होली पर घर जाने का है प्लान तो ठहरिए: ये सूचना आपके लिए जरूरी, इस दिन भूलकर भी न करें सफर

मध्यप्रदेश नई ​परिवहन नीति के विरोध में एमपी बस ऑनर्स एसोसिएशन ने हड़ताल का ऐलान किया है। ऑपरेटर्स ने सोमवार, 2 मार्च 2026 से बेमुद्दत हड़ताल पर जाने की चेतावनी जारी की है। जिससे करीब डेढ़ लाख से अधिक यात्रियों का सफर प्रभावित हो सकता हैं।

MP Bus Strike

MP Bus Strike 2 March 2026: अगले महीने मार्च के पहले सप्ताह की शुरुआत होली पर्व से हो रही है। दीपावली के बाद यह साल का पहला और सबसे बड़ा त्योहार है। जिसको लेकर हर कोई अपने घर जानें का प्लान बना रहा है, ऐसे में आपकों ये एक सूचना जरूरी जानना है, ताकि आपका सफर हैप्पी हो सके।

मध्यप्रदेश में 2 मार्च से बेमुद्दत हड़ताल का ऐलान

मध्यप्रदेश नई ​परिवहन नीति के विरोध में एमपी बस ऑनर्स एसोसिएशन ने हड़ताल का ऐलान किया है। बस ऑपरेटर्स ने  सोमवार, 2 मार्च 2026 से बेमुद्दत हड़ताल पर जाने की चेतावनी जारी की है। जिससे मध्यप्रदेश में हर रोज करीब डेढ़ लाख से अधिक यात्रियों का सफर प्रभावित हो सकता हैं।

आरटीओ अधिकारियों को दी हड़ताल की सूचना

मध्यप्रदेश के सभी जिलों में बस ऑनर्स परिवहन अधिकारियों को मांग पत्र के साथ हड़ताल की ​अग्रिम सूचना का पत्र सौंप रहे हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर समेत अन्य जिलों में एमपी बस ऑनर्स एसोसिएशन के बैनर तले हड़ताल की तैयारियां शुरू कर दी गई है।

3 को चंद्र ग्रहण, इसलिए 2 मार्च को जलेगी होलिका

2 मार्च को भद्रा काल शाम 5:45 मिनट से शुरू होगा, जो दूसरे दिन यानी 3 मार्च की सुबह 5:23 तक रहेगी। इसके बाद से खंड चंद्र ग्रहण होगा। जिसके चलते इस दिन होलिका दहन नहीं होगा। ऐसे में कंफ्यूजन हो रहा है कि आखिर होलिका दहन किस दिन होगी, हालांकि, अधिकांश लोग 2 मार्च को होलिका दहन पूजन के मूड में है और अगले दिन धुलेंडी मनाएंगे। जबकि कुछ क्षेत्रों में 4 मार्च को धुलेंडी खेली जाएगी।

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जानें विरोध की कौनसी मुख्य वजह

जटिल और महंगी परमिट प्रोसेस

स्टेज कैरिज परमिट के आवंटन और नवीनीकरण के नियमों को पहल से ज्यादा कठिन बना दिया है। ऑपरेटर्स का कहना है कि यह प्रोसेस उलझन भरी है, जिसे सामान्य ऑपरेटर को इसे पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

बढ़ती लागत और स्थिर किराया

डीजल की कीमतों और स्पेयर पार्ट्स की लागतों में बढ़ोतरी हो रही है। इसके बावजूद सरकार की ओर से किराया संशोधन की कोई लचीली गाइडलाइन नहीं बनाई गई है, जिसे बस ऑपरेटर्स के लिए घाटे वाली नीति मान रही है।

आर्थिक बोझ और शुल्क बढ़ोतरी

सरकार की ओर से परमिट और नवीनीकरण शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। जिसका सीधा असर उन छोटे बस ऑपरेटर्स पर पड़ेगा, जिनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब चल रही है।

खबर अपडेट की जा रही है

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