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MP SIR Update: असमंजस में मप्र के वोटर्स, वोटर आईडी कार्ड और लिस्ट में बदले पोलिंग बूथ

MP SIR Update: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित कई जिलों के वोटर इस समय असमंजस की स्थिति में हैं क्योंकि एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद से ही मतदाताओं के वोटर आईडी कार्ड और नई वोटर लिस्ट में अलग- अलग पोलिंग बूध दर्ज कर दिए गए हैं.

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Sourabh Pal
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MP SIR Update: देश में चुनाव प्रतिशत को बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं. हालांकि, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित कई जिलों के वोटर इस समय असमंजस की स्थिति में हैं क्योंकि एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद से ही मतदाताओं के वोटर आईडी कार्ड और नई वोटर लिस्ट में अलग- अलग पोलिंग बूध दर्ज कर दिए गए हैं. 

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इस वजह से वोटर्स को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल, ईपिक कार्ड और वोटर लिस्ट में अलग-अलग बूथ होने के कारण मतदाता को वोटर कार्ड देखकर मतदान केंद्र पहुंचने पर नाम वहां नहीं मिल सकता है. 

इसके अलावा 10 हजार नए वोटर्स को पहली बार वोटर लिस्ट में जोड़ा गया है और जल्द ही इनके नए ईपिक कार्ड जारी होंगे. बता दें कि आप वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए 22 जनवरी शाम 5 बजे तक आवेदन कर सकते हैं. 

क्यों बदले गए मतदान केंद्र

चुनाव आयोग ने सभी पोलिंग बूथ पर अधिकतम 1200 वोटर्स रखने के आदेश दिए थे. दरअसल, भोपाल में कई बूथों पर 1500 से ज्यादा वोटर्स हैं इसलिए चुनाव आयोग ने नए बूथ बनाने का फैसला किया था. पहले भोपाल में 2022 पोलिंग बूथ थे और अब 2289 बूथ हैं. वहीं, मप्र में पहले 65000 से ज्यादा पोलिंग बूथ थे और अब 71930 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं. 

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बता दें कि मप्र में 83 लाख से अधिक वोटर्स के पोलिंग बूथ बदल दिए गए हैं. भोपाल में 2 लाख से ज्यादा मतदाताओं के पोलिंग बूथ बदले गए हैं. अब इनमें से कई वोटर्स इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनके ईपिक कार्ड और वोटर लिस्ट में अलग-अलग बूथ दर्ज हैं. 

कब अपडेट होंगे पोलिंग बूथ

वहीं, चुनाव आयोग की तरफ से इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि बदले हुए पोलिंग बूथ की जानकारी वोटर आईडी कार्ड कब और कैसे अपडेट की जाएगी. दरअसल वोटर्स को नाम खोजने में इसलिए दिक्कत हो रही है क्योंकि 23 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को 2289 मतदाता केंद्र के हिसाब से बनाया गया था. 

अगर चुनाव से पहले पोलिंग बूथ की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वोटर पुराने बूथ पर पहुंच सकता है और सही बूथ खोजने में उसका समय बर्बाद हो सकता है. इस कारण से बीएलओ पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा एसआईआर के बाद भोपाल में 4 लाख 38 हजार 876 नाम हटाए गए हैं. इनमें 1.16 लाख से ज्यादा वोटर्स नो-मैपिंग मतदाता हैं. 

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