ने मॉनिटरिंग में घोर लापरवाही बरती।
- बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया।
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एफआईआर...
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कंपनी ने नागरिकों के जीवन को खतरे में डाला
एमपीआरडीसी के संभागीय प्रबंधक राकेश मोरी ने शहपुरा थाना में राजस्थान की वागड़ कंपनी के खिलाफ लिखित शिकायत दी। जिसमें कॉन्ट्रैक्टर कंपनी, अधिकृत विनोद जैन, टीम लीडर हुकुम सिंह परमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। उनके खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, नागरिकों के जीवन को खतरे में डालने की मांग की। इस कंपनी को पहले भी ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है।
दो रिटायर्ड अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
मध्यप्रदेश रोड डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन के प्रबंध संचालक भरत यादव ने मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव को एक लेटर भेजा। जिसमें उन्होंने तत्कालीन संभागीय प्रबंधक आरपी सिंह और तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक संतोष शर्मा के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मां की। साथ ही दोनों को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन रोकने या वापस लेने की मांग की। जिसका अधिकार राज्यपाल के पास है।
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