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Lok Sabha Chunav: क्या राहुल गांधी को लेना चाहिए राजनीति से ब्रेक? प्रशांत किशोर ने दी ये 4 नसीहतें

Lok Sabha Chunav: क्या राहुल को लेना चाहिए ब्रेक? पॉलिटिकल स्ट्रेटजिस्ट प्रशांत किशोर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दी ये नसीहतें.

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Rohit Sahu
Lok Sabha Chunav: क्या राहुल गांधी को लेना चाहिए राजनीति से ब्रेक? प्रशांत किशोर ने दी ये 4 नसीहतें

   हाइलाइट्स

  • राहुल गांधी को प्रशांत किशोर की नसीहतें
  • राजनीति से कुछ समय ब्रेक लें राहुल: पीके
  • सोनिया गांधी ने भी लिया था ब्रेक: प्रशांत किशोर
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Lok Sabha Chunav: पॉलिटिकल स्ट्रेटजिस्ट प्रशांत किशोर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राजनीति से ब्रेक लेने की सलहा दी है. उन्होंने कहा कि 10 साल की नाकामी के बाद भी वे नहीं हटे और न ही किसी ओर को पार्टी चलाने दी. बता दें Lok Sabha Chunav से पहले प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कई नसीहतें दी और हार के कारण गिनाए.

    हिंदी पट्टी में पकड़ न बनाना बड़ी भूल

प्रशांत किशोर ने नसीहत देते हुए कहा कि राहुल गांधी हिंदी पट्टी में चुनाव नहीं जीत पाते हैं, तो फिर वायनाड जीतने का भी कोई फायदा नहीं है. कांग्रेस की लड़ाई मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे हिंदी पट्टी वाले राज्यों में है.

लेकिन उनके नेता मणिपुर और मेघालय का दौरा करते हैं. अकेले केरल जीतकर देश नहीं जीत सकते. राहुल गांधी के लिए अमेठी छोड़ना देश की जनता के लिए गलत संदेश देने जैसा है. प्रशांत ने प्रधानमंत्री मोदी का उदाहरण भी दिया और कहा पीएम मोदी 2014 (Lok Sabha Chunav) में अपने गृह राज्य गुजरात के साथ-साथ उत्तर प्रदेश से भी चुनाव लड़े थे.

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   कुछ साल ब्रेक लेने में नहीं है कोई बुराई

प्रशांत किशोर ने कहा कि जब राहुल गांधी पिछले 10 साल से एक ही काम कर रहे हैं. उसमें भी कोई खास सफलता हासिल नहीं कर पा रहे हैं.  तो ब्रेक लेने में कोई बुराई नहीं है. आपको किसी और को पांच साल के लिए यह काम करने देना चाहिए.

हम देख चुके हैं सोनिया गांधी ने यह किया है. जब पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की हत्या हुई तो सोनिया गांधी ने 1991 में राजनीति से दूरी बना ली और कांग्रेस की कमान पीवी नरसिम्हा राव को दी जिससे रिजल्ट बदला.

   राहुल ने जो बोला वो किया नहीं

प्रशांत किशोर ने कहा 2019 के चुनाव (Lok Sabha Chunav) में हार के बाद राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का फैसला किया. इसके साथ ही उन्होंने तय बयान दिया था कि वह किसी और को पार्टी की जिम्मेदारी देंगे. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

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वे अपने कहे के विपरीत काम कर रहे हैं. कांग्रेस और उसके समर्थक किसी भी व्यक्ति विशेष से बड़े हैं. ऐसे में राहुल को यह जिद नहीं करनी चाहिए कि बार-बार विफलताओं के बावजूद वह ही पार्टी का नेतृत्व करें.

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   चुनाव आयोग और मीडिया को हार का जिम्मेदार ठहराना गलत

प्रशांत ने राहुल गांधी को नसीहत दी है कि वे चुनाव में हारने पर मीडिया और चुनाव आयोग (EC) को जिम्मेदार ठहराना गलत है. राहुल गांधी चुनाव में हार के बाद न्यायपालिका और मीडिया पर आरोप लगाते रहते हैं.

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उन्होंने कहा कि यह आंशिक रूप से सच हो सकता है लेकिन पूरा सच ये नहीं है. 2014 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Chunav) बीजेपी का संस्थानों पर प्रभाव उतना नहीं था इसके बाद भी कांग्रेस 206 सीटों से घटकर 44 सीटों पर आ गई थी.

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