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First Kinnar Shankaracharya of India: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 15 फरवरी को आयोजित महाशिवरात्रि का पर्व एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया। 'किन्नर जिहाद' और धर्मांतरण की चुनौतियों के बीच किन्नर अखाड़ा ने पुष्कर पीठ के लिए देश की पहली किन्नर शंकराचार्य की घोषणा कर दी है। लालघाटी क्षेत्र में आयोजित एक भव्य समारोह में हिमांगी सखी का पट्टाभिषेक किया गया। इस गौरवशाली पल के साक्षी बनने के लिए देशभर से किन्नर संत और महामंडलेश्वर भोपाल पहुंचे, जहाँ भक्ति और उत्साह के साथ सनातन परंपराओं का निर्वहन किया गया।
हिमांगी सखी देश की पहली किन्नर शंकराचार्य
भोपाल का लालघाटी इलाका आज भगवा रंग में रंगा नजर आया। यहां अनोखा और ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन किया गया। जिसमें किन्नर अखाड़ा के संस्थापक ऋषि अजय दास की मौजूदगी में आयोजित इस सम्मेलन ने न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक स्तर पर भी एक कड़ा संदेश दिया है।
समारोह का मुख्य आकर्षण हिमांगी सखी का पट्टाभिषेक रहा। मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ उन्हें देश का पहला 'किन्नर शंकराचार्य' नियुक्त किया गया। पट्टाभिषेक के बाद उन्हें नई उपाधियाँ प्रदान की गईं। हिमांगी सखी अब सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और किन्नर समुदाय के हितों के लिए सर्वोच्च पद से मार्गदर्शन करेंगी।
200 किन्नरों की 'घर वापसी' और शुद्धिकरण
आयोजन के दौरान एक बड़ा कदम उठाते हुए 200 से अधिक धर्मांतरित किन्नरों की घर वापसी कराई गई। इन किन्नरों ने पूर्व में किन्हीं कारणों से मुस्लिम धर्म अपना लिया था। महाशिवरात्रि के शुभ मुहूर्त पर विशेष शुद्धिकरण अनुष्ठान और गंगाजल से स्नान के बाद इन सभी को फिर से सनातन धर्म में शामिल किया गया। अखाड़े ने इसे 'किन्नर जिहाद' के खिलाफ एक बड़ी जीत बताया है।
10 किन्नर महामंडलेश्वरों की घोषणा
संगठन के विस्तार और धर्म रक्षा के लिए 10 प्रमुख किन्नर संतों को महामंडलेश्वर बनाया गया है। भोपाल, सागर और राजस्थान के किन्नर नेताओं को महामंडलेश्वर की उपाधि मिली है। इसमें प्रमुख नियुक्तियां इस प्रकार हैं
- सागर: रानी ठाकुर को महामंडलेश्वर की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई।
- भोपाल: काजल ठाकुर को भी महामंडलेश्वर के पद से नवाजा गया।
- राजस्थान (सीकर): माही सनातनी को भी नया महामंडलेश्वर बनाया गया है।
भजन-कीर्तन और जश्न का माहौल
समारोह के दौरान लालघाटी में उत्सव जैसा माहौल रहा। देशभर से आए सैंकड़ों किन्नरों ने ढोल-मजीरों के साथ भजन-कीर्तन किया। अखाड़ा संस्थापक ऋषि अजय दास ने कहा कि यह आयोजन किन्नर समुदाय के आत्मसम्मान और उनकी धार्मिक पहचान को वापस दिलाने की एक नई शुरुआत है।
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