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Largest Cannon of Asia: इतिहास में सिर्फ एक बार चली, फिर भी दुनिया के लिए अजूबा है भारत की ये तोप

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Sonu Singh
Largest Cannon of Asia: इतिहास में सिर्फ एक बार चली, फिर भी दुनिया के लिए अजूबा है भारत की ये तोप

Largest Cannon of Asia-Jaivana: इतिहास में देखा जाए तो भारत में राजा महाराजा अस्त्र-शस्त्र के काफी शौकीन होते थे। युद्ध के लिए अनोखे तरह के शस्त्रों का निर्माण भी करवाते थे। इसी का एक उदाहरण आज भी हमारे सामने मौजूद है। जो कि आज भी पूरी दुनिया के लिए बेहद अनोखी है। जी हां हम बात कर रहे हैं एशिया की सबसे बड़ी तोप- जयवाण की (Largest cannon of Asia Jaivana)। इस तोप की जयपुर के जयगढ़ किले में हिफाजत की जा रही है।

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बहुत ही शक्तिशाली है जयवाण तोप
जयवाण तोप का निर्माण 1720 ई. में जयपुर किले के प्रशासक जयसिंह द्वितीय ने इस तोप को खासतौर पर बनवाया था। उन्होंने अपनी रियासत की सुरक्षा के लिए इसका निर्माण करवाया था।

कभी युद्ध में नहीं किया गया इस्तेमाल
यह तोप जयगढ़ किले के डूंगर दरवाजे की बुर्ज पर स्थित है। यह तोप साइज में जितनी बड़ी है उतनी ही शक्तिशाली। हालांकि इस तोप का वजन इतना ज्यादा है कि, इसे कभी किले से बाहर नहीं ले जाया गया और न ही कभी इसका किसी युद्ध में इस्तेमाल किया गया।

सिर्फ एक बार चली तोप और गोले से बन गया तालाब
जयबाण तोप को सिर्फ एक ही बार चलाया गया था, वो भी परीक्षण के लिए।  तब तोप से दागा गया गोला किले से करीब 35 किलोमीटर दूर जाकर एक गांव में गिरा था और जहां गिरा था, वहां एक बड़ा तालाब बन गया था। वह तालाब आज भी मौजूद है और लोगों के लिए पानी का स्त्रोत बना हुआ है।

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जयवाण तोप का वजन करीब 50 टन है। इस तोप की मारक क्षमता करीब 30-35 किलोमीटर बताई जाती है। इसे एक बार फायर करने के लिए करीब 100 किलो गन पाउडर की जरूरत पड़ती थी। इस तोप की नली से लेकर अंतिम छोर की लंबाई 31 फीट 3 इंच है।

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