Advertisment

व्यापमं फर्जीवाड़ा: सॉल्वर बैठाकर पुलिस भर्ती परीक्षा की पास, 11 साल नौकरी भी कर ली, अब आरक्षक को मिली 14 साल की सजा

Madhya Pradesh Vyapam Scam Case; व्यापमं का जिन्न फिर बाहर निकला है। पुलिस भर्ती परीक्षा 2013 में परीक्षा में सॉल्वर बैठाकर फर्जी तरीके से आरक्षक बने एक आरोपी को कोर्ट ने 14 साल की सजा सुनाई

author-image
Rahul Sharma
Vyapam-Scam-Constable-Fraud
Vyapam Scam Constable Fraud: व्यापमं का जिन्न फिर बाहर निकला है। पुलिस भर्ती परीक्षा 2013 में परीक्षा में सॉल्वर बैठाकर फर्जी तरीके से आरक्षक बने एक आरोपी को कोर्ट ने 14 साल की सजा सुनाई है।
Advertisment
मजेदार बात ये है कि आरक्षक 11 साल की नौकरी कर चुका था और मामले का खुलासा किसी और ने नहीं, बल्कि फर्जी आरक्षक के एक दूर के रिश्तेदार की शिकायत पर ही हुआ है।
20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा
सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कर आरक्षक बने मुरैना निवासी धर्मेंद्र शर्मा (30) को एसटीएफ कोर्ट ने दो मामलों में 7-7 साल की सजा सुनाई है।
साथ ही 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। एसटीएफ की जांच के बाद एसटीएफ कोर्ट के जज नीति राज सिंह सिसौदिया ने चार माह की सुनवाई के बाद आरोपी को सजा सुनाई।
Advertisment
एसटीएफ कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
एसटीएफ कोर्ट ने आरोपी को सजा सुनाने के दौरान कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि अयोग्य एवं बेईमान अभ्यर्थी के शासकीय सेवक के रूप में चयन होने से दुष्परिणामों की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति रोकने और व्यवस्था पर लोगों का विश्वास स्थापित रखने अभियुक्त को पर्याप्त दंड देना जरूरी है। ऐसे अपराध से पूरा समाज व युवा वर्ग प्रभावित होता है।
Advertisment
इंदौर के विजय नगर थाने में पदस्थ है आरक्षक
इंदौर के विजय नगर थाने में बतौर आरक्षक पदस्थ मुरैना के आरोपी धर्मेंद्र शर्मा की शिकायत 2022 में एसटीएफ के भोपाल मुख्यालय पर हुई। आरोपी ने दो बार अप्रैल 2013 व सितंबर 2013 में सॉल्वर बिठाकर परीक्षा दी। अप्रैल की परीक्षा में वह असफल रहा, लेकिन सितंबर की परीक्षा में सफल होकर बिना परीक्षा दिए आरक्षक बन गया।
मामले की शिकायत आरक्षक के दूर के रिश्तेदार ने 2022 के अंत में एसटीएफ में की थी। मामला दर्ज करने के बाद एडीजी पंकज श्रीवास्तव ने एसपी राजेश भदौरिया के नेतृत्व में जांच टीम बनाई थी।
Advertisment
सॉल्वर से डील करने वाले ताऊ की मौत 
2013 में आरोपी धर्मेंद्र की उम्र 19 साल थी। परीक्षा में सॉल्वर बिठाने की डील उसके ताऊ ने की थी। जब शिकायत होने के बाद जांच शुरू हुई तब तक ताऊ की मौत हो चुकी थी। इस कारण 10 साल पुराने सॉल्वर की पड़ताल में मोबाइल व अन्य साक्ष्य नहीं मिल सके।
ऐसे में एसटीएफ अब तक सॉल्वर तक नहीं पहुंच सकी। इस मामले की सुनवाई लेट न हो इसलिए एडीजी ने नोडल अधिकारी की भी नियुक्ति की। जिससे कोर्ट में न्यायालयीन कार्रवाई 4 माह में पूरी होकर आरोपी को सजा सुना दी गई।
Police Bharti 2013 MP Vyapam scam MP Police Bharti 2013 Constable Fraud Madhya Pradesh Vyapam Scam
Advertisment
चैनल से जुड़ें