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Inheritance Tax: क्या है विरासत टैक्स, भारत में क्यों विवाद, राजीव गांधी सरकार ने इसलिए कर दिया था खत्म

Kya Hai Inheritance Tax: कांग्रेस के ‘वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन’ (Wealth Distribution) वाले वादे पर राजनीतिक घमासान चल रहा है।

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Kalpana Madhu
Inheritance Tax: क्या है विरासत टैक्स, भारत में क्यों विवाद, राजीव गांधी सरकार ने इसलिए कर दिया था खत्म

Kya Hai Inheritance Tax: कांग्रेस के ‘वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन’ (Wealth Distribution) वाले वादे पर राजनीतिक घमासान (political conflict) चल रहा है।  इस बीच Indian Overseas कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने भारत में अमेरिका-जैसा 'विरासत टैक्स' (Inheritance Tax) का ज़िक्र कर दिया।

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इतना कहते ही वो BJP के निशाने पर आ गए। Prime Minister Narendra Modi से लेकर BJP शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक ने कहना शुरू कर दिया कि ये ‘मिडल क्लास का पैसा लूटने की योजना’ है।  कांग्रेस ने भी ख़ुद को उनकी टिप्पणी से दूर कर लिया है।

मामला यहां तक पहुंच गया कि कांग्रेस को कहना पड़ा कि पित्रोदा के विचार हमेशा कांग्रेस की राय से मेल नहीं खाते।  यहां तक कि पित्रोदा को ख़ुद भी सफ़ाई देनी पड़ी, कि वो बस मिसाल दे रहे थे।

क्या है इनहेरिटेंस टैक्स?

मान लीजिए कि किसी के पास one crore की कोई प्रॉपर्टी है और उस शख्स की मौत हो जाती है। भारत में ऐसी स्थिति में पूरी प्रॉपर्टी उसके बच्चों को ट्रांसफर हो जाती है, क्योंकि यहां इनहेरिटेंस टैक्स (Inheritance Tax) नहीं लगता।

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लेकिन, जहां यह कानून लागू है, वहां प्रॉपर्टी का एक तय हिस्सा सरकार को भी जाएगा। अमेरिका, जहां का जिक्र सैम ने किया है, वहां के भी छह राज्यों- आयोवा, केंटुकी, मैरीलैंड, नेब्रास्का, न्यू जर्सी और पेंसिल्वेनिया में ही यह कानून लागू है।

यहां के अलग-अलग राज्यों में अलग टैक्स तय है। इनहेरिटेंस टैक्स (Inheritance Tax) विरासत में मिली प्रॉपर्टी के 1% से लेकर 20% तक वसूला जाता है।

पहले भारत में भी वसूला जाता था इनहेरिटेंस टैक्स

इतिहास के पन्नों में इनहेरिटेंस टैक्स (Inheritance Tax)  का जिक्र राजीव गांधी के सरकार में मिलता है।  दरअसल तब एक ऐसा वाकया हुआ कि तब के तत्कालिन वित्त मंत्री वीपी सिंह ने उसे समाप्त कर दिया।

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तब यह कहा गया कि सरकार इनहेरिटेंस टैक्स (Inheritance Tax) के चलते काफी सारे मुकदमें में फंस गई थी, सरकार के तरफ से दूसरी दलील ये दी गई थी कि जिस उद्देश्य से इस टैक्स को लागू किया गया था।  वह पूरा नहीं हो पाया।

सरकार का ये कहना था कि उस टैक्स से हुई कमाई उसके प्रशासन में किए गए खर्च से कम थी।  इसलिए उस टैक्स का कोई मतलब नहीं था।  यही वजह थी कि 1985 में हटा दिया गया।  तब इनहेरिटेंस टैक्स (Inheritance Tax) के तौर पर 85% का टैक्स वसूला जाता था।

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