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Triple Life Imprisonment: मासूम बेटी से रेप करने वाले पिता को तिहरा आजीवन कारावास, कोर्ट ने कहा- ये दया के हकदार नहीं

इंदौर जिला कोर्ट ने मानवता को शर्मसार करने वाले एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए अपनी ही 12 की साल बेटी के साथ रेप करने वाले एक कलयुगी पिता को तिहरे आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई है।

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Vikram Jain
Triple Life Imprisonment: मासूम बेटी से रेप करने वाले पिता को तिहरा आजीवन कारावास, कोर्ट ने कहा- ये दया के हकदार नहीं

हाइलाइट्स

  • नाबालिग बेटी से रेप के दोषी पिता को तिहरी उम्रकैद।
  • कोर्ट ने कहा-ऐसे अपराधियों पर दया नहीं होनी चाहिए।
  • मामले में पीड़िता और मौसी के बयान बने मजबूत पक्ष।
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Indore Court Decision Rapist Father Triple Life Imprisonment: इंदौर जिला कोर्ट ने 12 साल बेटी से रेप करने वाले पिता को तिहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पिता को दोषी ठहराते हुए कहा कि इस पिता ने पिता पुत्री जैसे पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है, इसलिए न्यूनतम दंड विधिपूर्ण नहीं है। इस तरह के अपराधी दया के हकदार नहीं है। इस मामले में सबसे मजबूत प्रमाण पीड़िता और उसकी मुंहबोली मौसी की स्पष्ट व साहसिक गवाही रही, जिसके आधार पर कोर्ट ने आरोपी पिता को दोषी ठहराते हुए कठोर दंड दिया। साथ ही 15 हजार का अर्थदंड लगाया है।

 मानवता को शर्मसार करने वाला मामला

दरअसल, 21 जुलाई 2024 को पीड़िता की मां ने पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें महिला ने पुलिस को बताया कि 2012 में उसने बेटी (पीड़िता) के आरोपी पिता के साथ लव मैरिज की थी, इसके के उन्हें दो बच्चे हुए, एक 12 साल की बेटी (पीड़िता) और 6 साल बेटा। इसके बाद साल 2020 में तलाक होने पर दोनों साथ में नहीं रहे, फिर बेटी पिता के साथ और बेटा मां के साथ रहने लगा।

पिता ने बेटी के साथ किया गलत काम

इस बीच पीड़िता ने 21 जुलाई 2024 को अपनी मुंहबोली मौसी को आपबीती सुनाई। उसने बताया कि पिता घर पर अकेले होने पर उसके साथ गलत काम करते हैं। उसके साथ गलत काम पहली बार दो साल पहले नए घर में किया गया था, और हाल ही में 15 दिन पहले भी दोबारा रेप किया गया। पीड़िता ने बताया कि पिता की हरकतों को लेकर उसने कई बार दादी को बताया था, लेकिन उन्होंने इसको लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई।

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इसके बाद, पीड़िता की मुंहबोली मौसी ने पीड़िता की नानी को फोन कर पूरी घटना बताई। मामले में गंभीरता दिखाते हुए नानी ने तुरंत पीड़िता की मां को बुलाया और थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया।

पीड़िता और मौसी के बयान बने मजबूत पक्ष

पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया और उसके बयान दर्ज किए। साथ ही पुलिस ने जांच करते हुए बच्ची की उम्र साबित करने के लिए स्कूल से दस्तावेज जुटाए। इसके अलावा, पीड़िता की मुंहबोली मौसी के बयान भी दर्ज किए गए। इस केस में गवाही और मेडिकल रिपोर्ट मजबूत सबूत बने। जांच के बाद, पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 और अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर चालान पेश किया।

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मासूम बेटी के लिए कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला

करीब एक साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अंततः 18 सितंबर 2025 को इंदौर जिला अदालत ने इस अपराध के लिए सख्त निर्णय सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी पिता ने अपने पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है और ऐसे अपराधियों पर कोई दया नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता के साथ हुए अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा कम नहीं हो सकती।

प्रभारी जिला अभियोजन अधिकारी (DPO) राजेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि अदालत ने आरोपी पिता को पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एल)/6, 5(एन)/6 और 5(एम)/10 के तहत दोषी मानते हुए तीन अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही आरोपी पर ₹15,000 का अर्थदंड भी लगाया गया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुशीला राठौर ने प्रभावी ढंग से मामले की पैरवी की।

अदालत ने पीड़िता को हुए शारीरिक व मानसिक आघात को ध्यान में रखते हुए 'पीड़ित प्रतिकर योजना' के अंतर्गत ₹3 लाख रुपये मुआवजा देने की भी सिफारिश की, ताकि बालिका को उचित पुनर्वास और चिकित्सा सहायता मिल सके।

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