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MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कोरोना योद्धा के परिवार को मिलेगा हक, 'सीएम कोविड-19 योद्धा कल्याण' योजना पर दिया ये आदेश

मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों को सहायता राशि देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस शर्त को भी खारिज कर दिया, जिसमें कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट को अनिवार्य किया गया था।

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Vikram Jain
MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कोरोना योद्धा के परिवार को मिलेगा हक, 'सीएम कोविड-19 योद्धा कल्याण' योजना पर दिया ये आदेश

हाइलाइट्स

  • मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण पर हाईकोर्ट का फैसला।
  • कर्मचारी की कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता खत्म।
  • सरकार को 90 दिन में 50 लाख की सहायता राशि देने का आदेश।
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MP High Court Corona Warrior Compensation Order: कोरोना महामारी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले कोरोना वॉरियर्स के परिवारो राहत की खबर आई है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ‘मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना’ के अंतर्गत सरकार को 90 दिनों के भीतर सहायता राशि देने का आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता को खारिज किया है। यह फैसला उन परिवारों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है, जिन्हें अब तक सरकारी सहायता नहीं मिल सकी थी।

मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना पर फैसला

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 'कोरोना योद्धा कल्याण योजना' के तहत ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों को सहायता राशि देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस शर्त को भी खारिज कर दिया जिसमें कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट को अनिवार्य किया गया था। अब सेवा ही इस योजना के लिए प्रमाण मानी जाएगी।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ‘मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना’ को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस शर्त को खारिज कर दिया है जिसमें योजना के लाभ के लिए कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट को अनिवार्य माना गया था।

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सोमवार को मृत कर्मचारी की पत्नी की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोरोना जैसी आपदा में ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों की सेवा ही सबसे बड़ा प्रमाण है, न कि उनकी टेस्ट रिपोर्ट। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए कि जिन कर्मचारियों की मृत्यु ड्यूटी के दौरान हुई है, उन्हें 'कोरोना योद्धा' मानते हुए योजना का पूरा लाभ दिया जाए।

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कोरोना ड्यूटी के दौरान हुई थी मौत

यह याचिका दिवंगत कर्मचारी राजीव उपाध्याय की पत्नी अंजू मूर्ति ने दायर की थी। कोरोना महामारी (2020-21) के दौरान राजीव उपाध्याय को जिला प्रशासन ने प्रवासी मजदूरों के लिए बस और एम्बुलेंस की व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी थी। देशभर में भयावह हालात थे और राजीव लगातार ड्यूटी पर जुटे रहे। अत्यधिक काम के चलते उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और मौत हो गई।

तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा घोषित योजना में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों को कोरोना योद्धा मानते हुए ₹50 लाख की सहायता राशि देने की घोषणा की गई थी, लेकिन राजीव के परिवार को इस योजना का लाभ नहीं दिया गया।

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सेवा को मिला न्याय, हाईकोर्ट ने सरकार को दिया आदेश

राजीव उपाध्याय की 10 जून 2020 को ड्यूटी के दौरान मौत के बाद, तत्कालीन कलेक्टर भरत यादव ने उन्हें 'कोरोना योद्धा' मानते हुए उनका नाम सरकार को भेजा था। बावजूद इसके, राज्य सरकार ने किसी कारणवश सहायता राशि देने से इंकार कर दिया।

न्याय की उम्मीद में राजीव की पत्नी अंजू मूर्ति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत ने माना कि राजीव की मृत्यु ड्यूटी के दौरान हुई थी और “सेवा ही सबसे बड़ा प्रमाण” है। हाईकोर्ट ने कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता को खारिज करते हुए कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह 90 दिनों में सहायता राशि देने का आदेश सुनाया।

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