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MP में पेंशनर का DR बढ़ेगा: छत्तीसगढ़ ने 3 फीसदी बढ़ाया, बंटवारे के फार्मूले पर अमल के बाद मप्र में भी बढ़ने के आसार

Madhya Pradesh DR Hike Update: मध्यप्रदेश के सरकारी विभागों से रिटायर्ड ​अधिकारी और कर्मचारियों के लिए एक राहत की खबर है।

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sanjay warude
MP DR Hike

Madhya Pradesh DR Hike Update: मध्यप्रदेश के सरकारी विभागों से रिटायर्ड ​अधिकारी और कर्मचारियों के लिए एक राहत की खबर है।

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छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय की सरकार ने 3 प्रतिशत महंगाई राहत बढ़ाने का फैसला किया है। जिसके बाद मध्य प्रदेश में भी 4 लाख से अधिक पेंशनर्स की महंगाई राहत बढ़ने के आसार है। दोनों राज्यों के बंटवारे के फॉर्मूला पर अमल हुआ तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में यह राहत मिल सकती है।

CG सरकार 58% DR देने का कर चुकी ऐलान 

पिछले सप्ताह छत्तीसगढ़ सरकार अपने राज्य के पेंशनर्स की महंगाई राहत 58 प्रतिशत करने का ऐलान किया है, जो पहले 55 प्रतिशत थी। इसकी सहमति के लिए एमपी सरकार को प्रस्ताव भेजा है। सहमति के बाद मध्यप्रदेश के पेंशनर्स को भी राहत मिल सकती है। एमपी के पेंशनर्स को 3 प्रतिशत महंगाई राहत मिलने की उम्मीद है।

पेंशनर्स की मांग जल्द दी जाए महंगाई राहत 

संगठन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी (Patron of the organization Ganesh Dutt Joshi) और भोपाल अध्यक्ष सुरेश शर्मा (Bhopal President Suresh Sharma) का आरोप है कि प्रदेश के पेंशनर्स को महंगाई राहत (Dearness Relief) देने में भेदभाव किया जा रहा है और सरकार अपने ही आदेशों का पालन नहीं कर रही है। उन्होंने मांग की है कि सभी बकाया महंगाई राहत जल्द से जल्द जारी की जाए।

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दोनों राज्यों की सहमति की प्रोसेस को चुनौती

मध्य प्रदेश पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना (Amod Saxena, State President of Madhya Pradesh Pensioners Welfare Association) और नर्मदापुरम अध्यक्ष दिनेश चतुर्वेदी (Narmadapuram President Dinesh Chaturvedi) ने अक्टूबर 2024 में हाई कोर्ट (High Court) में एक याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बंटवारे (sharing) के बाद के 4.50 लाख पेंशनर्स (pensioners) को महंगाई राहत (Dearness Relief) देने से पहले दोनों राज्यों के बीच सहमति लेने की प्रक्रिया को चुनौती दी है।

एमपी से नहीं मिला 73.38% पेंशन का हिस्सा

दरअसल, राज्यों के बंटवारे के बाद के रिटायर्ड कर्मचारियों को दोनों सरकारों की ओर से पेंशन दी जाना थी, जिसमें मध्यप्रदेश का हिस्सा 73.38 प्रतिशत हैं, जो पिछले एक दशक से पेंशनरों को नहीं मिला है। जिसके छत्तीसगढ़ सरकार ने दिसंबर 2025 में मध्यप्रदेश सरकार को 10 हजार करोड़ रुपए की डिमांड भेजी है।

फरवरी के बजट सत्र में रख सकते हैं प्रस्ताव

मध्यप्रदेश के वित्त विभाग ने यह डिमांड देने के लिए मान गया है, जिसे दो से तीन किस्तों मे दिए जाने का मन बना रहा है। 16 फरवरी से मध्यप्रदेश का बजट सत्र शुरू होने वाला है। जिसमें पहली किस्त के लिए बजट पेश कर सकते हैं।

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दोनों राज्यों में नहीं था सहमति का प्रावधान

मध्य प्रदेश वित्त विभाग के इस सर्कुलर में 1 नवंबर 2000 के बाद के मध्य प्रदेश के पेंशनर्स को शामिल नहीं किया गया था। इस सर्कुलर में कहीं भी छत्तीसगढ़ से सहमति लेने का कोई प्रावधान नहीं था। पेंशनर्स की महंगाई राहत का भी इसमें कोई जिक्र नहीं था।

साल 2006 से बिना सहमति के DR पर रोक

साल 2005 तक पेंशनर्स को बिना किसी रुकावट के नियमित रूप से महंगाई राहत मिलती रही। साल 2006 में मप्र के तत्कालीन मुख्य सचिव एपी श्रीवास्तव ने छत्तीसगढ़ की सहमति पर जोर देना शुरू किया। तब से, मध्य प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ से सहमति लिए बिना महंगाई राहत देना बंद कर दिया है।

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हर पेंशनर्स को 2 लाख तक का नुकसान

1 नवंबर 2000 के बाद के मध्य प्रदेश के 4.50 लाख पेंशनर्स इस समस्या से जूझ रहे हैं। हर महीने उन्हें कम से कम 1500 से 2000 रुपये और अधिकतम 6000 से 7000 रुपये का नुकसान हो रहा है। साल 2006 से अब तक, हर पेंशनर्स को करीब 1.50 लाख से 2 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है।

जुलाई 2024 से 53% DR, मार्च 2025 से दिया

MP में 1 जुलाई 2024 से 53% महंगाई राहत दी जानी थी, लेकिन, पेंशनर्स को यह 53% महंगाई राहत 1 मार्च 2025 से मिलनी शुरू हुई है। इस वजह से उन्हें 7 महीने की महंगाई राहत का नुकसान हुआ है।

हर छह महीने में महंगाई राहत देने का प्रावधान

राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुसार, हर छह महीने में महंगाई राहत (DR) देने का प्रावधान है। इसके तहत, हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को महंगाई राहत दी जानी चाहिए। पहले यह हर तीन महीने (क्वाटरली) में दी जाती थी।

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ऐसे समझें पूरा मामला

  • 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ अलग राज्य बने थे।
  • इससे ठीक पहले, 30 अक्टूबर 2000 को मध्य प्रदेश वित्त विभाग ने एक सर्कुलर जारी किया था।
  • दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों के बीच राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 (6) के तहत एक एग्रीमेंट हुआ था।
  • 1 नवंबर 2000 से पहले के पेंशनर्स की जिम्मेदारी को जनसंख्या के अनुपात में बांटा गया था। 
  • मप्र की हिस्सेदारी 73.38% और छत्तीसगढ़ की 26.62% तय हुई थी।
  • इसमें यह भी तय हुआ था कि पेंशनर्स को बिना किसी रुकावट के भुगतान मिलता रहेगा।

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