MP विधानसभा में सिंगरौली जमीन मामले पर बवाल: मंत्री विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष सिंघार के बीच हुई तीखी बहस, सीएम मोहन यादव ने संभाला मोर्चा

नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार में तीखी बहस हो गई। बहस इतनी बढ़ गई कि सदन के नेता होने के नाते मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मोर्चा संभाला। इस तीखी बहस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने दुख जताया।

CM Mohan Yadav Apologizes

CM Mohan Yadav Apologizes: मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के चौथे दिन चर्चा के दौरान सिंगरौली की जमीन का मुद्दा उठा।

नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार में तीखी बहस हो गई। बहस इतनी बढ़ गई कि सदन के नेता होने के नाते मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मोर्चा संभाला। इस तीखी बहस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने दुख जताया। ऐसी बहस से सदन की मर्यादा को ठेस पहुंचती है। सदन की गरिमा बनी रहे इसके लिए सीएम मोहन यादव ने खुद आगे आकर सदन से माफी मांग ली।

मंत्री सारंग ने कहा बाहरी लोगों का नाम न लें

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली की जमीन का मुद्दा उठाया। मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कुछ प्राइवेट लोगों का नाम भी लिया। जिस पर खेल व सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि सदन में बाहरी व्यक्ति नाम नहीं लिया जा सकता। 

तो सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा पर बहस छेड़ी

इस पर बहस बढ़ी तो नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समझाने का प्रयास किया। हालांकि, उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा की घटना का जिक्र करते हुए कैलाश विजयवर्गीय से ही माफी मांगने की मांग कर डाली। इंदौर के भागीरथपुरा में हुईं मौतों के मामले पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच लंबी तीखी बहस चली।

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तोमर बोले- मप्र विधानसभा की अलग मर्यादा रही

मसला इतना गरमा गया कि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को कहना पड़ा कि यह ठीक नहीं है। उन्होंने सुंदरलाल पटवा को याद करते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश विधानसभा की अलग तरह की मर्यादा रही है। बात मन में होना चाहिए, ऐसा नहीं होना चाहिए की सदन में पहुंच जाए।

सीएम के माफी मांगने पर दोनों नेताओं ने जताया खेद

इस पूरी लंबी बहस के बाद बड़ा दिल दिखाते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सदन से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि सदन से मैं माफी चाहता हूं।  तब कही जाकर मामला शांत हुआ। सदन के नेता मुख्यमंत्री होते है। आखिर में दोनों नेताओं ने खेद जताया।

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