
Rashtriya Dalhan Aatma nirbharta Mission: सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन पर राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- मिशन के अंतर्गत कलस्टर डेव्हलप करेंगे। कलस्टर के अंतर्गत हर किसान को बीज का कीट भी देंगे। एक हेक्टेयर के लिए 10 हजार रुपया दिया जाएगा, ताकि वो आइडियल खेती कर सके। एकॉर्डा और ICAR देखरेख करेगा। मैं किसानों को ऑफर दे रहा हूं, बीज उगाओ, बीज बेचों। किसान दाल मिल लगाना चाहे तो 25 लाख रुपए तक की सब्सिडी दी जाएगी। 1 हजार दाल मिल खोलेंगे। 55 दाल मिल मध्यप्रदेश में लगाई जाएगी, ताकि वहीं प्रोसेसिंग का काम हो सकेंगी।
मध्यप्रदेश में ही नहीं, हर राज्य में बनाएंगे बीज ग्राम
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- हम बीज ग्राम बनाने वाले हैं, देश को बीज हब बनाएंगे, मध्यप्रदेश में ही नहीं, हर राज्य में कृषि मंत्री तय करें, बीज ग्राम में किसानों को पूरा सहयोग किया जाएगा। उन्हें सारी तकनीकी सलाह दी जाएगी, वैज्ञानिकों की देखरेख में करेंगे, ताकि किसानों को तेजी से अच्छे बीज मिल जाए। बीज से बाजार तक की चिंता करेंगे।
किसान जितना बेचेंगे, पूरा का पूरा खरीदा जाएगा
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन की खरीदी होगी। तुअर 8 हजार प्रति क्विंटल खरीदा जाएगा। उड़द 7800 रुपए, चना 5875 रुपए, मसूर 7000 प्रति क्विंटल खरीदेंगे। जितना बेचेंगे, पूरा का पूरा खरीदा जाएगा। मसूर, उड़द, अरहर 100 प्रतिशत खरीदा जाएगा। पैदा करों, बाजार तैयार है आपके लिए। ताकि दाम ठीक मिले।
18% टैरिफ से भारत के चावल को मिलेगा बाजार
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- एक्सपोर्ट से हम हरियाणा, पश्चिमी उत्तरप्रदेश, पंजाब में बासमती उगाते हैं। पिछले साल 63 हजार करोड़ का निर्यात किया था। 18 प्रतिशत टैरिफ से भारत के बासमती चावल को दुनिया में बाजार मिलेगा। इस बार और निर्यात बढ़ेगा। हमारे मसालों को बाजार मिलेगा। टेक्सटाइल सेक्टर में निर्यात बढ़ेगा। कपास उत्पादकों को फायदा मिलेगा।
सीहोर का शरबती गेहूं दुनिया में धूम मचाएगा
मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सीहोर का शरबती गेहूं दुनिया में धूम मचाएगा, उस पर कोई आंच नहीं आएगी। आत्मनिर्भर के तहत यूरोप के 27 देश समेत अमेरिका से हमारा समझौता हुआ है। कई लोग बड़ी हाय तौबा मचा रहे थे। कोई पहाड़ टूट जाएगा, आफत आ जाएगी। हमारे यहां कोई ऐसी चीज नहीं आएगी, जो किसानों को नुकसान करे।
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दाल विदेशों से मंगवाना पड़े, ये हमारे लिए शर्म की बात
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभी हमको बाहर से दालें मंगवाना पड़ती हैं। मध्य प्रदेश के किसान हम कितनी दाल पैदा करते थे, तुअर, मसूर, चना, तेवड़ा, मटर, उड़द, मूंग, मूंग छोड़कर बाकी का उत्पादन घट गया। दाल हमें विदेशों से मंगवाना पड़े, ये हमारे लिए आनंद का विषय नहीं, शर्म की बात हैं।
दलहन उत्पादन में MP नंबर 1, लेकिन घटा एरिया
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से देख रहे हैं कि किसान सोयाबीन और गेहूं बो रहे हैं। क्रॉप पैटर्न डिस्टर्ब कर दिया। दालों का क्षेत्र धीरे-धीरे घटता चला गया। हालांकि, मध्पप्रदेश में आज भी दलहन के उत्पादन में देश में नंबर 1 है, लेकिन एरिया घट रहा हैं। अब हमें दलहन बढ़ाने की जरुरत हैं।
70 और 80 दिन में आने वाली वैरायटी बना रहे हैं हम
3 हजार मसूर के प्लॉट हैं यहां। आईसीआर और एकार्डा ने बनाए हैं। जल्दी आने वाली वैरायटी बना रहे हैं हम। 110-120 दिन नहीं, 70 और 80 दिन में मसूर पककर तैयार हो जाएगी। ज्यादा गर्मी पड़ने से पहले मसूर पककर तैयार हो जाएगी, ऐसी किस्मे तैयार कर रहे हैं हम। खरपतवार पनप ही नहीं पाएगी, पौधा ही मार देगा उसको। मसूर दो घेटी वाला होता हैं, चार घेटी वाली मसूर पैदा कर रहे हैं हम, उत्पादन दुगना हो जाएगा। बिना कांटे का केकटस पैदा करेंगे हम, जो कई तरह के कामों में आएगा।
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सभी गुण एक ही पौधे में डालेंगे, उत्पादन, पोषण बढ़ेगा
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- खेतों में आने से पहले खेत में मसूर सूख जाती थी, उगर जाती थी। झुलसा रोग, उगरा। इससे निपटने के इंतजाम किए जा रहे हैं। कई तरह के गुण रहते हैं, अलग- अलग पौधों के गुण एक जगह इकट्टे करके, सारे गुण एक ही पौधे में डाल दिए जाएंगे, जिससे बेहतर उत्पादन हो और पोषण भी बढ़े।
गांव-खेतों में न जाने वाला कृषि मंत्री बाबू बन गया
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- हमने एक फैसला किया है। कोई भी बीज दिल्ली में रिलीज नहीं होगा। अलग-अलग प्रदेशों में जाकर किसानों के बीच बीज रिलीज करेंगे। पहली बार दलहन मिशन पर गांव में मंथन कर रहे हैं। दिल्ली में कृषि भवन के कमरे में कृषि की बात करो तो समझ आएगी क्या ? खेती तो खेत में ही समझी जाएगी, इसलिए मैंने कृषि मंत्रालय को दिल्ली के बाहर निकाल दिया। कृषि मंत्री हम भी प्रदेश में बैठकर रोडमैप बनाएंगे। गांव-गलियों, खेतों में अगर कृषि मंत्री न जाए तो काहेका कृषि मंत्री, वो तो बाबू बन गया, दफ्तर में बैठे-बैठे। गांव में जाना होगा, खेतों में जाना होगा।
अधिक उत्पादन, रासायनिक खादों से जीवनशैली बदली
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा- पहले सभी फसले होती थीं। अधिक उत्पादन, रासायनिक खादों की वजह से जाने अनजाने हमसे गलतियां हुईं, जीवनशैली बदली, Genes भी बदले। मसूर हमारे खेतों से गायब हो गई हैं। तूअर दालों का रकबा भी कम हो गया हैं। दलहन, तिलहन मिशन में मध्यप्रदेश सरकार आगे खड़ी रहेगी। 1956 में मध्यप्रदेश बना, लेकिन 2002-03 तक साढ़े सात लाख हेक्टेयर रकबा था। कांग्रेस ने किसानों की परवाह नहीं की। 20 साल में 44 लाख हेक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ा।
दलहन पैदावार में मध्यप्रदेश देश का आइडियल
आईसीएआर के डीजी एमएल जाट ने कहा- देश में दलहन की औसत पैदावार 926 किलो प्रति हेक्टेयर हैं। जबकि मध्यप्रदेश में दलहन की औसत पैदावार 1200 किलो हैं, जो मध्यप्रदेश को आइडियल बनाता है। मध्यप्रदेश से सीखकर हम 1200 किलो कर दे तो 8 मिलियन टन पल्सेस बढ़ सकता हैं। हम आत्मनिर्भर हो जाएंगे। सिम्पल फॉर्मूला है। भारतीय कृषि अनुसंधान, परिषद, इकार्डा सहित किसानों के साथ मिलकर हम काम करेंगे। तकनीक और समस्याओं पर मंथन करेंगे। आज ही रोडमैप तैयार करेंगे। भारत को पल्सेस को आत्मनिर्भर बनाने में ज्यादा समय नहीं लगाएंगे।
एमपी में किसान टेक्निकल खेती नहीं कर पा रहे
मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना हमारे किसान शुद्ध खेती करते हैं। टेक्निकल खेती नहीं कर पा रहे हैं। जब तक खेती को लाभ का धंधा नहीं बनाएंगे, तब तक आगे नहीं बढ़ पाएंगे।
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