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Chhattisgarh Janjati Community: बस एक मात्रा की गलती से छिन गया आदिवासी दर्जा, 22 साल से भटक रहे समाज की उम्‍मीद जागी

Chhattisgarh Janjati Community: बस एक मात्रा की गलती से छिन गया आदिवासी दर्जा, 22 साल से भटक समाज की उम्‍मीद जागी

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Sanjeet Kumar
Chhattisgarh Janjati Community: बस एक मात्रा की गलती से छिन गया आदिवासी दर्जा, 22 साल से भटक रहे समाज की उम्‍मीद जागी

   हाइलाइट्स

  • 22 साल से परेशान पाव समाज
  • सीएम ने दिल्‍ली भेजा प्रस्‍ताव
  • कई सुविधाओं से वंचित समाज
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Chhattisgarh Janjati Community: छत्‍तीसगढ़ में सबसे ज्‍यादा जनजाति समुदाय के लोग निवास करते हैं। इन्‍ही समुदाय में शामिल पाव, पबिया, पविया, पवीया समाज जनजाति को 22 साल पहले जनजाति कैटेगरी से हटा दिया है। इस समाज के अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र नहीं बन रहे हैं। इससे इस समाज के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

बता दें कि पबिया, पविया, पवीया जाति के लोग आदिवासी (Chhattisgarh Janjati Community) समुदाय में शामिल हैं। यह पाव जाति है, लेकिन इस समाज के सरकारी रिकॉर्ड में मात्रात्‍मक ग‍लतियों से इनको जनजाति से हटा दिया गया है। ऐसे में समाज के लोग सीएम से मिलने पहुंचे, जहां मुख्‍यमंत्री विष्‍णुदेव साय ने पाव जनजाति को जनुसूचित जनजाति में शामिल करने का प्रस्‍ताव दिल्‍ली भेजा है।

   सरकारी रिकॉर्ड में मात्रा की गलती

पबिया, पविया, पवीया समाज, आदिवासियों (Chhattisgarh Janjati Community) को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित है। इसकी वजह यह सामने आ रही है कि सरकारी रिकॉर्ड में इस समाज की जातियों के नाम में मात्रात्मक गलती लिख दी गई है।

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इससे इन्‍हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस समाज के लोगों ने छत्तीसगढ़ विधानसभा पहुंचकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से भेंट की। जहां सीएम से समाज के लोगों ने चर्चा कर अपनी परेशानियां बताई।

   केंद्र सरकार को सीएम ने भेजा प्रस्‍ताव

बता दें कि प्रदेश में इस समुदाय की जाति को पबिया, पविया, पवीया जाति के नाम से जाना जाता है। प्रदेश के पाव, पबिया, पविया, पवीया जाति के प्रतिनिधियों ने विधायक रामकुमार यादव के साथ CM साय से भेंट की।

जहां सीएम ने राज्य शासन द्वारा अनुशंसा सहित प्रतिवेदन भारत सरकार को भेज दिया है। अब समाज के लोग उम्मीद लगाए हैं कि इसका सकारात्मक परिणाम मिलेगा।

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   22 साल से नहीं बन रहे प्रमाण पत्र

ग्रामीणों ने जानकारी दी कि मध्य प्रदेश से जब छत्‍तीसगढ़ अलग हुआ था, उस समय इस समाज के लोगों के अनुसूचित जनजाति (Chhattisgarh Janjati Community) के प्रमाण-पत्र बन रहे थे। इसके बाद सरकारी रिकॉर्ड में मात्रा की गलती के चलते पिछले 22 साल से प्रमाण-पत्र नहीं बनाए जा रहे हैं। इससे आदिवासी समाज को मिलने वाला लाभ इस समुदाय को नहीं मिल पा रहा है।

   छत्‍तीसगढ़ में इन इलाकों में प्रभाव

छत्तीसगढ़ सरकार ने इसको लेकर एक आधिकारिक जानकारी दी है। इसके अनुसार प्रदेश में इन पाव, पबिया, पविया, पवीया समाज (Chhattisgarh Janjati Community) की जनसंख्या करीब 22 हजार के आसपास है। ये समुदाय प्रमुख रूप से चंद्रपुर, रायगढ़, लैलूंगा, खरसिया, पेंड्रा, मरवाही और जशपुर जैसी विधानसभा में बड़ी संख्‍या में रहते हैं और मतदाता भी हैं।

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   एसटी में शामिल करने की अनुशंसा

प्रदेश के आदिम जाति (Chhattisgarh Janjati Community) अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के द्वारा पाव, पबिया, पविया, पवीया जाति पर स्टडी के बाद रिपोर्ट बनाई है। इसमें इन जातियों को लक्षणों के आधार पर अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की अनुशंसा की है।

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