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एमपी के कर्मचारियों को बड़ी राहत: जबलपुर हाई कोर्ट ने प्रोबेशन पीरियड में वेतन कटौती को बताया अवैध, अब मिलेगी 100% सैलरी

एमपी के हजारों कर्मचारियों को जबलपुर हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने प्रोबेशन पीरियड में वेतन कटौती अवैध घोषित किया है। साथ ही राज्य सरकार के 12 दिसंबर 2019 के सर्कुलर को रद्द कर दिया है।

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Vikram Jain
MP jabalpur High Court Full Salary Decision

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट।

MP High Court Full Salary Decision: मध्यप्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए जबलपुर हाई कोर्ट से खुशियों वाली खबर आई है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने नई भर्तियों के लिए लागू 'स्टाइपेंड' व्यवस्था (70%, 80%, 90% वेतन) को असंवैधानिक और अवैध करार दिया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोट की पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रोबेशन अवधि में भी कर्मचारियों को पूरा न्यूनतम वेतन पाने का अधिकार है। कोर्ट ने सरकार के 12 दिसंबर 2019 को जारी उस सर्कुलर को रद्द (Circular Cancelled) कर दिया है, जिसके तहत प्रोबेशन पीरियड में नई भर्तियों का वेतन काटा जाता था। कोर्ट ने "समान काम-समान वेतन" के सिद्धांत को सर्वोपरि मानते हुए सरकार को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों की कटी हुई राशि एरियर्स के रूप में वापस लौटाई जाए।

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2019 का विवादित नियम हुआ खत्म

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नई सरकारी भर्तियों में प्रोबेशन पीरियड (Probation Period) के दौरान सैलरी काटे जाने को अवैध बताते देते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रोबेशन पीरियड में वेतन कटौती अवैध है। एरियर्स के साथ पैसा लौटाना होगा। दरअसल, कमलनाथ सरकार के समय 12 दिसंबर 2019 को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने एक सर्कुलर जारी किया था। इसके तहत सीधी भर्ती के कर्मचारियों को पहले तीन साल तक पूर्ण वेतन नहीं दिया जाता था। उन्हें पहले साल 70%, दूसरे साल 80% और तीसरे साल 90% वेतन मिलता था। हाई कोर्ट ने इस भेदभावपूर्ण नियम को खत्म कर दिया है।

काम 100% तो वेतन कम क्यों?

याचिकाकर्ता वसीम अकरम की दलीलों पर सुनवाई करते हुए अदालत ने तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जब सरकार कर्मचारियों से पूरी क्षमता के साथ शत-प्रतिशत काम ले रही है, तो उनके वेतन में कटौती करने का कोई कानूनी या नैतिक आधार नहीं बनता। यह सीधे तौर पर "समान काम के लिए समान वेतन" के संवैधानिक सिद्धांत का उल्लंघन है।

एरियर्स के साथ वापस मिलेगा पैसा

हाई कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ कर दिया है कि प्रोबेशन पीरियड के नाम पर कर्मचारियों के वेतन से की गई कोई भी कटौती या रिकवरी पूरी तरह गैर-कानूनी (अवैध) है।

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अदालत ने केवल नियम रद्द नहीं किया, बल्कि उन हजारों कर्मचारियों को बड़ी आर्थिक राहत भी दी है जो पिछले 4-5 सालों में इस नियम के कारण कम वेतन पा रहे थे। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जिन कर्मचारियों का वेतन अब तक काटा गया है, सरकार उन्हें वह पूरी राशि तुरंत वापस करे। अब से किसी भी नए कर्मचारी को 'किस्तों' में नहीं, बल्कि पहले दिन से ही शत-प्रतिशत (100%) वेतन का लाभ दिया जाएगा। जिन कर्मचारियों का वेतन पिछले वर्षों में काटा गया है, सरकार को वह पैसा एरियर्स के रूप में लौटाना होगा।

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