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Maheshwar : सोने का वो विशाल सिंहासन जहां पूजा करती थी देवी अहिल्या बाई

सोने का वो विशाल सिंहासन जहां पूजा करती थी देवी अहिल्या बाई Lord Krishna is seated on a golden throne in the temple of Maheshwar.

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deepak
Maheshwar : सोने का वो विशाल सिंहासन जहां पूजा करती थी देवी अहिल्या बाई

Maheshwar : महेश्वर यानि रानी अहिल्या बाई होलकर की नगरी! इतिहास के पन्नों में अहिल्याबाई होल्कर का नाम आज भी सुनहेरे अक्षरों में दर्ज है। महेश्वर नर्मदा नदी के किनारे स्थित एक प्राचीन नगरी है। इसे माहिष्मती भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार बताया जाता है कि यही पर एक बार राजा सहस्त्रार्जुन ने रावण को 6 महीने तक बंदी बना के रखा था। महेश्वर का उल्लेख रामायण एवं महाभारत में देखने को भी मिलता है। महेश्वर को आज हम उज्जैन के नाम से जानते है। रानी अहिल्या बाई होलकर ने अपने शासन की शुरूआत महेश्वर से ही की थी। अहिल्या बाई पर मां नर्मदा की असीम आस्था थी। महेश्वर में रानी अहिल्या बाई का एक महल आज भी स्थित है। जहां आज भी उनके द्वारा स्थापित किया गया शिव मंदिर है और इसकी आज भी पूजा की जाती है।

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कौन थी रानी अहिल्या बाई

अहिल्या बाई कौन थी अहिल्या बाई के बारे में कम लोग ही जानते है। रानी अहिल्या बाइ को जानने के लिए हमे करीब 200 साल पिछे जाना होगा। हम उस दौर की बात कर रहे है। जब मालवा से मुगलों को हटाया गया था। उस दौर में पेशवाओं ने दरवार में सूबेदार रखे थे। सूबेदारों में मल्हार राव होल्कर भी शामिल थे। बताया जाता है कि पेशवाओं को मल्हार राव पर काफी भरोसा था। मल्हार राव की बहू अहिल्या बाई थी। वैसे तो अहिल्या बाई एक समाज सुधार थी, लेकिन उन्होंने मालवा पर करीब 28 साल तक राज किया। अहिल्या बाई ने अपने शासन काल के दौरान महिलाओं के उत्थान के लिए कई लड़ाईयां लड़ी। अहिल्या बाई को एक न्याय प्रिय शासक माना जाता था।

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शिवभक्त थी अहिल्या बाई

अहिल्या बाई होल्कर को उस दौर में सबसे बड़ी शिवभक्त माना जाता था। जब भी वही अपने शासन काल में कोई भी कार्य शुरू करती थी तो पहले वह भगवान शिवजी की भक्ति के साथ करती थी। उस दौर में होल्कर राजवंश की राजधानी महेश्वर हुआ करती थी। महेश्वर के नर्मदा तट पर रानी अहिल्या बाई ने कई घाटों का निर्माण कराया था। इसके अलावा अहिल्याबाई ने भारत में सौकड़ों शिव मंदिर बनवाए है। इतना ही नहीं भारत के अधिक्तर ज्योर्तिलिंगों का विकास कार्य रानी अहिल्या बाई ने ही कराया था।

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आज भी होती है शिवलिंग की पूजा

मध्यप्रदेश के इंदौर और महेश्वर के किले में आज भी वो शिवलिंग मौजूद है, जिनकी पूजा होल्कर राजवंश करते थे। बताया जाता है कि होल्कर राजवंश में रोजाना पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कराया जाता था और नर्मदा नदी में पूजा के बाद प्रवाहित कर दिया जाता था। अहिल्याबाई ने जब काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण कराया था, तब उन्हें पुण्य श्लोक की उपाधि दी गई थी। पुण्य श्लोक की पद्वी देश में कुछ ही लोगों को ही मिली है।

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महेश्वर के मंदिर में सोने के सिंहासन पर विराजे लड्डू गोपाल

महेश्वर के मंदिर में एक सोने का विशाल सिंहासन है, जिसपर लड्ड गोपाल विराजमान है। रानी अहिल्या बाई बाल गोपाल की पूजा करने रोज आती थी। यह सिंहासन चमत्कारी माना जाता है। सिंहासन पर विराजे बाल गोपाल के दर्शन मात्र करने से ही भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं।

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