International Epilepsy Day 2026: मिर्गी शारीरिक बीमारी है या मानसिक, 5 मिनट से ज्यादा के लिए आए अटैक, तो जानें क्या कहती है एक्सपर्ट की सलाह

International Epilepsy Day 2025: मिर्गी, जिसे मेडिकल भाषा में एपिलेप्सी (Epilepsy) कहा जाता है। यह एक क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार दौरे (Seizures) आते हैं।

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International Epilepsy Day 2026: मिर्गी, जिसे मेडिकल भाषा में एपिलेप्सी (Epilepsy) कहा जाता है। यह एक क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार दौरे (Seizures) आते हैं। जानकारी के अनुसार, दुनिया भर में करीब 5 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। हर साल फरवरी के दूसरे सोमवार को विश्व मिर्गी दिवस मनाया जाता है। वहीं हर साल 17 नवंबर को नेशनल एपिलेप्सी डे मनाया जाता है। 

बंसल हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ प्रतीक शर्मा ने बताया कि, सही समय पर पहचान और इलाज से मिर्गी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। मिर्गी एक दिमाग और नसों से जुड़ा विकार है, जिसमें मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी अचानक असामान्य हो जाती है, जिससे दौरे पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि दवाइयां और सही इलाज से इस बीमारी से राहत पा सकते हैं। 

मिर्गी (एपिलेप्सी) क्या है और यह क्यों होती है?

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मिर्गी एक दिमाग और नसों से जुड़ा विकार है, जिसमें मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी अचानक असामान्य हो जाती है, जिससे दौरे पड़ते हैं। मिर्गी के मुख्य कारण की बात करें तो आनुवंशिक कारण (परिवार में किसी को मिर्गी होना), दिमाग की बनावट में गड़बड़ी, सिर में गंभीर चोट या एक्सीडेंट, ब्रेन ट्यूमर या स्ट्रोक, मेनिनजाइटिस या एन्सेफलाइटिस जैसे संक्रमण, ब्लड शुगर या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, हार्मोनल बदलाव या दवाओं का साइड इफेक्ट, कई मामलों में मिर्गी का सटीक कारण पता नहीं चल पाता।

क्या मिर्गी मानसिक बीमारी है या शारीरिक?

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बंसल हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ प्रतीक शर्मा ने बताया कि यह सबसे बड़ा भ्रम है। मिर्गी मानसिक बीमारी नहीं है। यह पूरी तरह से शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो दिमाग की नसों से जुड़ी होती है। इस भ्रम को दूर करने के लिए समाज में सही जानकारी, मेडिकल जागरूकता और मरीजों के प्रति संवेदनशील रवैया जरूरी है।

मिर्गी के आम लक्षण क्या होते हैं?

मिर्गी के लक्षण इसके प्रकार पर निर्भर करते हैं, लेकिन आमतौर पर ये लक्षण दिखाई देते हैं।

  • अचानक बेहोश हो जाना
  • हाथ-पैरों में तेज झटके या अकड़न
  • कुछ देर तक एकदम स्तब्ध रह जाना
  • बार-बार एक जैसे दौरे पड़ना
  • भ्रम की स्थिति या डर

दौरे के बाद अत्यधिक थकान

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अगर दौरे 5 मिनट से ज्यादा चलें या बार-बार आएं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

क्या मिर्गी संक्रामक बीमारी है?

बंसल हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ प्रतीक शर्मा ने बताया कि, यह कोई नहीं संक्रामक बीमारी नहीं है। यह न छूने से फैलती है, न साथ रहने से और न ही बातचीत से। समाज में फैली यह धारणा पूरी तरह गलत है और इसे बदलने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि जितना लोगों को मिर्गी के बारे में बता नहीं है उतना तो उसके बारे में गलत जानकारी है। 

मिर्गी का इलाज कितना संभव है? क्या मरीज सामान्य जीवन जी सकता है?

बंसल हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ प्रतीक शर्मा बताया कि, हां,  लगभग 70% मरीज दवाओं से पूरी तरह कंट्रोल में रहते हैं। सही इलाज, नियमित दवा और लाइफस्टाइल सुधार से मरीज सामान्य जीवन, पढ़ाई, नौकरी और शादी तक कर सकता है।

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मिर्गी का दौरा पड़े तो क्या करें और क्या न करें?

बंसल हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ प्रतीक शर्मा के अनुसार 

क्या करें:

  • मरीज को सुरक्षित जगह लिटाएं
  • सिर के नीचे मुलायम चीज रखें
  • दौरे का समय नोट करें
  • 5 मिनट से ज्यादा हो तो डॉक्टर को बुलाएं

क्या न करें:

  • मुंह में कुछ न डालें
  • मरीज को जबरदस्ती पकड़ें नहीं
  • घबराएं नहीं
  • बच्चों और युवाओं में मिर्गी क्यों बढ़ रही है?
  • जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी
  • मोबाइल और स्क्रीन टाइम
  • नींद की कमी
  • सिर की चोट
  • जेनेटिक फैक्टर
  • समय पर जांच से स्थिति संभाली जा सकती है।

मिर्गी मरीज और परिवार क्या करें?

  • बीमारी को स्वीकार करें
  • समाज के डर और भेदभाव से न डरें
  • स्कूल, ऑफिस और रिश्तेदारों को जानकारी दें
  • नियमित डॉक्टर फॉलोअप रखें

मिर्गी में डाइट कैसी होनी चाहिए?

बंसल हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ प्रतीक शर्मा ने बताया कि इसके लिए कोई एक खास डाइट नहीं है लेकिन हेल्दी और संतुलित भोजन, शराब से परहेज, ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड फूड कम खाना चाहिए। कुछ केस में डॉक्टर Ketogenic Diet की सलाह देते हैं (खासकर बच्चों में)

क्या मिर्गी की दवाएं जिंदगी भर लेनी पड़ती हैं?

हर मरीज के लिए जवाब अलग है कुछ मरीजों को लंबे समय तक दवा लेनी पड़ती है तो कुछ में 2–5 साल दौरा न आए तो डॉक्टर दवा धीरे-धीरे बंद कर सकते हैं  बिना डॉक्टर की सलाह दवा बंद करना खतरनाक है।

जेनेरिक या ब्रां डेड दवा, कौन सी सही?

यह एक आम सवाल है।  जेनेरिक दवाएं भी असरदार होती हैं, अगर क्वालिटी सही हो समस्या तब होती है जब बार-बार दवा बदली जाए। बंसल हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ प्रतीक शर्मा ने बताया कि, डॉक्टर की सलाह के बिना दवा का ब्रांड न बदलें।

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