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कानपुर में पत्रकार बृजेश गुप्ता की हत्या के 16 साल बाद आया फैसला, एंकर कनिका ग्रोवर समेत चार को उम्रकैद की सजा

Kanpur Journalist Murder Case: पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह हत्या किसी बाहरी दुश्मनी की नहीं, बल्कि निजी रंजिश (Personal Enmity) की वजह से की गई थी।

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anurag dubey
कानपुर में पत्रकार बृजेश गुप्ता की हत्या के 16 साल बाद आया फैसला, एंकर कनिका ग्रोवर समेत चार को उम्रकैद की सजा

हाइलाइट्स 

  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 25 चोटों का जिक्र था
  • पत्रकार बृजेश गुप्ता हत्याकांड में अदालत ने 16 साल बाद फैसला
  • जांच में सामने आया एंकर कनिका ग्रोवर का नाम
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Kanpur Journalist Murder Case:कानपुर में 2009 में हुए पत्रकार बृजेश गुप्ता हत्याकांड में अदालत ने 16 साल बाद फैसला सुनाया है। अदालत ने एंकर कनिका ग्रोवर (Anchor Kanika Grover), उसके दो भाइयों सन्नी-मन्नी और रिश्तेदार सुरजीत सिंह को उम्रकैद की सजा दी। वहीं कनिका की मां और चाचा को पांच साल की सजा हुई। बृजेश की हत्या निजी रंजिश में की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 25 चोटों का जिक्र था। अदालत ने मंगलवार को एंकर कनिका ग्रोवर, उसके दो भाइयों सन्नी (Sunny) और मन्नी (Manny) तथा रिश्तेदार सुरजीत सिंह (Surjit Singh) को उम्रकैद की सजा सुनाई है।  साथ ही कनिका की मां अलका ग्रोवर (Alka Grover) और चाचा बंटी (Bunty) को पांच साल की सजा दी गई।

2009 की वो दोपहर जिसने कानपुर को हिला दिया

14 जून 2009 की दोपहर कानपुर के गोविंद नगर (Govind Nagar) में सड़क किनारे खड़ी एक कार सबका ध्यान खींच रही थी। जब पुलिस ने दरवाजा खोला तो अंदर बोरे में बंद एक शव मिला। शरीर पर जगह-जगह गहरे घाव, सिर से लेकर गले तक चोट के निशान। पहचान हुई – वह कोई और नहीं, बल्कि स्थानीय चैनल चलाने वाले पत्रकार बृजेश गुप्ता थे। उनकी हत्या ने कानपुर के पत्रकारिता जगत को हिला दिया। साथी पत्रकार सड़कों पर उतर आए और न्याय की मांग करने लगे।

पत्रकार की हत्या मामले में कोर्ट ने 16 साल बाद फैसला सुनाया है. (Photo: ITG)

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 जांच में सामने आया एंकर कनिका ग्रोवर का नाम

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह हत्या किसी बाहरी दुश्मनी की नहीं, बल्कि निजी रंजिश (Personal Enmity) की वजह से की गई थी। कनिका ग्रोवर, जो बृजेश के चैनल में एंकर थी, उसने अपने भाइयों सन्नी-मन्नी और रिश्तेदार सुरजीत के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी। हत्या के बाद बृजेश की रिवॉल्वर (Revolver) गायब थी, जिसे बाद में पुलिस ने इन्हीं के पास से बरामद किया। बृजेश के भाई प्रभात गुप्ता (Prabhat Gupta) ने एफआईआर (FIR) दर्ज कराई और कहा, “मेरे भाई ने कभी किसी का बुरा नहीं किया, लेकिन इन लोगों को उसकी सफलता से जलन थी।”

अदालत ने माना हत्या पूर्व नियोजित

अदालत में एडीजीसी गौरवेंद्र त्रिपाठी (ADGC Gauravendra Tripathi) ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने 10 गवाह (Witnesses) और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पेश किया। रिपोर्ट में 25 चोटों (25 Injuries) का जिक्र था। यही अदालत के फैसले का मुख्य आधार बना। जज राजेश राकेश सिंह (Judge Rajesh Rakesh Singh) की अदालत ने सभी आरोपियों को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई। बृजेश के भाई प्रभात गुप्ता ने कहा, “हमें देर से सही, लेकिन इंसाफ मिला है। अब हम हाई कोर्ट (High Court) में अपील करेंगे ताकि इन्हें फांसी की सजा मिल सके।” 16 साल की लंबी कानूनी जंग के बाद आखिरकार उस पत्रकार को न्याय मिला, जिसने सच्चाई और ईमानदारी की राह चुनी थी।

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