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kamakhya mandir : खुल गए कामाख्या मंदिर के पट, कर सकेंगे दर्शन

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Preeti Dwivedi
kamakhya mandir : खुल गए कामाख्या मंदिर के पट, कर सकेंगे दर्शन

नई दिल्ली।  गोवाहाटी के कामाख्या मंदिर को kamakhya mandir आम भक्तों के लिए खोल दिया है। भक्त सावन के आखिरी शुक्रवार यानि आज मां कामाख्या के दर्शन कर सकेंगे। इस संबंध में अनलॉक को लेकर नई गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है। इस कामाख्या शक्तिपीठ की गिनती 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ के रूप में होती है।

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क्या है नई गाइड लाइन
मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक नई गाइड लाइन के अनुसार कोविड-19 की वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके लोग ही मंदिर के अंदर प्रवेश कर सकेंगे। साथ ही मंदिर के गर्भगृह में दर्शन के लिए सिर्फ 20 लोग एक साथ प्रवेश कर पाएंगे।

जानिए मां कामाख्या मंदिर की खासियत
51 शक्तिपीठों में से है एक
इस कामाख्या शक्तिपीठ की गिनती 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ के रूप में होती है। यह बहुत ही प्रसिद्ध और चमत्कारी है। इस मंदिर को अघोरियों और तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत से 10 किलोमीटर दूर स्थित है। सभी शक्तिपीठों के महापीठ के रूप में इसे जाना जाता है।
मंदिर में नहीं है कोई प्रतिमा
इस मंदिर में मां अम्बे की मूर्ति, प्रतिमा या चित्र नहीं है। यहां मात्र एक कुंड बना है जो हमेशा फूलों से ढ़का रहता है। जिससे हमेशा ही जल का बहाव होता है। चमत्कारों से भरे इस मंदिर में देवी की योनि की पूजा होती है। यहां योनी भाग के होने से कारण मां यहां रजस्वला होती हैं।

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kamakhya mandir

इसलिए पड़ा नाम कामाख्या मंदिर
धर्म पुराणों मंदिर के नाम के पीछे की भी अलग ही कहानी है। शक्तिपीठ का नाम कामाख्या इसलिए पड़ा क्योंकि इस जगह मां सती के प्रति शिव जी का मोह भंग करने के लिए विष्णु जी ने अपने चक्र से मां के 51 भाग कर दिए थे। जहां—जहां ये भाग गिरे वहां—वहां माता के शक्तिपीठ बन गए। इस स्थान पर माता की योनी गिरी थी। इस पीठ को सबसे शक्तिशाली पीठों में गिना जाता है। वैसे तो सालभर यहां भक्तों की भीड़ रहती है परन्तु दुर्गा पूजा, पोहान बिया, दुर्गादेऊल, वसंती पूजा, मदानदेऊल, अम्बुवासी और मनासा पूजा आदि अवसरों पर मंदिर की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है।

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पानी हो जाता है लाल

प्रतिवर्ष यहां अम्बुबाची मेला लगता है। जिसमें इसके पास स्थित ब्रह्मपुत्र का पानी तीन दिन के लिए लाल हो जाता है। ऐसी मान्यता है कि पानी का यह लाल रंग कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होता है। इन तीन दिनों के बाद दर्शन के लिए यहां भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है।

प्रसाद में मिलता है लाल कपड़ा
भक्तों को बहुत ही अलग रूप का प्रसाद दिया जाता है। दूसरे शक्तिपीठों की अपेक्षा इस मंदिर में प्रसाद के रूप में लाल रंग का गीला कपड़ा देते हैं। मां के तीन दिन के रजस्वला के दौरान तो सफेद रंग का कपडा मंदिर के अंदर बिछा दिया जाता है। तीन दिन बाद मंदिर के दरवाजे खुलने पर वह वस्त्र माता के रज से लाल रंग से भीग जाता है। इस कपड़ें को अम्बुवाची वस्त्र कहते है। यही वस्त्र भक्तों को प्रसाद के रूप में मिलता है।

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हर मन्नत होती है पूरी
— मनोकामना पूरी करने के लिए इस मंदिर में कन्या पूजन व भंडारा कराया जाता है। इसके अलावा पशुओं की बलि दिए जाने की भी परंपरा है। पर वो भी नर जानवरों की न की मादा।

— काली और त्रिपुर सुंदरी देवी के बाद कामाख्या माता तांत्रिकों की सबसे महत्वपूर्ण देवी है। इनकी पूजा शिवजी की नव वधू के रूप में की जाती है। कामाख्या देवी को सभी इच्छाएं पूर्ण करने वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है।

— यहां आने वाले हर भक्त की मुराद जरूर पूरी होती है। मंदिर के बाजू में स्थित एक मंदिर में मां की मूर्ति विराजित है। जिसे कामादेव मंदिर कहा जाता है।

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— बुरी शक्तियों को दूर करने में यहां के तांत्रिक निपुण माने जाते हैं। कई लोग विवाह, संतान और धन संपत्ति संबंधी इच्छाओं की पूर्ति के लिए कामाख्या की तीर्थयात्रा पर जाते हैं।

— यह मंदिर तीन हिस्सों में बना है। पहले सबसे बड़े हिस्से में हर किसी को नहीं की इजाजत नहीं है। दूसरे हिस्से में मां के दर्शन होते हैं। यही वो स्थान है जहां एक पत्थर से हर वक्त पानी निकलता रहता है। माता के रजस्वला के दौरान वाले तीन दिनो के लिए मंदिर के पट बंद रहते है। तीन दिन बाद दुबारा बड़े ही धूमधाम से मंदिर के पट खोले जाते है।

— तंत्र साधना के लिए यह स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए साधु और अघोरियों का यहां पर तांता रहता है। अधिक मात्रा में काला जादू भी किया जाता है। साथ ही काला जादू से ग्रसित व्यक्ति यहां आकर इस समस्या से निजात पा सकता है।

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