हाइलाइट्स
- पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता में गड़बड़ी पर HC सख्त।
- क्यूआईसी को पैरामेडिकल कॉलेजों की जांच के निर्देश।
- मान्यता प्रक्रिया और कोर्स की गुणवत्ता की होगी जांच।
MP Paramedical Admission Scam High Court Order QCI Inspection: मध्य प्रदेश में चल रहे पैरामेडिकल कोर्स घोटाले ने शिक्षा जगत को हिला कर रख दिया है। बिना उचित मान्यता और अधूरी सुविधाओं वाले कई कॉलेजों ने हजारों छात्रों को दाखिला देकर उनका भविष्य संकट में डाल दिया। अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए पूरे मामले की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) सभी मान्यता प्राप्त पैरामेडिकल कॉलेजों की जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि संस्थानों में सिर्फ पैरामेडिकल कोर्स ही संचालित किए जा रहे हों। कोर्ट ने यह भी कहा है कि कॉलेज परिसरों में किसी प्रकार का अन्य शैक्षणिक संस्थान या पाठ्यक्रम न चलाया जाए। क्यूसीआई को कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया की पारदर्शिता, बुनियादी ढांचागत सुविधाओं, प्रयोगशालाओं की कार्यक्षमता, शिक्षकों की योग्यता और पाठ्यक्रम की गुणवत्ता की गहन जांच करने का निर्देश दिया गया है।
कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया पर सवाल
यह मामला तब उजागर हुआ जब मप्र पैरामेडिकल काउंसिल ने 14 जुलाई 2025 को 166 संस्थानों को 2023-24 सत्र के लिए पिछली तारीखों से मान्यता दे दी। कोर्ट ने इसे “तर्कहीन और असामान्य” करार दिया। सवाल यह उठा कि जब मान्यता 2025 में दी गई, तो 2023-24 में कोर्स कैसे संचालित हो सकते हैं?
अयोग्य घोषित कॉलेजों को भी मिली मान्यता
जांच में सामने आया कि कुछ कॉलेज पहले से ही नर्सिंग कॉलेज घोटाले में सीबीआई द्वारा अयोग्य करार दिए जा चुके थे, बावजूद इसके उन्हें पैरामेडिकल कोर्स संचालित करने की मंजूरी मिल गई। इस पर लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन सहित कई संगठनों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए अदालत का रुख किया।
संकट में 40 हजार छात्रों का भविष्य
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि कई कॉलेजों ने बिना वैध मान्यता या न्यूनतम बुनियादी ढांचे के छात्रों को दाखिला दिया, जिससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हुई, बल्कि छात्रों का भविष्य भी खतरे में पड़ गया। बता दें कि करीब 40 हजार छात्र इस विवाद से प्रभावित हुए हैं। 16 जुलाई को प्रवेश प्रक्रिया रोक दी गई, जिससे 2022-23 और 2023-24 में दाखिला लेने वाले छात्रों की डिग्रियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। मोटी फीस चुकाने के बाद छात्र मानसिक और आर्थिक तनाव झेल रहे हैं।
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हाईकोर्ट का सख्त रुख, मांगी सीलबंद रिपोर्ट
मामले में शुक्रवार 8 अगस्त 2025 को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने मप्र पैरामेडिकल काउंसिल को सभी संबंधित दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही, भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) को आदेश दिया गया कि वह अपनी जांच में यह सुनिश्चित करे कि कॉलेज परिसरों में केवल पैरामेडिकल कोर्स ही संचालित हो रहे हों, अन्य किसी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधि न हो। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2025 को निर्धारित की गई है।
इससे पहले 16 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने 2023-24 और 2024-25 सत्रों की मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगाई, इसे सामान्य बुद्धि के खिलाफ बताया। सरकार और काउंसिल से पारदर्शिता पर जवाब मांगा गया। 1 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगाते हुए प्रवेश प्रक्रिया बहाल की, लेकिन हाईकोर्ट की सुनवाई और QCI जांच जारी रखने के निर्देश दिए।
क्या है QCI (भारतीय गुणवत्ता परिषद)?
भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) एक स्वायत्त संगठन है, जिसकी स्थापना 1996 में भारत सरकार ने की थी। यह संगठन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादों, सेवाओं और प्रक्रियाओं की गुणवत्ता को बढ़ावा देना है।
QCI शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गुणवत्ता मानकों के क्रियान्वयन के माध्यम से काम करता है। साथ ही, यह “मेक इन इंडिया” ब्रांड की वैश्विक विश्वसनीयता को भी मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
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