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Bhopal Beef Scandal Case update: भोपाल गौमांस कांडकी जांच बढ़ती जा रही है। स्लॉटर होम संचालक असलम जेल में हैं। इस संबंध में आगे पूछताछ के लिए पुलिस बहुत जल्द नगर निगम के करीब आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है। इसके लिए उन्हें जल्द नोटिस जारी किया जाएगा। इतना ही नहीं स्लॉटर का प्रस्ताव तैयार करने वाले नगर निगम के तत्कालीन अपर आयुक्त एनपी सिंह भी जांच के घेरे में हैं।
नोटिस हो सकते हैं जारी
जानकारी के अनुसार गोमांस तस्करी के आरोपों में जेल में बंद स्लॉटर होम संचालक असलम चमड़ा ने रसूखदारों के दम पर सौ करोड़ रुपए का साम्राज्य खड़ा किया है। बताया जा रहा है कि इसमें सफेदपोश लोगों से उसके करीबी रिश्ते भी शामिल हैं।
माना जा रहा है। कि पुलिस नगर निगम के करीब आधा दर्जन अधिकारियों को जल्द नोटिस जारी कर सकती है। इतना ही नहीं इसमें स्लॉटर का प्रस्ताव तैयार करने वाले नगर निगम के तत्कालीन अपर आयुक्त एनपी सिंह भी जांच के घेरे में हैं। ऐसा माना जा रहा है पुलिस को टेंडर संबंधी कई जब्त दस्तावेजों में सिंह के हस्ताक्षर मिले हैं। यही कारण है कि पुलिस असलम के कर्मचारियों करीबियों को तलब करने की तैयारी में है।
1988 में शुरू किया था कारोबार
आपको बता दें करीबियों की मानें तो असलम कुरैशी ने चमड़ा (Aslam Chamda) कारोबार 1988 में भोपाल के पास के इलाकों जैसे सीहोर, विदिशा (Vidish) , रायसेन (Raisen) और आष्टा आदि से खुद गांव-गांव घूमकर स्लॉटरिंग की गई भैंस की खालों को खरीदने का काम किया था। इसमें वह लोडिंग वाहनों से इन खालों को भोपाललाता था। इसके बाद यहां से बंगाल और यूपी भेजता था। इसके बाद जब से उसे मृत गाय को उठाने का टेंडर मिला उसके दिन फिर गए। फिर प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट करना शुरू किया। नगर निगम के स्लॉटर हाउस का संचालन अपने हाथ में लिया।
कुरैशी समाज ने किया था असलम का विरोध
आपको बता दें स्वयं कुरैशी समाज ने प्रेस कान्फ्रेंस कर असलम को स्लॉटर हाउस सौंपे जाने का विरोध किया था। जिसमें समाज ने स्लॉटरिंग के एवज में तय शुल्क से ज्यादा वसूलने के आरोप भी लगे थे।
भोपाल गोमांस तस्करी मामला क्या है
- 17 दिसंबर की रात स्लॉटर हाउस से दो ट्रक निकले थे।
- पुलिस कंट्रोल रूम तिराहे पर हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने ट्रक रोका था।
- इसमें पकड़े गए मांस को ड्राइवर ने भैंस का मांस बताया था।
- ट्रक क्रमांक यूपी 15 – जेटी-4286 में गाय का मांस होने का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया था।
- ड्राइवर ने भैंस के मांस का नगर निगम का सर्टिफिकेट दिखाया।
- पुलिस ने सैंपल फॉरेंसिक लेबोरेटरी मथुरा भेजा था।
- 7 जनवरी को रिपोर्ट मिली थी। जिसमें बताया गया कि मांस भैंस का नहीं ये गाय का मांस है।
- इसके बाद स्लॉटर हाउस संचालक असलम और ट्रक ड्राइवर की गिरफ्तारी हुई थी।
- पुलिस ने बिना रिमांड लिए दोनों को सीधे जेल भेज दिया था।
34 दिन पहले पीएचक्यू के सामने पकड़ा था कंटेनर
भोपाल में बुधवार, 17 दिसंबर पुलिस मुख्यालय (PHQ) के ठीक सामने हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मांस से भरे एक संदिग्ध ट्रक को घेराबंदी कर पकड़ा था। कंटेनर में 26 टन मांस के पैकेट बरामद हुए थे, जिन्हें लेकर कार्यकर्ताओं ने गौ-मांस होने का दावा किया था। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने ट्रक में तोड़फोड़ कर दी थी। स्थिति बिगड़ती देख जहांगीराबाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचकर भीड़ को शांत कराया। पुलिस ने ट्रक को अपने कब्जे में लेकर मांस के नमूनों को जांच के लिए पशु चिकित्सालय भेजे थे।
जांच के ये मुख्य बिंदु
- जांच टीम इस बात का पता लगाएगी कि गौवंश की तस्करी किन रास्तों से और किन जिलों से की जा रही थी।
- स्लॉटर हाउस से 26 टन गौमांस की बरामदगी ने बड़े नेटवर्क की ओर इशारा किया है।
- पुलिस का मानना है कि जेल भेजे गए दो आरोपियों के अलावा मामले में अन्य रसूखदार भी शामिल हो सकते हैं।
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