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Bhagwat Mahapuran Katha: सतना की मशहूर समाजसेविका और मधुरिमा सेवा संस्कार फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. स्वप्ना वर्मा 'दीदी' के नेतृत्व में उनके निज निवास 'ब्रजमधु कमलगीत् भवनम्' में सात दिवसीय भगवत महापुराण कथा का आयोजन किया गया।
आध्यात्मिक चेतना और सेवा का उत्सव
यह आयोजन आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और सेवा भावना का प्रेरक उत्सव बन गया। भक्ति के इस रंग में रंगा सतना लंबे समय तक इस आयोजन की मधुर स्मृतियों को संजोए रखेगा।
कथा का पात्र अनोखा कान्हा
कृष्ण जन्म के मौके पर एक नवजात लावारिस मिला शिशु इस कथा का पात्र बना। जिसका लालन-पालन सामाजिक संस्था कर रही है। कृष्ण जन्मोत्सव के मौके पर मौजूद महिलाओं ने इस बच्चे को कृष्ण स्वरूप स्नेह दिया और उसके मंगल जीवन की कामना की।
दिव्यांगों का सम्मान
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इसी तरह श्रीकृष्ण-रुक्मणि कथा के दौरान सैंकड़ों दिव्यांग भाई-बहनों का सम्मान किया गया। उनके साहस, आत्मविश्वास और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को मंच से सराहा गया। यह भावपूर्ण क्षण उपस्थित जनसमूह के लिए प्रेरणादायी रहा।
मुस्लिम महिलाएं भी कथा में हुईं शामिल
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इस आयोजन की खास बात ये रही कि पवित्र रमजान महीने के दौरान मुस्लिम महिलाएं भी कथा में शामिल हुईं। उनकी उपस्थिति ने सामाजिक समरसता और आपसी सौहार्द का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। यह दृश्य दर्शाता है कि आस्था और मानवीय मूल्यों की डोर सभी को एक सूत्र में बांधती है।
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डॉ. स्वप्ना वर्मा बोलीं-भागवत कथा जीवन में मूल्यों को उतारने का माध्यम
डॉ. स्वप्ना वर्मा ने अपने संदेश में कहा कि भागवत कथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि जीवन में मूल्यों को उतारने का माध्यम है। सेवा, संस्कार और समर्पण ही समाज को सशक्त बनाते हैं। आयोजन के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से समाज कल्याण और नैतिक मूल्यों के संरक्षण का संकल्प लिया।
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