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MP Board Big Update: एमपी बोर्ड में अब 10वीं में 7 और 12वीं में होंगे 6 पेपर, बेस्ट ऑफ फाइव सिस्टम पर लगेगी रोक, क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?

मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बोर्ड परीक्षाओं में 'बेस्ट ऑफ फाइव' सिस्टम को खत्म कर विषयों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। सत्र 2026-27 से 10वीं के छात्रों को 7 और 12वीं के छात्रों को 6 विषयों की परीक्षा देनी होगी।

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Vikram Jain
MP Board Best of Five Ends

MP Board Best of Five Ends: मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। पिछले 9 वर्षों से चले आ रहे ‘बेस्ट ऑफ फाइव’ सिस्टम, जिसमें एक विषय में फेल होने पर भी छात्र पास मान लिए जाते थे, उसे अब समाप्त किया जा रहा है। बोर्ड का मानना है कि इस व्यवस्था से छात्रों का पास प्रतिशत तो बढ़ा, लेकिन उनकी शैक्षणिक योग्यता और रोजगार पाने की क्षमता पर बुरा असर पड़ा है। सत्र 2026-27 से 10वीं के छात्रों को 7 और 12वीं के छात्रों को 6 विषयों की परीक्षा देनी होगी। इसका उद्देश्य छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार करना और उन्हें सेना व सरकारी नौकरियों के योग्य बनाना है।

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बेस्ट ऑफ फाइव होगा खत्म

पिछले 9 वर्षों से मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षाओं में ज्यादा अंक दिलाने वाला ‘बेस्ट ऑफ फाइव’ सिस्टम अब खत्म होने जा रहा है। शिक्षा विभाग ने इसे पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जिससे अब केवल पास होना काफी नहीं होगा, बल्कि हर मुख्य विषय में दक्षता हासिल करनी होगी। छात्रों को अपनी मेहनत का दायरा बढ़ाना होगा। मंडल ने लोक शिक्षण संचालनालय को एक प्रस्ताव भेजा है जिसमें 10वीं और 12वीं के विषयों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। अब नए पैटर्न के तहत 10वीं क्लास के छात्रों को 6 की जगह 7 और 12वीं के छात्रों को 5 की जगह 6 विषयों की परीक्षा देनी होगी। इस बदलाव का मुख्य लक्ष्य छात्रों को भविष्य की वैश्विक चुनौतियों और सरकारी नौकरियों की कसौटी पर खरा उतारना है।

क्यों किया जा रहा बदलाव?

साल 2017 में जब बोर्ड का रिजल्ट गिर गया था, तब छात्रों को राहत देने के लिए 'बेस्ट ऑफ फाइव' लाया गया था। लेकिन इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि छात्रों ने गणित, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों को पढ़ना लगभग छोड़ दिया। इसका सबसे बड़ा नुकसान भारतीय सेना की भर्ती में देखा गया, जहाँ हर विषय में कम से कम 33% अंक अनिवार्य होते हैं। एमपी बोर्ड के हजारों छात्र गणित या अंग्रेजी को छोड़कर पास तो हो गए, लेकिन सेना भर्ती और डाक विभाग की नौकरियों में अयोग्य घोषित कर दिए गए। अनिवार्य विषयों की गहराई से जानकारी न होने के कारण सरकारी नौकरियों की दौड़ में पिछड़ रहे हैं।

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अगले सत्र से शुरू होगा नया नियम

मध्यप्रदेश शिक्षा मंडल के सचिव बुद्धेश कुमार वैद्य ने बताया कि विषयों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है। उन्होंने साफ किया कि हमारा मकसद सिर्फ बच्चों को पास कराना नहीं, बल्कि उनकी शिक्षा के स्तर को सुधारना है ताकि उन्हें भविष्य में अच्छी नौकरियां मिल सकें। यह नया नियम 2026-27 के सत्र से शुरू करने की तैयारी है। जो छात्र अभी (2025-26) परीक्षा दे रहे हैं, उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा; उनके लिए पुरानी व्यवस्था ही चालू रहेगी।

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10वीं और 12वीं का नया समीकरण

  • 10वीं बोर्ड का नया नियम: अब 10वीं के छात्रों को 6 की जगह 7 पेपर देने होंगे। इसमें हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान तो रहेंगे ही, साथ ही एक 'एनएसक्यूएफ' (वोकेशनल) विषय भी अनिवार्य रूप से जुड़ जाएगा।
  • रिजल्ट कैसे बनेगा: अच्छी बात यह है कि रिजल्ट 'बेस्ट ऑफ सिक्स' के आधार पर तैयार होगा। यानी छात्र 7 पेपर देंगे, लेकिन जिन 6 विषयों में सबसे ज्यादा नंबर आएंगे, उन्हीं को जोड़कर फाइनल मार्कशीट बनेगी।
  • 12वीं बोर्ड का नया नियम: 12वीं में अब 5 की जगह 6 पेपर की परीक्षा देनी होगी। यहाँ 'बेस्ट ऑफ फाइव' का नियम चलेगा। यानी 6 पेपर में से जिन 5 विषयों में सबसे अच्छे नंबर होंगे, उनके आधार पर रिजल्ट तैयार होगा।
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क्या है यह 7वां विषय (NSQF)?

यह एक 'काम-काज सिखाने वाला विषय' (वोकेशनल कोर्स) है। इसमें छात्र अपनी पसंद के अनुसार आईटी, ब्यूटी पार्लर, खेती (एग्रीकल्चर) या रिटेल जैसे हुनर सीख सकते हैं। इसका मकसद यह है कि अगर कोई छात्र किताबी पढ़ाई में थोड़ा कमजोर भी है, तो उसके पास हाथ का कोई ऐसा हुनर (Skill) हो जिससे वह भविष्य में आसानी से नौकरी या रोजगार पा सके।

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