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Mobile Impact On Health: कहीं आप भी तो खाना खाते समय फोन नहीं देखते..? जानें इसके नुक्सान

Mobile Using While Eating Food Effects : क्या आप भी खाना खाते समय मोबाइल देखते हैं? यह छोटी सी आदत आपके पाचन, ध्यान और स्वास्थ्य पर बड़ा असर डालती है।

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anjali pandey
Mobile Impact On Health: कहीं आप भी तो खाना खाते समय फोन नहीं देखते..? जानें इसके नुक्सान

आज की डिजिटल लाइफ में मोबाइल हमारे हर पल का साथी बन चुका है सुबह उठते ही स्क्रीन, और रात में सोने से पहले भी वही स्क्रीन। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप खाना खाते समय मोबाइल देखते हैं, तो यह आपके शरीर, मस्तिष्क और मन—तीनों पर क्या असर डालता है? आइए समझते हैं इस आदत के पीछे छिपे वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक पहलू।

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1. जब ध्यान मोबाइल पर, तो भोजन का स्वाद गायब

[caption id="attachment_913676" align="alignnone" width="776"]publive-image जब ध्यान मोबाइल पर, तो भोजन का स्वाद गायब[/caption]

खाना सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि इंद्रियों के आनंद का माध्यम है। जब आप खाते समय मोबाइल देखते हैं चाहे सोशल मीडिया स्क्रॉल करें, वीडियो देखें या चैट करें तो आपका ध्यान भोजन से हट जाता है। मस्तिष्क एक समय में एक ही चीज़ पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकता है। जब फोकस मोबाइल पर होता है, तो दिमाग भोजन के स्वाद, गंध और बनावट को पूरी तरह नहीं समझ पाता।

इसका नतीजा क्या होता है?

[caption id="attachment_913677" align="alignnone" width="783"]publive-image इसका नतीजा क्या होता है?[/caption]

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भोजन का स्वाद फीका लगने लगता है, दिमाग ‘तृप्ति’ (satiety) का संकेत देर से भेजता है, और आप ज़रूरत से ज़्यादा खा लेते हैं। दरअसल, मस्तिष्क को यह समझने में लगभग 20 मिनट लगते हैं कि पेट भर चुका है। लेकिन अगर आप मोबाइल देखते हुए खाते हैं, तो यह कनेक्शन और धीमा हो जाता है, जिससे ओवरईटिंग की संभावना बढ़ जाती है।

2. पाचन प्रक्रिया पर असर

[caption id="attachment_913679" align="alignnone" width="775"]publive-image पाचन प्रक्रिया पर असर[/caption]

पाचन एक शारीरिक ही नहीं बल्कि मनो-शारीरिक प्रक्रिया (psycho-physiological process) है — यानी यह शरीर और मन दोनों पर निर्भर करती है। जब आप शांत मन से बैठकर खाते हैं, तो मस्तिष्क parasympathetic nervous system को सक्रिय करता है, जिसे ‘rest and digest’ अवस्था कहते हैं। इस दौरान लार का स्राव बढ़ता है, एंज़ाइम सक्रिय होते हैं और पेट में भोजन के पचने की प्रक्रिया तेज़ी से होती है।

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लेकिन मोबाइल देखने से दिमाग सतर्क अवस्था (alert mode) में चला जाता है यानी sympathetic nervous system सक्रिय हो जाता है, जो 'fight or flight' मोड है। इस अवस्था में शरीर पाचन की जगह बाहरी उत्तेजनाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार होता है।

  • लार का स्राव घट जाता है,
  • पेट में एसिड का संतुलन बिगड़ता है,
  • और पाचन प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है।
  • लंबे समय में यह आदत गैस, एसिडिटी, और बदहजमी जैसी समस्याओं को जन्म देती है।

3. वैज्ञानिक प्रमाण क्या कहते हैं

कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने इस आदत के हानिकारक प्रभाव साबित किए हैं, जिसमें

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University of Surrey (UK) के शोध में पाया गया कि जो लोग मोबाइल या टीवी देखते हुए खाना खाते हैं, वे सामान्य से 25–30% अधिक कैलोरी ग्रहण करते हैं।

Harvard Health Review में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, ध्यान भटकने से शरीर की satiety response धीमी हो जाती है, जिससे वजन बढ़ने की संभावना बढ़ती है।

National Institute of Health (NIH) की रिपोर्ट में बताया गया है कि स्क्रीन टाइम के दौरान भोजन करने से मस्तिष्क में dopamine release बढ़ता है, जिससे व्यक्ति भोजन को ‘reward’ की तरह नहीं बल्कि ‘background activity’ की तरह लेने लगता है।

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इन सबका सीधा मतलब यह है कि मोबाइल के साथ खाना खाना न केवल overeating को बढ़ावा देता है, बल्कि मानसिक रूप से भी भोजन का आनंद कम कर देता है।

4. Mindful Eating: समाधान और संतुलन

[caption id="attachment_913680" align="alignnone" width="763"]publive-image Mindful Eating[/caption]

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अगर आप अपनी सेहत और भोजन दोनों से सच्चा रिश्ता बनाना चाहते हैं, तो ज़रूरी है कि आप “Mindful Eating” यानी सचेत होकर भोजन करने की आदत अपनाएं।

मोबाइल को दूर रखें: भोजन के दौरान मोबाइल को मेज से दूर रखें या ‘silent mode’ पर कर दें।

भोजन को महसूस करें: खाने से पहले उसकी खुशबू लें, बनावट देखें और हर निवाले का स्वाद धीरे-धीरे चखें।

धीरे-धीरे खाएं: हर निवाले को कम से कम 20–25 बार चबाएं। यह पाचन को मजबूत करता है और आपको जल्दी तृप्ति का अहसास कराता है।

कृतज्ञता महसूस करें: जिस तरह ध्यान करने से आत्मा को शांति मिलती है, उसी तरह ध्यानपूर्वक भोजन करने से शरीर को पोषण और मानसिक शांति मिलती है।

हर दिन हम कहते हैं 'स्वस्थ रहना है', लेकिन स्वास्थ्य सिर्फ जिम या डाइट से नहीं आता यह हर भोजन के प्रति आपके व्यवहार से जुड़ा है। इसलिए अगली बार जब आप थाली लेकर बैठें, तो खुद से एक सवाल पूछें 'क्या मैं सच में भोजन कर रहा हूँ, या बस मोबाइल स्क्रॉल कर रहा हूं?'

याद रखिए, भोजन सिर्फ पेट भरने की नहीं, बल्कि जीवन को पोषित करने की प्रक्रिया है। और यह तभी संभव है जब आप स्क्रीन नहीं, स्वाद पर ध्यान दें।

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