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क्या है Common Civil Code , आखिर क्यों हो रही इसकी चर्चा, जानिए

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deepak
क्या है Common Civil Code , आखिर क्यों हो रही इसकी चर्चा, जानिए

Common Civil Code : इन दिनों देश में कॉमन सिविल कोड (Common Civil Code) को लेकर चर्चा का माहौल है केंन्द्र की मोदी सरकार देशभर में जल्द ही कॉमन सिविल कोड (Common Civil Code) लागू कर सकती है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल आए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कॉमन सिविल कोड (Common Civil Code) यानी समान नागरिक संहिता लागू करने के संकेत भी दिए थे। शाह ने कहा था कि सीएए, राममंदिर, धारा- 370 और ट्रिपल तलाक के बाद अब कॉमन सिविल कोड (Common Civil Code) की बारी है। उत्तराखंड में कॉमन सिविल कोड पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठाता है कि आखिर केन्द्र सरकार कॉमन सिविल कोड (Common Civil Code) क्यों लागू करना चाहती है? आखिर क्या है कॉमन सिविल कोड़

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क्या है कॉमन सिविल कोड?

कॉमन सिविल कोड (Common Civil Code) को हिंदी में समान नागरिक संहिता कहते है। यह एक पंथनिरपेक्ष कानून है जो सभी पंथों के लिए समान रूप से होता है। समान नागरिकता संहिता का मतलब होता है भारत में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून, इसमें कोई जाति नही होती है। इस कानून के लागू होने के बाद हर वर्ग के लिए एक कानून होगा। फिलहाल अभी प्रत्येक धर्म के लोगों के मामले पर्सनल लॉ के माध्यम से निपटाए जाते हैं। जैसे कि शादी, तलाक, जायदाद का बंटवारा और बच्चों को गोद लेने के मामले पर्सनल लॉ के हिसाब उनका फैसला होता है। देश में मुस्लिम, ईसाई और पारसी धर्म का पर्सनल लॉ है, तो वही हिंदू सिविल लॉ के तहत हिंदू, सिख, जैन और बौध आते हैं। कुल मिलाकर देश में अलग- अलग सिविल (Common Civil Code) कानून है। इसी को लेकर सरकार कॉमन सिविल कोड लागू करना चाहती है ताकि देश में एक नागरिक एक कानून रहे।

क्या होगा इससे फायदा

समान नागरिक संहिता को लागू होने पर न्यायपालिका में लंबित मामले आसानी से सुलझाए जा सकते है। शादी, तलाक, गोद लेना और जायदाद के बंटवारे जैसे मामले कए ही कानून के दायरे में आएंगे जिनका फैसला करने में समय नहीं लगेगा। न्यायपालिका का समय बचेगा। फिलहाल अभी सभी मजहब इन मामलों का बंटवारा अपने कानून के मुताबिक करते हैं। अमेरिका, पाकिस्तान, तुर्की, आयरलैंड, बांग्लादेश समेत दुनियाभर के कई देशों में कॉमन सिविल कोड (Common Civil Code) लागू है। लेकिन भारत में यह कानून लागू नहीं है। माना जा रहा है कि केन्द्र सरकार जल्द ही भारत में कॉमन सिविल कोड (Common Civil Code) लागू कर सकता है।

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