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Janmashtami 2023: बांसुरी के बिना क्यों अधूरे हैं भगवान श्री कृष्ण? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

द्वापर काल में भगवान विष्णु ने भगवान कृष्ण के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया था और उनके अवतार के दर्शन करने के लिए सभी देवी-देवता अलग-अलग रूपों में पृथ्वी पर आए थे.

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Bansal news
Janmashtami 2023: बांसुरी के बिना क्यों अधूरे हैं भगवान श्री कृष्ण? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

Janmashtami 2023: जन्माष्टमी का त्योहार देशभर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. इस साल यह त्योहार 6 सितंबर को है. मंदिरों और बाजारों में जन्माष्टमी की रौनक देखने को मिल रही है. बाजार में कृष्ण जी की पसंदीदा वस्तुएं जैसे मोर पंख और बांसुरी बहुतायत में उपलब्ध होती हैं. ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान कृष्ण के हाथ में बांसुरी क्यों है? कान्हा जी को वह बांसुरी किसने दी जो वे सदैव अपने पास रखते थे. आइए जानते हैं इसके पीछे छिपी एक अनसुनी कहानी के बारे में.

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कान्हा जी को किसने दी बांसुरी?

द्वापर काल में भगवान विष्णु ने भगवान कृष्ण के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया था और उनके अवतार के दर्शन करने के लिए सभी देवी-देवता अलग-अलग रूपों में पृथ्वी पर आए थे. पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव के मन में भी भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करने का विचार आया. तब उनके मन में एक सवाल आया कि भगवान कृष्ण से मिलने के लिए उन्हें उपहार के रूप में क्या लाना चाहिए जो अलग और खास हो और जिसे वह हर समय अपने पास रखें.

बांसुरी के बिना कान्हा जी का श्रृंगार माना जाता है अधूरा

तब भगवान शिव को एहसास हुआ कि उन्होंने ऋषि दधीचि की महाशक्तिशाली हड्डी को अपने पास रखा है. तब भगवान शिव ने उस हड्डी को घिसकर एक सुंदर बांसुरी का आकार दे दिया. वह उस बांसुरी को लेकर भगवान कृष्ण से मिलने पृथ्वी पर आये और उन्हें बांसुरी भेंट की. तभी से भगवान कृष्ण के हाथ में बांसुरी है और वे उसे हमेशा अपने पास रखते हैं.  बता दें कि बांसुरी के बिना कान्हा जी का श्रृंगार अधूरा माना जाता है.

जन्‍माष्‍टमी पर ऐसे करें पूजा  

भाद्रपद में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन घर में लड्डू गोपाल की स्थापना, शंख, श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करने से धन, यश और वैभव की प्राप्ति होती है। भाद्रपद में श्रीकृष्ण की पूजा करने से पाप नष्ट हो जाते हैं और परेशानियां दूर हो जाती हैं। इन दिनों में शंख में दूध और जल भरकर श्री कृष्ण का अभिषेक करना चाहिए। फिर भगवान को नैवेद्य अर्पित करें. भगवान विष्णु की भी पूजा करनी चाहिए. इसके अलावा भाद्रपद में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर संतान गोपाल मंत्र का जाप और हरिवंश पुराण का पाठ करने या सुनने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।

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