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Madhya Pradesh Police Protest: मध्यप्रदेश पुलिस के करीब 5500 ट्रेड कॉन्स्टेबलों की ओर से उज्जैन के महाकाल दरबार में एक अर्जी लगाई है।
महाकाल को अर्पित अर्जी में आरोप लगाया गया है कि पुलिस अफसरों के बंगलों में जवान गुलामों की जिंदगी जी रहे हैं। जवानों का कहना है कि उन्हें जनता की सुरक्षा के बजाय बड़े अधिकारियों के बंगलों पर झाड़ू-पोंछा, बर्तन धोना, खाना बनाना और पालतू कुत्तों को घुमाने जैसे काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
सीएम से अर्दली प्रथा को खत्म करने की मांग
इन सिपाहियों ने एक मार्मिक प्रार्थना पत्र के जरिए सीएम मोहन यादव से अर्दली प्रथा को खत्म करने की मांग की है। ट्रेड कॉन्स्टेबलों ने मानव अधिकारों का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि वर्दी की गरिमा को ठेस पहुंच रही है। जवानों ने इस व्यवस्था को सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ बताया है।
अधिकारियों की सुख-सुविधाओं पर बर्बाद हो रहा टैक्स
जवानों का कहना है कि इन 5500 जवानों पर सरकार करीब 250 से 300 करोड़ रुपए वेतन के रूप में खर्च कर रही है। यानी हर साल जनता से लिया टैक्स अधिकारियों की निजी सुख-सुविधाओं में बर्बाद हो रहे हैं। यदि यही काम आउटसोर्सिंग के जरिए कराया जाए, तो सिर्फ 45 करोड़ में संभव होगा।
5 साल सेवा के बाद जनरल ड्यूटी में करते थे शामिल
महाकाल को अर्पित अर्जी के मुताबिक, पहले जीओपी 57/93 नियम के तहत ट्रेड आरक्षकों को 5 साल की सेवा के बाद जनरल ड्यूटी में शामिल कर लिया जाता था, जिससे वे फील्ड में कानून व्यवस्था संभालते थे। साल 2012 में तत्कालीन डीजीपी नंदन दुबे के कार्यकाल में व्यवस्था को बंद कर दिया गया।
हमारे बच्चे ये न कहें कि उनके पिता गुलाम हैं
जवानों के मुताबिक, मद्रास हाईकोर्ट पहले ही अर्दली प्रथा को अवैध घोषित कर चुका है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 के तहत सरकारी अमले को निजी काम में लगाना अपराध की श्रेणी में आता है। हमारी वर्दी अपमान से झुकी हुई है। हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे यह न कहें कि उनके पिता गुलाम हैं।
संविलियन से सरकार पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त भार
महाकाल को अर्पित अर्जी में जवानों ने बताया कि ट्रेड आरक्षकों और जीडी आरक्षक का वेतनमान समान 5200—20200—1900 है, इसलिए उनके संविलियन से सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भारी नहीं पड़ेगा।
ये है प्रमुख मांगें
- जीओपी 57/93 को पुन: बहाल किया जाए।
- ट्रेड आरक्षकों को कानून व्यवस्था और ट्रैफिक जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में तैनात किया जाए।
- पदोन्नति के बाद कार्यक्षेत्र में बदलाव की अनुमति दी जाए।
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