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MP में 1.5 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट: पुराने गुरुजी को भी पास करनी होगी TET परीक्षा, फेल हुए तो घर जाओ, शिक्षक संगठनों में उबाल

मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने RTE 2009 और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए करीब 1.5 लाख शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य कर दी है। जो शिक्षक यह परीक्षा पास नहीं करेंगे, उन्हें हटाया जा सकता है।

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Vikram Jain
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MP Teacher TET Mandatory: मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में बरसों से सेवा दे रहे करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने एक सनसनीखेज आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को भी अब अपनी योग्यता साबित करनी होगी। शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा ((Teacher Eligibility Test)) अनिवार्य कर दी है। जो शिक्षक 2 साल के भीतर यह परीक्षा पास नहीं करेंगे, उन्हें सेवा से हटाया जा सकता है। विभाग के इस फैसले से 1995 से कार्यरत अध्यापक संवर्ग में हड़कंप मच गया है।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश बना आधार

मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने RTE 2009 और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए करीब 1.5 लाख शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य कर दी है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, ऐसे सभी शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति (Retirement) में अभी 5 साल से अधिक का समय शेष है, उन्हें अनिवार्य रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) में बैठना होगा। विभाग का कहना है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के पालन में उठाया गया है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का पात्रता परीक्षा पास होना जरूरी बताया गया है।

खुद को साबित करने के लिए दिया समय

शासन ने इन शिक्षकों को खुद को साबित करने के लिए दो साल का समय दिया है। विभाग की योजना के अनुसार, इन शिक्षकों के लिए विशेष पात्रता परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में आयोजित की जा सकती है। यदि कोई शिक्षक इस निर्धारित समय सीमा के भीतर परीक्षा पास करने में असफल रहता है, तो उसे अनिवार्य रूप से इस्तीफा देना होगा या विभाग उसे सेवा से मुक्त कर देगा।

जुलाई-अगस्त 2026 में होगी परीक्षा

शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि यह नया नियम उन शिक्षकों के लिए है, जिनकी भर्ती RTE एक्ट (2009) लागू होने से पहले हुई थी। विभाग ने इस संबंध में निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

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  • शिक्षकों की पहचान: विभाग ने अधिकारियों से कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में ऐसे शिक्षकों की लिस्ट तैयार करें, जिन्होंने अब तक पात्रता परीक्षा पास नहीं की है। इन शिक्षकों को समय रहते परीक्षा की सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।
  • परीक्षा की तारीख: विभाग की योजना के अनुसार, इन शिक्षकों के लिए विशेष TET परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में आयोजित की जा सकती है।
  • पदोन्नति (Promotion) के लिए भी जरूरी: अब न केवल नई भर्ती, बल्कि प्रमोशन पाने के लिए भी शिक्षकों का TET पास होना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना इस परीक्षा के न तो नई नियुक्ति होगी और न ही पदोन्नति दी जाएगी।

विरोध में उतरे शिक्षक संगठन

विभाग के इस फैसले ने प्रदेश के शिक्षक संगठनों को नाराज कर दिया है। कर्मचारी संघों का साफ कहना है कि जो शिक्षक 20-25 सालों से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें अब इस उम्र में परीक्षा के नाम पर नौकरी से निकालना सरासर गलत है।

कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सरकार 'सीएम राइज' स्कूलों के माध्यम से छोटे सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है। आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा के अनुसार, स्कूलों के विलय से बड़ी संख्या में शिक्षक 'सरप्लस' (अतिरिक्त) हो रहे हैं। ऐसे में पात्रता परीक्षा के नाम पर उन्हें नौकरी से बाहर करना विभाग की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

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कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे

आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा का कहना है कि शिक्षा विभाग का यह आदेश शिक्षकों के भविष्य के लिए बहुत खतरनाक है। सालों से मेहनत कर रहे गुरुजी को इस तरह 'अग्निपरीक्षा' में डालना उनके साथ अन्याय है। इस आदेश को चुनौती देने के लिए शिक्षक संगठन अब सुप्रीम कोर्ट में 'पुनर्विचार याचिका' (रिव्यू पिटीशन) लगाने की तैयारी कर रहे हैं।

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