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भोपाल में डिजिटल अरेस्ट: ATS अधिकारी बन बुजुर्ग दंपति को वीडियो कॉल से 4 दिन बंधक बनाया, आतंकी फंडिंग का आरोप लगाकर 52 लाख की ठगी

भोपाल के साकेत नगर में बुजुर्ग और उनकी पत्नी को ठगों ने 4 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखा। खुद को ATS और क्राइम ब्रांच अधिकारी बताकर बदमाशों ने आतंकी फंडिंग का झूठा आरोप लगाया और ₹52 लाख ठग लिए।

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Vikram Jain
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सांकेतिक फोटो।

Bhopal Cyber Scam Digital Arrest Senior Citizen: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। साकेत नगर में रहने वाले 74 साल के राजेंद्र सिंह और उनकी पत्नी को जालसाजों ने चार दिनों तक उनके ही घर में डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) करके रखा। ठगों ने खुद को एटीएस (ATS) और क्राइम ब्रांच का बड़ा अधिकारी बताया और 4 दिनों तक वीडियो कॉल पर बंधक रखा। इन शातिर जालसाजों ने पुलवामा हमले में आतंकी फंडिंग का फर्जी आरोप लगाकर बुजुर्ग दंपती से 52 लाख रुपए ठग लिए। अब पुलिस उन नंबरों और बैंक खातों को ट्रेस करने में जुटी है, जहां यह बड़ी राशि ट्रांसफर की गई है।

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भोपाल में डिजिटल अरेस्ट का मायाजाल

दरअसल, भोपाल के साकेत नगर इलाके में रहने वाले राजेंद्र सिंह (74) के पास एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। जालसाजों ने बेहद शातिराना तरीके से बुजुर्ग को डराया कि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल पुलवामा आतंकी हमले की फंडिंग के लिए किया गया है। 

पुलवामा हमले का नाम लेकर डराया

शातिर ठगों ने अपना जाल फैलाते हुए बुजुर्ग से कहा कि आप लोगों पर आतंकी फंडिंग के गंभीर आरोप लगे हैं। ठगों ने कहा कि आपके अकाउंट से आतंकी गतिविधियों के लिए ट्रांजैक्शन हुए हैं, जो देशद्रोह की श्रेणी में आता है। इसके बाद उन्हें आतंकी फंडिंग के केस में फंसाने की धमकी दी गई।

4 दिनों तक वीडियो कॉल पर रखा कैद

ठगों ने बुजुर्ग दंपती को इस कदर डरा दिया कि वे अपने ही घर में बंधक बन गए। उन्हें 4 दिनों तक लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया गया। हद तो तब हो गई जब ठग उनसे खाना-पीना तक पूछकर करने का आदेश देने लगे। जब राजेंद्र सिंह सब्जी खरीदने बाहर जाते, तो ठग वीडियो कॉल को ऑडियो कॉल में ट्रांसफर करवा देते ताकि वे हर पल उनकी निगरानी कर सकें। 4 दिनों तक बुजुर्ग दंपती को पल-पल की निगरानी में रखकर मानसिक प्रताड़ना दी गई।

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मोबाइल पर आया फर्जी वारंट RBI का पत्र

पीड़ित को पूरी तरह जाल में फंसाने के लिए ठगों ने व्हाट्सएप पर जहांगीराबाद पुलिस स्टेशन के नाम से फर्जी गिरफ्तारी वारंट और आरबीआई (RBI) के लेटरहेड वाली पीडीएफ फाइल भेजी। ठगों ने बुजुर्ग दंपती के मन में 'देशद्रोह' और 'गिरफ्तारी' का ऐसा खौफ पैदा किया कि बुजुर्ग पति-पत्नी परेशान हो गए। कानूनी कार्रवाई और जेल जाने के डर से राजेंद्र सिंह ने ठगों के कहे अनुसार अलग-अलग बैंक खातों में कुल 52 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।

जब ठगों ने अपना काम पूरा कर लिया और वीडियो कॉल के साथ-साथ सभी संपर्क अचानक काट दिए, तब जाकर दंपती को ठगी का अहसास हुआ। लेकिन तब तक उनकी जीवन भर की जमा-पूंजी जालसाजों के हाथ लग चुकी थी। मामला अब पुलिस की साइबर सेल के पास पहुंचा है, पुलिस मामले की जांच कर रही है, उन संदिग्ध बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को ट्रैक किया जा रहा है जिनके जरिए इस बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया।

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