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Lingayat community : कौन होते है लिंगायत, क्यों होते हिंदू धर्म से अलग, जानिए

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deepak
Lingayat community : कौन होते है लिंगायत, क्यों होते हिंदू धर्म से अलग, जानिए

Lingayat community: इन दिनों कर्नाटक में स्थित लिंगायत मठ के स्वामी शिवमूर्ति मुरूगा शरणारू को पुलिस ने एक नाबालिग से यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया है। स्वामी शिवमूर्ति की गिरफ्तारी को लेकर लिंगातय समुदाय (Lingayat community) काफी चर्चा में बना हुआ है। पुलिस ने स्वामी शिवमूर्ति को हिरासत में लेकर मामले की जांच कर रही है। वही लिंगायत समुदाय (Lingayat community) के लोग पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है। लिंगायत समुदाय (Lingayat community) क्या है, और यह समुदाय हिंदू धर्म से अलग क्यों होता है। आइए जातने है।

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कौन होते है लिंगायत (Lingayat community)?

लिंगायत कर्नाटक राज्य का प्रमुख समुदाय (Lingayat community) है। लिंगायत समदाय की उत्पति 12वीं सदी में समाज सुधार आंदोलन के तहत हुई थी। समाज सुधारक आंदोलन का नेतृत्व संत बसवेश्वर के नाम से जाना जाने वाले बसवन्ना ने किया था। आज भी लिंगायत समुदाय (Lingayat community) संत बसवेश्वर की पूजा करता है। कर्नाटक में हिंदुओं के पांच संप्रदाय है जिनमें शैव, वैष्णव, शाक्त, वैदिक और स्मार्त. शैव संप्रदाय है। स्मार्त. शैव संप्रदाय के उप संप्रदाय भी हैं जिनमें लिंगायत इसी संप्रदाय (Lingayat community) का हिस्सा हैं। कर्नाटक में लिंगायत समुदाय (Lingayat community) की कुल आबादी करीब 17 फीसदी है।

अलग - अलग होते है संप्रदाय

कर्नाटक में शिव के साकार रूप की पूजा करने वाले शैव संप्रदाय कहलते है। तो वही लिंगायत शिव के निराकार रूप को पूजते हैं। लिंगायत समुदाय (Lingayat community) के लोग अपने गले में ईष्टलिंग पहनते हैं। लिंगायत समुदाय (Lingayat community) में हिंदू धर्म की अपेक्षा अंतिम संस्कार अलग तरीके से किया जाता है। लिंगायत समुदाय (Lingayat community) हिंदू धर्म से मिलता जुलता तो है लेकिन इस समुदाय (Lingayat community) में किसी के मरने के बाद जलाने की जगह उसे दफनाया जाता है। सबसे पहले शव को सजाया जाता है और उसे कुर्सी पर बिठाया जाता है। इसके बाद उसे कंधे पर उठाकर उसे कब्रिस्तान ले जाते है। आपको बता दें कि लिंगायत समुदाय (Lingayat community)  के लोगों का कब्रिस्तान भी अलग होता है।

कैसे बना ये समुदाय?

बताया जाता है कि 12वीं सदी के दौरान ऊंच-नीच का भेदभाव अधिक हुआ करता था। उस समय बसवन्ना ने जाति के भेदभाव को खत्म करने के लिए वीणा उठाया। संत बसवन्ना ने मठों, मंदिरों में फैला अंधविश्वास और ऊंच-नीच के खिलाफ आवाज बुलंद की। वह निराकार भगवान की अवधारणा के समर्थक बने। यहीं से लिंगायत समुदाय (Lingayat community) का उदय हुआ। लिंगायत समुदाय के लोग हिंदू धर्म से अलग पहचान देने की मांग करते आए है।

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