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बिना चीरा, बिना बेहोशी होगा ब्लड क्लॉट का इलाज: भोपाल में शुरू हुई MP-CG की पहली अत्याधुनिक थ्रोम्बेक्टॉमी सुविधा, लकवे का खतरा होगा कम

भोपाल में एमपी और छत्तीसगढ़ की पहली 'रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टॉमी' सुविधा शुरू की गई है। यह एक उन्नत तकनीक है जिससे नसों में जमे खून के थक्कों को बिना किसी सर्जरी के सिर्फ एक सुई के माध्यम से हटाया जा सकता है।

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Vikram Jain
health rheolytic thrombectomy launched in bhopal mp cg first blood clot treatment without surgery

Rheolytic Thrombectomy Treatment Bhopal: मध्य भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पहली बार 'रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टॉमी' (Rheolytic Thrombectomy) की उन्नत सुविधा शुरू की गई है। भोपाल के जाने-माने इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अगम्य सक्सेना (MD, EBIR) के नेतृत्व में इस तकनीक को मरीजों के लिए सुलभ बनाया गया है। यह तकनीक उन मरीजों के लिए जीवनदान साबित होगी जो खून की नसों में थक्के (Blood Clots) की समस्या से जूझ रहे हैं और जिन्हें अब तक बड़ी सर्जरी का जोखिम उठाना पड़ता था। यह एक उन्नत तकनीक है जिससे हाथ, पैर, पेट या दिमाग की नसों में जमे खून के थक्कों को बिना किसी बड़ी सर्जरी या बेहोशी के, सिर्फ एक सुई के माध्यम से हटाया जा सकता है।

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क्या है रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टॉमी तकनीक?

इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अगम्य सक्सेना ने बताया कि यह प्रणाली 'फार्मोकोमैकेनिकल' तकनीक पर आधारित है। इसमें विशेष दवाओं और मैकेनिकल प्रक्रिया के मेल से थक्के को तोड़ा और बाहर निकाला जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस प्रक्रिया में शरीर पर कोई बड़ा चीरा नहीं लगाया जाता। एक छोटी सी सुई के जरिए धमनी के रास्ते प्रभावित हिस्से तक पहुंचकर रक्त प्रवाह को तेजी से बहाल किया जाता है।

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बिना बेहोशी और बिना सर्जरी इलाज

इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें मरीज को पूरी तरह बेहोश करने की आवश्यकता नहीं होती। हाथ, पैर, पेट या डायलिसिस फिस्टुला में जमे थक्कों को इस हाई-टेक मशीन की मदद से कुछ ही समय में साफ किया जा सकता है। 'नई स्ट्रोक गाइडलाइंस 2026' के अनुसार, लकवे (पैरालिसिस) जैसी गंभीर स्थिति से बचने के लिए त्वरित थ्रोम्बेक्टॉमी को सबसे कारगर और प्राथमिकता वाला इलाज माना गया है।

अब महानगरों पर निर्भरता खत्म

डॉ. सक्सेना के अनुसार, अब तक यह उपकरण किराये पर मंगाया जाता था, जिससे समय पर इलाज मिलने में मुश्किलें आती थीं। लेकिन अब भोपाल में खुद की मशीन उपलब्ध होने से समय की बचत होगी। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के मरीजों को अब इलाज के लिए दूसरे राज्यों के महानगरों में नहीं जाना पड़ेगा, जिससे उनके पैसे और समय दोनों की बचत होगी।

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उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि अचानक हाथ या पैर में कमजोरी, सूजन, तेज दर्द, त्वचा का रंग बदलना, बोलने में कठिनाई या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नता जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तत्काल इंटरवेंशनल रेडियोलाजिस्ट से परामर्श लें।

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