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Bhopal Arera Colony Diabetic Eye Camp: मधुमेह (Diabetes) न केवल शरीर को अंदर से कमजोर करता है, बल्कि यह धीरे-धीरे आंखों की रोशनी पर भी हमला करता है। इसी खतरे के प्रति जागरूकता फैलाने और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भोपाल की अरेरा कॉलोनी स्थित 'चावलाज विजन केयर एवं डायबिटिक आई क्लिनिक' द्वारा एक विशेष निःशुल्क AI सक्षम डायबिटिक आई कैंप का सफल आयोजन किया गया। रविवार, 1 फरवरी 2026 को आयोजित इस शिविर में शहर के सैकड़ों लोगों ने अपनी आंखों का परीक्षण करवाया।
अरेरा कॉलोनी में स्वास्थ्य शिविर आयोजित
राजधानी भोपाल में स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में डॉ. गजेंद्र चावला के नेतृत्व में एक सराहनीय प्रयास किया गया है। अरेरा कॉलोनी में आयोजित इस विशेष कैंप में मुख्य रूप से उन मरीजों पर ध्यान केंद्रित किया गया जो लंबे समय से मधुमेह से पीड़ित हैं या जिनमें आंखों से जुड़ी समस्याएं उभर रही हैं।
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शिविर में 126 मरीजों की हुई जांच
शिविर के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 126 मरीजों ने अपना पंजीकरण कराया और जांच प्रक्रिया का हिस्सा बने। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इनमें से 58 से अधिक मरीज डायबिटिक पाए गए। मधुमेह के मरीजों में 'डायबिटिक रेटिनोपैथी' (रेटिना की बीमारी) का खतरा सबसे अधिक होता है, जिसके लिए क्लिनिक ने अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया।
रेटिना परीक्षण के लिए AI तकनीक का उपयोग
शिविर की सबसे बड़ी विशेषता AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित फंडस कैमरा के माध्यम से रेटिना की निःशुल्क जांच रही। इस तकनीक की मदद से डॉक्टर रेटिना की सूक्ष्म से सूक्ष्म क्षति का तुरंत पता लगा लेते हैं, जो सामान्य जांच में कई बार छूट जाती है। डॉ. गजेंद्र चावला (M.B.B.S, MS Ophthalmology) ने स्वयं इन मरीजों को व्यक्तिगत परामर्श दिया और उन्हें भविष्य में आंखों की देखभाल के लिए जरूरी सुझाव दिए।
मोतियाबिंद और शुगर की भी हुई जांच
कैंप के दौरान केवल रेटिना ही नहीं, बल्कि मरीजों के सामान्य स्वास्थ्य की भी जांच की गई। उपस्थित लोगों के लिए निःशुल्क ब्लड शुगर टेस्ट और विज़न टेस्टिंग की सुविधा दी गई। जांच के बाद, विशेषज्ञों ने 21 मरीजों को मोतियाबिंद (Cataract) के ऑपरेशन की सलाह दी है, ताकि उनकी आंखों की दृष्टि को सुरक्षित किया जा सके।
जागरूकता ही बचाव का रास्ता
संचालक डॉ. गजेंद्र चावला ने बताया कि इस शिविर का प्राथमिक उद्देश्य मधुमेह रोगियों में अंधेपन के प्रमुख कारणों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि अक्सर मरीज तब डॉक्टर के पास पहुँचते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। AI तकनीक और समय-समय पर होने वाले ऐसे शिविरों से प्रारंभिक अवस्था में ही बीमारी पकड़ में आ जाती है, जिससे उपचार आसान और प्रभावी हो जाता है।
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