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MP Teachers salary hike: मध्यप्रदेश के सरकारी शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए साल 2026 की शुरुआत खुशियों भरी होने वाली है। पिछले 3 साल से अटकी 'चौथी वेतन वृद्धि' (चतुर्थ समयमान) का इंतजार अब खत्म होने वाला है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार प्रदेश के करीब सवा लाख कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने की अंतिम तैयारी कर चुकी है। जिन शिक्षकों ने अपनी नौकरी के 35 साल पूरे कर लिए हैं, उन्हें फायदा देने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने 312 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया है। जैसे ही कैबिनेट से इसे मंजूरी मिलेगी, शिक्षकों के खाते में हर महीने 3 से 5 हजार रुपए ज्यादा सैलरी आएगी। इस फैसले से न केवल शिक्षकों के घर में खुशहाली आएगी, बल्कि वरिष्ठ कर्मचारियों को भी लंबे इंतजार के बाद अपना हक मिलेगा।
35 साल की सेवा का मिलेगा सम्मान
इस वेतन वृद्धि का मुख्य लाभ उन शिक्षकों और अधिकारियों को मिलेगा जिन्होंने शिक्षा विभाग में अपनी सेवा के 35 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। दरअसल, कर्मचारी लंबे समय से 'चौथा समयमान वेतनमान' की मांग कर रहे थे। सरकार अब इस पदोन्नति और वेतन वृद्धि के माध्यम से उनके समर्पण का सम्मान करने जा रही है।
सवा लाख शिक्षकों का इंतजार खत्म!
स्कूल शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों के साथ-साथ प्राचार्य और सहायक संचालक स्तर के करीब 1.25 लाख से 1.50 लाख कर्मचारी इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि पूर्व में कुछ व्याख्याताओं और प्राचार्यों को यह लाभ मिल चुका था, लेकिन पदोन्नति से आए शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग इससे वंचित था। अब मोहन सरकार सभी पात्र कर्मचारियों को एक समान लाभ देने की तैयारी में है।
वेतन में 3 से 5 हजार रुपए का इजाफा
चतुर्थ समयमान लागू होने के बाद शिक्षकों की बेसिक सैलरी और ग्रेड पे में बदलाव होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, पद की वरिष्ठता के आधार पर हर शिक्षक की सैलरी में कम से कम 3,000 और अधिकतम 5,000 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी सुनिश्चित होगी। इस योजना के क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश सरकार के खजाने पर प्रति वर्ष लगभग 312 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
शिक्षक दिवस के वादे पर अमल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 सितंबर 2025 (शिक्षक दिवस) को सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि बचे हुए सभी शिक्षकों को चतुर्थ समयमान दिया जाएगा। हाल ही में स्कूल शिक्षा मंत्री और शिक्षक संगठनों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रस्ताव अंतिम चरण में है और अगली कुछ कैबिनेट बैठकों में इसे मंजूरी मिल जाएगी। जिसके बाद 35 साल की सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों के वेतन में 3 से 5 हजार रुपये की मासिक वृद्धि होगी।
घोषणा के 5 महीने बाद भी हाथ खाली
मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौर ने विभाग की सुस्ती पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री ने 5 महीने पहले ही चतुर्थ समयमान की घोषणा कर दी थी, लेकिन विडंबना देखिए कि विभाग के अफसर आज तक फाइलें ही घुमा रहे हैं। इस देरी की वजह से हर शिक्षक को हर महीने 3 से 5 हजार रुपए का सीधा आर्थिक नुकसान हो रहा है। हमारी मांग है कि विभाग अब और वक्त बर्बाद न करे और इसे तुरंत लागू करे।
तैयारी पूरी, अब कैबिनेट की बारी
दूसरी ओर, स्कूल शिक्षा विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी कमल सिंह सोलंकी ने बताया कि विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। उन्होंने कहा, "शिक्षकों को चतुर्थ समयमान देने का प्रस्ताव कैबिनेट में चर्चा के लिए भेज दिया गया है। वहां से हरी झंडी मिलते ही आदेश जारी कर दिए जाएंगे। इस फैसले से सरकार पर 312 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, लेकिन पात्र शिक्षकों को उनका हक जरूर मिलेगा।"
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