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Aaj Ka Mudda: एमपी में जय-वीरू की एंट्री, सियासत में अब मैंटल गेम, क्या भरोसे से बनेगी 23 में बात ?

घोषणाओं का चुनाव मनोकामनाओं का चुनाव, जी हां इन सब भावनाओं के साथ बीजेपी-कांग्रेस 23 की महाभारत जीतने के लिए रण में उतरे हुए हैं।

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Agnesh Parashar
Aaj Ka Mudda: एमपी में जय-वीरू की एंट्री, सियासत में अब मैंटल गेम, क्या भरोसे से बनेगी 23 में बात ?

भोपाल। वादों का चुनाव इरादों का चुनाव, घोषणाओं का चुनाव मनोकामनाओं का चुनाव, जी हां इन सब भावनाओं के साथ बीजेपी-कांग्रेस 23 की महाभारत जीतने के लिए रण में उतरे हुए हैं।

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जनता का प्यार और आशीर्वाद नेताजी के अंदर भरोसे का बारूद भर रहा है।इसी भरोसे के दम पर प्रदेश से कांग्रेस के इकलौते लोकसभा सांसद नकुलनाथ 7 नवंबर को कमलनाथ के शपथ लेने का एलान कर रहे हैं।

भरोसे और विश्वास का चढ़ा रंग

भरोसे और विश्वास का यही रंग पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह की बातों में भी झलकता है। वो कमलनाथ के लिए कितनी भी बार कपड़े फड़वाने को तैयार हैं। जयवर्धन भी नाथ-दिग्गी की जोड़ी को जय-वीरू की जोड़ी मानते हैं।

जयवर्धन बोले- सौ बार कपड़े फड़वाने को तैयार

चाहे कांग्रेस के लिए हो चाहे कमलनाथ के लिए हमारे कपड़े सौ बार फट जाएं तब भी कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन हमारा उद्देश्य एक ही है कांग्रेस मजबूत हो और कमलनाथ जी मजबूत हों ये चुनाव पूरा प्रदेश देख रहा है।

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हमारा एक ही लक्ष्य है कि जो सरकार पांच साल पहले बनी थी। जनता ने कांग्रेस को कमलनाथ जी को पांच का मौका दिया था। लेकिन भाजपा ने पाप करके सौदा करके धनबल के आधार सत्ता परिवर्तन किया और आज जनता चाहती है कमलनाथ जी को पांच साल का मौका मिले। -जयवर्धन सिंह, पूर्व मंत्री

कांग्रेस के जय और वीरू झगड़ रहे: शिवराज

कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी को जय-वीरू बताने पर बीजेपी चुटकी ले रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि कांग्रेस के जय और वीरू झगड़ रहे हैं। लूट के माल के लिए लड़ रहे हैं।

ये जय और वीरू की जोड़ी है जय और वीरू आपस में झगड़ रहे हैं और ये लड़ रहे हैं लूट के माले के लिए जय और वीरू दोनों एक ही उनका झगड़ा है लूट के माल के लिए। -शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री

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नेताओं के मनोवैज्ञानिक अटैक

कुल मिलाकर 23 के रण में दोनों तरफ से बयानों की बौछार हो रही है। बयानों के जरिए विपक्षी पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। दबाव बनाने की रणनीति के तहत दोनों तरफ से बंपर जीते के दावे तो हो ही रहे थे।

साइकोलॉजिकल अटैक

अब बात शपथ लेने तक पहुंच चुकी है। सीधे टीम लीडर को निशाना बनाकर भी साइकोलॉजिकल अटैक हो रहा है। इस मनोवैज्ञानिक लड़ाई में जो बेहतर तनाव और दबाव प्रबंधन करेगा। उसकी सियासी राहें उतनी आसान होती जाएंगी।

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