कोविड-19 ने महाराष्ट्र के स्वास्थ्य तंत्र की परीक्षा ली

(निखिल देशमुख)

मुम्बई, 29 दिसंबर (भाषा) महाराष्ट्र के लिए 2020 में स्वास्थ्य चिंता का एक बड़ा विषय रहा है क्योंकि उस पर कोविड-19 का साया बना रहा है और इस महामारी के रोजाना के नये मामलों और मौतों के संदर्भ में यह राज्य में देश में कई बार शीर्ष पर रहा।

राज्य में कोविड-19 का पहला मामला नौ मार्च को आया। तब से संक्रमण और उसके चलते मौतों का ग्राफ तेजी से बढ़ा और सितंबर में यह शीर्ष पर चला गया। पिछले दो महीने में उसका ग्राफ नीचे आया।

राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं पर बढ़ते मरीजों का बहुत दबाव पड़ा।

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे के अनुसार राज्य की राजधानी मुम्बई की व्यापक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विमान कनेक्टिविटी है, जिसके फलस्वरूप बड़ी संख्या में लोग संक्रमण के साथ यहां पहुंचे और स्थानीय स्तर पर यह महामारी तेजी से फैली।

उन्होंने कहा, ‘‘मार्च में, केंद्र ने राज्य को 11 देशों की सूची देकर वहां से आने वाले यात्रियों की जांच करने को कहा। इसका नतीजा यह हुआ कि (गैर सूची वाले देशों) के कई संक्रमित लोग जांच से बच गये और बाद में उन्होंने स्थानीय लोगों को संक्रमित किया। ’’

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकारमार्च से ही केंद्र से मुम्बई हवाई अड्डे पर पर जांच कर्मी बढ़ाने तथा सूची में और देशों को शामिल करने की मांग कर रही थी।

एक अन्य बड़ा मुद्दा सामने आया, वह था कोरोना वायरस के चलते लगाये गये लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों का पलायन करना। अधिकारियों के अनुसार अप्रैल से 10 लाख से अधिक प्रवासी राज्य के विभिन्न हिस्सों से लौट गये।

राज्य के लिए मुश्किलें तब और बढ़ गयीं जब एक दूसरे के बीच दूरी बनाने के नियम की धज्जियां उड़ाते हुए सैकड़ों श्रमिक 16 अप्रैल को बांद्रा स्टेशन पर पहुंच गये और उन्हें उनके मूल स्थानों पर भेजने के लिए इंतजाम की मांग करने लगे। इस संदर्भ में एक टीवी पत्रकार को गलत सूचना के प्रसारण के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया। उन्नीस मई को बांद्रा टर्मिनस भी पर ऐसी ही स्थिति पैदा हो गयी।

लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों को घर जाने के लिए जो भी साधन मिले, उससे ही वे निकल पड़े। कुछ तो पैदल ही जाने लगे। इसी बीच, मई में बहुत दुखद घटना यह हुई कि महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मध्य प्रदेश लौट रहे कम से कम 16 श्रमिक मालगाड़ी से कुचलकर मर गये।

मई से लेकर सितंबर तक महाराष्ट्र में कोविड-19 के सबसे अधिक मामले सामने आये और मरीजों की मौत हुई। जून में विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फड़णवीस ने सरकार पर कोविड-19 से हुई 1000 मौतों की रिपोर्ट नहीं करने का आरोप लगाया।

चौंकाने वाली एक अन्य बात यह रही कि जून में जलगांव में कोविड-19 की एक बुजुर्ग मरीज का शव लापता होने के आठ दिन बाद शौचालय में मिला, जो प्रशासन की बड़ी लापरवाही थी।

अगस्त और सितंबर के बीच राज्य में इस महामारी का बहुत बुरा दौर देख गया और हर सप्ताह एक लाख मामले जुड़े। अक्टूबर से महामारी के रोजाना मामले घटने लगे।

राज्य की आस अब टीके पर टिकी है जिसके अगले साल के प्रारंभ तक उपलब्ध हो जाने की उम्मीद है।

भाषा राजकुमार दिलीप

दिलीप

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