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फिर मोदीमय हुआ काशी: वाराणसी में पीएम मोदी ने लगाई जीत की हैट्रिक, खिलाफ लड़ रहे 7 प्रत्याशियों को मिले इतने वोट

Narendra Modi Varanasi Election Result 2024 Live: नरेंद्र मोदी को साल 2019 की ही तरह 2024 में भी मां गंगा का आशीर्वाद मिला है।

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Kalpana Madhu
फिर मोदीमय हुआ काशी: वाराणसी में पीएम मोदी ने लगाई जीत की हैट्रिक, खिलाफ लड़ रहे 7 प्रत्याशियों को मिले इतने वोट

Narendra Modi Varanasi Election Result 2024 Live: नरेंद्र मोदी को साल 2019 की ही तरह 2024 में भी मां गंगा का आशीर्वाद मिला है। मोदी ने वाराणसी से बंपर वोटों के साथ लोकसभा चुनाव 2024 जीता है। मोदी ने कांग्रेस के अजय राय और बसपा के अतहर जमाल लारी को करारी शिकस्त देकर चुनाव जीता। पीएम मोदी 152355 वोटों के मार्जिन से जीते हैं। 

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वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 152355 वोटों के अंतर से जीत गए हैं। मोदी को 611439 और कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय को 459084 वोट मिले।

वर्ष 2019 में मोदी ने यहां 4 लाख से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की थी। वाराणसी सीट पर मोदी के खड़े होने के कारण यहां प्रत्याशियों की बाढ़ आ गई थी। इस सीट से इस साल कुल 7 प्रत्याशियों ने चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई। यहां 1 जून को मतदान हुआ था।

सूत्रों के अनुसार मोदी अगले सप्ताह बनारस का दौरा कर लोगों का धन्यवाद करेंगे और काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे।

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साल 2014 में पहली बार वाराणसी आए थे मोदी

दरअसल, नरेंद्र मोदी वाराणसी सबसे पहले साल 2014 में उस वक्त आए थे जब वह भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे। उस वक्त मोदी ने वाराणसी की धरती से कहा था- 'न तो मैं आया हूं और न ही मुझे भेजा गया है। मुझे तो मां गंगा ने यहां बुलाया है। यहां आकर मैं वैसी ही अनुभूति कर रहा हूं, जैसे एक बालक अपनी मां की गोद में करता है।'

साल 2019 में मोदी ने कहा कि वाराणसी अभी और बदलेगा, भव्य बनेगा। साल 2014 में मोदी ने बुनकरों की जिंदगी बदलने के लिए काम करने की बात कही थी। इससे खुश होकर बुनकर समाज का मोदी को जमकर समर्थन मिला। इसी तरह 2019 में भी नरेंद्र मोदी को वाराणसी से हर जाति और धर्म के लोगों का समर्थन हासिल हुआ था।

बात करें 2024 की तो इस बार फिर मोदी लोगों के दिलों में अपनी जगह बना गए हैं। नरेंद्र मोदी को न सिर्फ सनतानियों का बल्कि हर एक धर्म का वोट मिला है। वाराणसी का जिस तरह से कायाकल्प हो रहा है, उससे वाराणसी की जनता विकास को लेकर आशातीत थी। यही वजह है कि जब मोदी इस बार वाराणसी नामांकन भरने गए तो उनका जिस तरह से स्वागत और सत्कार हुआ, वह राजनीतिक इतिहास में अपने आप ही अनोखा था। उसी क्षण और दिन  वाराणसी की जनता ने इस बात के साफ संकेत दे दिए थे कि नरेंद्र मोदी को फिर से जनता का आशीर्वाद मिल रहा है।

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वाराणसी में कितनी बड़े थे मोदी के प्रतिद्वंदी?

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीति शुरू करने वाले अजय राय बीजेपी और सपा में भी रह चुके हैं। वो चार बार वाराणसी के कोलअसला और एक बार पिंडरा विधानसक्षा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। कोलअसला से वे तीन बार बीजेपी के टिकट और एक बार निर्दलीय और पिंडरा से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। राय इस समय उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।

वहीं समाजवादी रूझान वाले अतहर जमाल लारी बसपा के उम्मीदवार हैं। उन्होंने अपना राजनीतिक करियर जनता पार्टी से शुरू किया था। वो वाराणसी में लोकसभा और विधानसभा का चुनाव कई दफा लड़ चुके हैं। लारी ने  1984 और 2004 का लोकसभा चुनाव भी वाराणसी से लड़ा था, लेकिन सफलता नहीं मिली।  बसपा में आने से पहले वो जनता दल, अपना दल और कौमी एकता दल में रहे। वो मूल रूप से गोरखपुर के रहने वाले हैं। वो वाराणसी में रहकर कपड़े के कारोबार से जुड़े हुए हैं।

इस बार के चुनाव में वाराणसी से 41 उम्मीदवारों ने किया था नामांकन

वहीं, साल 2014 में वाराणसी लोकसभा सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 41 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे, जिनमें से 19 निर्दलीय थे। जबकि साल 2019 में पीएम के खिलाफ 26 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें से 8 निर्दलीय थे।

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लेकिन इस बार वाराणसी सीट के लिए 41 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था, जिनमें से 1 ने खुद ही नामांकन वापस ले लिया।  बाकी 7 उम्मीदवारों के नामांकन जांच में विफल रहे।  वहीं, वाराणसी में मतदान अंतिम चरण में 1 जून को होगा। जबकि, चुनाव परिणाम आज आएंगे।

वाराणसी सीट का इतिहास

स्वतंत्रता के बाद हुए चुनाव में रघुनाथ सिंह तीन बार सांसद बने। 1967 में सीपीएम के एसएन सिंह ने उन्हें हरा दिया।

1971 कांग्रेस ने विद्यापीठ के तत्कालीन कुलपति प्रो राजाराम शास्त्री को उतारा। प्रो शास्त्री ने जनसंघ के कमला प्रसाद सिंह को हराया।

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1977 में जेपी लहर में लोकदल के चंद्रशेखर सांसद बने।1980 का चुनाव निर्णायक रहा।

कांग्रेस के पंडित कमलापति त्रिपाठी ने जमीनी नेता राजनारायण को हरा दिया।

1984 में कांग्रेस के श्यामलाल यादव, 1989 के वीपी सिंह लहर में जनता दल के अनिल शास्त्री जीते।

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1991 में पहली बार यहां राम मंदिर के नायक श्रीशचंद दीक्षित ने भगवा लहराया।

इसके बाद तीन बार भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल सांसद रहे। उन्हें 2004 में डॉ. राजेश मिश्रा ने हरा दिया।

2009 में भाजपा ने डॉ. मुरली मनोहर जोशी को उतारा। उन्होंने भाजपा को फिर सीट वापस दिला दी।

2014 व 2019 में नरेंद्र मोदी सांसद बने।

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