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MP Water Pipeline Inspection Campaign: इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से कई लोगों की मौतों के बाद शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल दोषियों पर गाज गिराई है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए नई 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) जारी कर दी है। अब प्रदेश के हर नगर निगम और पालिका को 7 दिन के भीतर अपनी जल प्रदाय व्यवस्था को चाक-चौबंद करना होगा। साथ ही प्रदेश की सभी नगर पालिक, परिषद, नगर निगम में साफ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। दूषित पानी की शिकायतों को अब 'आपातकालीन' माना जाएगा और 48 घंटे में समाधान करना होगा। क्लोरिनेशन और जल शुद्धिकरण संयंत्रों की अब 24x7 मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी।
इंदौर की घटना के बाद प्रदेशभर में अलर्ट
मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल के कारण हुई 15 मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर दौरे से लौटते ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इंदौर मामले में की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे नगर निगम इंदौर द्वारा की गई शुरुआती कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। जनस्वास्थ्य सरकार के लिए सर्वोपरि है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
जनता की सेहत से कोई समझौता नहीं
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी नगरपालिक, निगम के महापौर के साथ-साथ संभागायुक्त, कलेक्टर और कमिश्नर नगर निगम के साथ बैठक लेकर नागरिकों को साफ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सीएम ने स्पष्ट किया कि जनता की सेहत से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी अन्य शहर में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। प्रदेश की सभी नगर पालिक, परिषद, नगर निगम में साफ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अभियान चलाया जाए। अभियान के संबंध में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने एसओपी जारी किया है। विभाग ने इसके लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं।
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मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश
- सतर्कता और सजगता: प्रदेश के सभी नगरीय निकायों का अमला अलर्ट मोड पर रहे और नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह सजग रहे।
- जीरो टॉलरेंस: इंदौर जैसी दुखद घटना की पुनरावृत्ति प्रदेश के किसी भी अन्य हिस्से में नहीं होनी चाहिए।
- बेहतर तालमेल: जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और तालमेल मजबूत हो। ताकि जनता की शिकायतों पर तत्काल कदम उठाए जा सकें।
- त्वरित एक्शन: पेयजल या जनसुविधा से जुड़ी शिकायत मिलते ही (फोन या अन्य माध्यम) अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करें।
- नियमों का पालन: नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी नई गाइडलाइंस (SOP) का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
पेयजल सुरक्षा के लिए नई गाइडलाइंस
1. पुरानी और संवेदनशील पाइपलाइनों की जांच
- 20 साल से पुरानी पाइपलाइनों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों का सर्वे कर उन्हें चिन्हित किया जाए।
- सीवर या नालियों के पास से गुजरने वाली पाइपलाइनों पर विशेष नजर रखी जाए।
2. समय सीमा में मरम्मत (Deadlines)
- पाइपलाइन में रिसाव (Leakage) दिखने पर 48 घंटे के भीतर उसकी मरम्मत अनिवार्य है।
- दूषित जल से जुड़ी शिकायतों का निराकरण 24 से 48 घंटे के अंदर करना होगा।
3. जल टंकियों और फिल्टर प्लांट की सफाई
- अगले 07 दिनों के भीतर सभी जल शोधन संयंत्रों (WTP) और ऊंची टंकियों (OHT) का निरीक्षण और सफाई सुनिश्चित हो।
- सभी प्रमुख जल स्रोतों और टंकियों से तुरंत पानी के सैंपल लेकर लैब टेस्टिंग की जाए।
4. शुद्धिकरण और निगरानी
- पानी की सप्लाई में Chlorination (क्लोरिनेशन) सिस्टम की 24x7 मॉनिटरिंग की जाए। यदि पानी में जरा भी प्रदूषण मिले, तो तत्काल सप्लाई रोककर जनता के लिए वैकल्पिक सुरक्षित पानी की व्यवस्था की जाए।
5. इमरजेंसी कैटेगरी में होंगी शिकायतें
- दूषित पेयजल या सीवेज मिक्सिंग से जुड़ी शिकायतों को अब 'इमरजेंसी कैटेगरी' में रखा जाएगा। सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली गंदे पानी और सीवेज की शिकायतों का निराकरण सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ किया जाएगा।
6. जन जागरूकता
- लीकेज की पहचान और पानी की बर्बादी रोकने के लिए सभी निकायों में 'Pipeline Leakage Detection' जागरूकता अभियान चलाया जाए।
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