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MP में संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों का आंदोलन शुरू: 23-24 फरवरी को हड़ताल के साथ भोपाल में हल्ला बोल प्रदर्शन

मध्यप्रदेश में संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। इसी क्रम में 23 और 24 फरवरी 2026 को कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर रहेंगे और राजधानी भोपाल में 'हल्ला बोल' प्रदर्शन करेंगे।

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BP Shrivastava
MP Samvida Health Workers Strike

MP Samvida Health Workers Strike: मध्यप्रदेश में संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। इसी क्रम में 23 और 24 फरवरी 2026 को कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर रहेंगे और राजधानी भोपाल में 'हल्ला बोल' प्रदर्शन करेंगे।
मध्यप्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने बताया कि वर्षों सेवाएं देने के बावजूद कर्मचारियों का स्थायीकरण नहीं किया गया, जिससे प्रदेशभर के कर्मचारियों में आक्रोश है।

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भोपाल में हल्ला बोल प्रदर्शन

संघ की प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने बताया कि कर्मचारियों ने 9 मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रदेश के 30 हजार से अधिक आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी 16, 17 और 18 फरवरी 2026 को काली पट्टी बांधकर अपने-अपने कार्यस्थलों पर सेवाएं रहे हैं। इसके बाद 23 और 24 फरवरी को सामूहिक हड़ताल करेंगे। साथ ही राजधानी भोपाल में हल्ला बोल नाम से प्रदर्शन किया जाएगा।

12 से 14 घंटे सेवा, फिर भी भविष्य सुरक्षित नहीं

संघ के मुताबिक प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र, संजीवनी क्लिनिक और पोषण पुनर्वास केंद्रों में आउटसोर्स कर्मचारी 12 से 14 घंटे तक कार्य करते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे अस्पतालों की रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं, इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा या भविष्य की सुरक्षा नहीं दी गई है।

सरकार पर दोहरी नीति का आरोप

संघ का आरोप है कि सरकार की दोहरी और दमनकारी नीति के कारण अफसरों और निजी आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा लगातार शोषण किया जा रहा है। कई बार ज्ञापन और प्रदर्शन के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान मांगों की ओर कराया गया, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी के विरोध में अब चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाया पड़ रहा है।

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संघ का आरोप है कि सरकार की दोहरी और दमनकारी नीति के कारण अफसरों और निजी आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा लगातार शोषण किया जा रहा है। कई बार ज्ञापन और प्रदर्शन के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान मांगों की ओर कराया गया, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी के विरोध में अब चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाया पड़ रहा है। 

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ये हैं 9 प्रमुख मांगें

  • संघ की प्रमुख मांगों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत सेवाएं दे चुके कर्मचारियों का तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर समायोजन या संविदा में बिना शर्त विलय,

  • न्यूनतम 21 हजार रुपए वेतन, 11 माह के एरियर का भुगतान, 

  • निजी एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर सीधे खातों में वेतन,

  • शासकीय छुट्टियां, नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण,

  • स्वास्थ्य बीमा और ग्रेच्युटी का लाभ 

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