भोपाल में आउटसोर्स कर्मियों का प्रदर्शन: DPI अफसरों को बताई अपनी समस्याएं, कर्मचारी बोले-मांगें पूरी नहीं हुई तो जिलों में देंगे धरना

भोपाल में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) में सोमवार, 19 जनवरी को आउससोर्स कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने आयुक्त डीपीआई को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने मुख्य रूप से वेतन बढ़ाने और नियमितिकरण की मांग की।

Bhopal Outsource Employees Protest

Bhopal Outsource Employees Protest: भोपाल में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) में सोमवार, 19 जनवरी को आउससोर्स कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने आयुक्त डीपीआई को अपना मांग पत्र सौंपा। कर्मचारियों ने मुख्य रूप से वेतन बढ़ाने और नियमितिकरण की मांग की।

इस प्रदर्शन में स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत स्कूलों और छात्रावासों में काम कर रहे अंशकालीन, अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों शामिल थे। उनकी मुख्य मांग- न्यूनतम वेतन और नियमितिकरण है।

20 साल की सेवा, फिर भी मिल रहा 5 हजार वेतन

अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के बैनर तले हुए प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा, वे पिछले 20 साल से अधिक समय से अलग-अलग विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें मात्र 3 हजार से 5 हजार रुपए मासिक वेतन दिया जा रहा है जो शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से भी बहुत कम है।

Emploees
भोपाल में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के सामने आउससोर्स कर्मचारियों प्रदर्शन नारेबाजी करते हुए।

मप्र में चपरासी के वेतन में समानता नहीं

कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से मांग करने के बावजूद शासन और विभागीय अधिकारियों द्वारा उनकी समस्याओं पर कोई  कार्रवाई नहीं की जा रही है। अस्थायी, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा, प्रदेश के शिक्षा विभाग और  जनजातिया कार्य विभाग के स्कूल और छात्रावासों में अंशकालीन और अस्थायी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बड़ी संख्या में काम कर रहे हैं। इन्हें सरकार कहीं चार हजार, कहीं पांच हजार और कहीं तीन हजार रुपए मानदेय (वेतन) दे रही है। ये मध्यप्रदेश में कर्मचारियों के साथ सबसे बड़ा अन्याय है। सरकार ने इन कर्मचारियों को चपरासी और चतुर्थ श्रेणी में कई नाम से नौकरी पर रखा है। अनेक कैडर बनाकर मनमाने मानदेय (वेतन ) पर काम करा रहे हैं। सरकार कहती है हम सबका विकास कर रहे हैं। सबका ध्यान रख रहे हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि मप्र में चपरासी का भी एक कैडर नहीं है। हर विभाग में अलग-अलग कैडर है। जो सरकार चपरासियों के वेतन में समानता नहीं कर पाई है, यह कितना बड़ा अन्याय है ?

कर्मचारी लंबे समय से उठा रहे मांगें

सरकार को ऐसा न्यूनतम वेतन लागू करना चाहिए जो शासन द्वारा तय किए गए न्यूनतम वेतन से भी कम है। कर्मचारियों ने यह आरोप लगाया है कि लंबे समय से अपनी मांगें उठाने के बावजूद शासन और विभागीय अधिकारियों ने उनकी समस्याओं पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। अगर मांगों पर जल्दी निर्णय नहीं लिया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

Bhopal Outsource Employees Protest (2)
भोपाल में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के सामने आउससोर्स कर्मचारी धरना देते हुए।

 DPI के अफसरों ने क्या कहा ?

मप्र अंशकालीन कर्मचारी मोर्चा के उपाध्यक्ष उमाशंकर पाठक ने बताया कि प्रदर्शन के बाद मप्र लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त शिल्पी गुप्ता और उपायुक्त कामिनी आचार्य को मांगों से अवगत कराया। अफसरों ने कहा कि विभाग ने कर्मचारियों का डेटा मंगाया है। इसके बाद कर्मचारियों की पॉलिसी पर विचार होगा और केस वित्त विभाग में जाएगा, फिर प्रकरण कैबिनेट में पहुंचेगा। हालांकि, पाठक ने कहा कि कर्मचारियों का डेटा पहले से ही विभाग के पास है।

ये भी पढ़ें:  धार में पटवारी घूस लेते गिरफ्तार: लोकायुक्त पुलिस टीम ने 20 हजार रुपए लेते दबोचा, पटवारी ने नक्शा सुधारने के लिए ली रिश्वत

आगे क्या होगा ?

पाठक ने बताया कि जल्द हमारी मांगें पूरी नहीं हुई तो फरवरी में प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भोपाल में प्रदर्शन होगा।

ये भी पढ़ें: MP में ट्रिपल सिस्टम का असर: प्रदेश में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से बढ़ेगी ठिठुरन, ग्वालियर-चंबल, रीवा रीजन में घने कोहरे का अलर्ट, पाला पड़ेगा

यह भी पढ़ें
Here are a few more articles:
Read the Next Article