नर्मदा नदी से जुड़े रोचक तथ्य, जानिए क्यों मानी जाती है कुंवारी?

narmada

भोपाल। भारत में जब भी नदियों की बात आती है तो गंगा और यमुना के बाद नर्मदा का नाम सबसे ऊपर होता है। नर्मदा नदीं धार्मिक प्रथाओं को खुद में समेटे सदियों से बहती जा रही है। यह नदीं भारत के पश्चिम में बहने वाली सबसे बड़ी नदी है। यह मध्य प्रदेश के अमरकंटक से निकलती है। इस नदी से जुड़े कई ऐसे रोचक तथ्य हैं जिनके बारे में कम ही लोग जानते होंगे। आइए आज हम आपको इन तथ्यों से रूबरू कराते हैं।

नर्मदा को रेवा नदी के नाम से भी जाना जाता है

नर्मदा नदी को रेवा नदी के नाम से भी जाना जाता है और यह गोदावरी और कृष्णा के बाद भारत के अंदर बहने वाली तीसरी सबसे लंबी नदी है। मध्य प्रदेश में इसके विशाल योगदान के कारण इसे ‘मध्य प्रदेश की जीवन रेखा’ भी कहा जाता है। नर्मदा के बारे में कहा जाता है कि यह विपरीत दिशा में बहती है जो इसे अन्य सभी नदियों से अलग बनाती है। इतना ही नहीं इस नदी से जुड़ी एक और पौराणकि कथा है। कहा जाता है कि नर्मदा एक कुंवारी नदी है।

क्यों कुंवारी रह गई नर्मदा

पौराणिक कथा के अनुसार सोनभद्र और नर्मदा दोनों के घर पास थे और अमरकंटक की पहाड़ियों में दोनों का बचपन बीता। दोनों किशोर हुए तो लगाव और बढ़ा हुए एक दूसरे के प्रेम में पड़ गए। दोनों ने साथ जीने की कसमें खाई, लेकिन अचानक दोनों के बीच में नर्मदा की सहेली जुहिला आ गई। सोनभद्र जुहिला के प्रेम में पड़ गया। नर्मदा को यह पता चला तो उन्होंने सोनभद्र को समझाने की कोशिश की, लेकिन सोनभद्र नहीं माना। इससे नाराज होकर नर्मदा दूसरी दिशा में चल पड़ी और हमेशा कुंवारी रहने की कसम खाई।

इस कारण से नर्मदा अरब सागर में मिलती है

कहा जाता है कि इसलिए सभी प्रमुख नदियां बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं, लेकिन नर्मदा अरब सागर में मिलती है। आज भी यह नदी अन्य नदियों से विपरीत दिशा में बहती है जो किसी आश्चर्य से कम नहीं है। वास्तव में ये नदी अन्य नदियों की तुलना में कुछ अलग है और अपनी पवित्रता को बनाए हुए है। मान्यता है कि गंगा नदी के जल से स्नान करने से जहां भक्तों के कष्ट दूर होते हैं वहीं नर्मदा मात्र से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

मां गंगा भी नर्मदा में स्नान करने आती हैं

इस नदी से जुड़ी एक और रोचक तथ्य यह है कि गंगा भी इस नदी में स्नान करने आती है। माना जाता है कि गंगा स्नान करने से जीवन के सारे पाप धुल जाते हैं। लेकिन क्या आपको ये बात पता है कि जब लोगों के पाप धोते-धोते गंगा स्वयं मैली हो जाती है तो वह कहां जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार,जब पूरे साल मां गंगा अपने तट पर आने वालों के पाप धोकर मैली हो जाती है तो वह अपना मैल दूर करने के लिए मां नर्मदा में स्नान करने आती हैं। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इस बात के प्रमाण शास्त्रों में भी मिलते हैं।

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