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Health Tips: ऑनलाइन कंटेंट की गिरफ्त में बचपन, जानें स्क्रीन टाइम कैसे बिगाड़ रहा बच्चों की हेल्थ

Health Tips: आज के समय में स्मार्टफोन, टैबलेट और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म बच्चों की आदत बन गए हैं. लेकिन स्क्रीन का जरूरत से ज्यादा उपयोग बच्चों की नींद, मेमोरी और व्यवहार को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है.

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Satya Sharma
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Health Tips: आज के समय में स्मार्टफोन, टैबलेट और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म बच्चों की आदत बन गए हैं. लेकिन स्क्रीन का जरूरत से ज्यादा उपयोग बच्चों की नींद, मेमोरी और व्यवहार को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है. 

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वहीं कुछ बच्चे तो ऐसे होते हैं कि बिना मोबाईल व टीवी के उनका खाना ही गले से नीचे नहीं उतरता. अगर बच्चे को ऐसा करने से माता-पिता रोकते हैं तो वह चिड़चिड़ाने लगता है और धीरे-धीरे जिद्दी स्वभाव का बन जाता है. स्क्रीन की लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है. 

डॉक्टर्स के मुताबिक, 2 साल से कम उम्र के बच्चों को बिल्कुल भी स्क्रीन का उपयोग नहीं करना चाहिए. वहीं, 2 से 5 साल के बच्चों को प्रतिदिन सिर्फ एक घंटे स्क्रीन का उपयोग करना चाहिए. दरअसल, कोरोना के समय से बच्चों का स्क्रीन टाइम बहुत बढ़ा है और यही कारण है कि बच्चों की इसकी लत लग गई है. 

बच्चों के दिमाग पर कैसे असर डालती है स्क्रीन की लत

1. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसे कई गेम्स होते हैं, जिनमें ये बताया जाता है कि इन गेम्स को खेलने से इनाम मिलेगा और बच्चा इसी जाल में फंस जाता है. इस दौरान बच्चे के दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है, जिससे उसे ऑनलाइन कंटेट अच्छा लगने लगता है और उसे इन सब की आदत लग जाती है. 
2. अक्सर हमने देखा है कि ऑनलाइन कंटेट तेजी से बढ़ रहा है, जिसकी वजह से बच्चे का दिमाग उसी में लगा रहता है और पढ़ाई से उसका मन हटने लगता है. 
3. स्क्रीन बच्चे की नींद को भी बुरी तरह से प्रभावित करती है. दरअसल, स्क्रीन के लगातार इस्तेमाल से सर्कैडियन रिदम और मेलाटोनिन हार्मोन का रिसाव कम होता है, जिससे बच्चे का स्लीपिंग साइकल बिगड़ जाता है. 
4. स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल करने से बच्चे के व्यवहार में परिवर्तन आने लगता है और वह जिद्दी व चिड़चिड़ा बन जाता है. इसके अलावा कम उम्र में बच्चे की आंखें भी खराब हो जाती है. 

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बच्चों के स्क्रीन टाइम के बढ़ने का पूरा दोष सिर्फ माता-पिता का नहीं है बल्कि इसमें स्कूलों को डिजिटल शिक्षा प्रणाली भी जिम्मेदार है. इस समस्या का यही समाधान है कि बच्चों को जितना हो सके ऑफलाइन शिक्षा की तरफ आकर्षित किया जाए और उन्हें खेल-कूद के लिए भी प्रेरित किया जाए.

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