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Indore Controversial Book : मामले को तूल पकड़ता देख इंदौर लॉ कॉलेज प्राचार्य ने दिया इस्तीफा

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Preeti Dwivedi
Indore  Controversial Book : मामले को तूल पकड़ता देख इंदौर लॉ कॉलेज प्राचार्य ने दिया इस्तीफा

इंदौर। Indore Controversial Book शहर के सरकारी लॉ कॉलेज में मामले को तूल पकड़ता देख सरकारी लॉ कॉलेज के प्राचार्य इनामुर्रहमान ने इस्तीफा दे दिया है। आपको बता दें प्राचार्य पर लव जिहाद मुस्लिम तुष्टिकरण करने सहित कई गंभीर आरोप लगे थे। जिसके बाद ABVP कार्यकर्ताओं और छात्रों के प्रदर्शन के बाद प्राचार्य ने इस्तीफा दे दिया है। गौरतलब है कॉलेज में विवादित किताब भी सामने आई थी।

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 शासकीय विधि महाविद्यालय धार्मिक कट्टरता और भड़काऊ शिक्षा का अखाड़ा बनता जा रहा है। महाविद्यालय के छह प्रोफेसरों द्वारा संप्रदाय विशेष के खिलाफ विद्यार्थियों को भड़काने के मामले के बाद महाविद्यालय की लाइब्रेरी में अब विवादित पुस्तक मिली है। लेखिका डा. फरहत खान द्वारा लिखी पुस्तक (सामूहिक हिंसा एवं दांडिक न्याय पद्धति) में हिंदुओं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के खिलाफ आपत्तिजनक अंश लिखे गए हैं। कुछ ऐसी पंक्तियां हैं, जिसमें हिंदुओं व हिंदूवाद से जुड़ी संस्थाओं को धर्म के आधार पर भड़काने का जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस मामले में अब शासन ने हस्तक्षेप किया है। उच्च शिक्षा मंत्री डा. मोहन यादव ने विभाग के अपर मुख्य सचिव को मामले की जांच सौंपी है वहीं आज गृहमंत्री नरोत्म मिश्रा ने कहा कि डॉ.फरहत खान द्वारा लिखी गई पुस्तक की 24 घंटे में जांच कर एफआईआरदर्ज करने के निर्देश इंदौर कमिश्नर को दिए हैं।

क्या कहा था मंत्री ने —
इस मामले में उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा है कि इंदौर के शासकीय विधि महाविद्यालय में धार्मिक कट्टरता फैलाने के मामले में छह शिक्षकों की भूमिका के साथ ही विवादित व आपत्तिजनक अंशों वाली पुस्तक की भी जांच की जाएगी। जानकारी के अनुसार ये पुस्तक एक निजी प्रकाशन की बताई जा रही है। मंत्री द्वारा कहा गया है कि इन सभी मामलों में जो भी दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस बीच शुक्रवार को छात्र नेताओं ने भंवरकुआं थाने पहुंचकर आपत्तिजनक पुस्तक के मामले में एफआरआर दर्ज कराने की मांग करते हुए आवेदन भी दिया। कहा जा रहा है कि कालेज प्रबंधन ने इस पुस्तक को खरीदा था और यह पुस्तक वहां की लाइब्रेरी में उपलब्ध है।

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लिखे विवादित अंश, जिन पर मच रहा बवाल
पुस्तक की लेखिका ने सामूहिक हिंसा एवं दांडिक न्याय पद्धति नाम की पुस्तक में कई विवादित अंश लिखे हैं। इन्हें लेकर बवाल मचा हुआ है। पुस्तक में लिखा गया है।

  •  हिंदू संप्रदाय विध्वंसकारी विचारधारा के रूप में उभर रहा है। विश्व हिंदू परिषद जैसा संगठन हिंदू बहुमत का राज्य स्थापित करना चाहता है। वह किसी भी बर्बरता के साथ हिंदू राज्य की स्थापना को उचित ठहराता है।
  •  हिंदुओं ने हर संप्रदाय से लड़ाई का मोर्चा खोल रखा है। पंजाब में सिखों के खिलाफ शिव सेना जैसे त्रिशूलधारी नए संगठन ने मोर्चा बना लिया है। पंजाब का सच आज यह है कि मुख्य आतंकवादी हिंदू हैं और सिख प्रतिक्रिया में आतंकवादी बन रहा है। कमाल यह है कि पहले मुसलमान चिल्लाया करते थे कि अल्पसंख्यक इस्लाम खतरे में है, पर आज हिंदू चिल्ला रहा है बहुसंख्यक हिंदू खतरे में हैं।
  •  आज हिंदू बहुसंख्यक, हिंदू अल्पसंख्यक मुसलमान पर अपनी इच्छा थोपने का काम कर रहा है। आज यही सांप्रदायिक संघर्ष का कारण बन रहा है। जब कांग्रेस सत्ता में आ गई और भाजपा मुख्य विरोधी दल बन गया तो राष्ट्रीय स्वयं संघ ने भाजपा को आदेश दिया कि दोनों ब्राह्मणवादी दल हैं और दोनों में ब्राह्मणों का प्रभुत्व है। भाजपा और कांग्रेस में सिद्धांतत: कोई अंतर नहीं है।
  •  जब धार्मिक स्थलों की 1947 की स्थिति कायम रखी जाएगी तो अयोध्या का मंदिर इस कानून की सीमा से क्यों बाहर किया गया। आरएसएस ने भाजपा को कांग्रेस का विरोध करने से रोका तो कांग्रेस को भी आदेश दिया कि अयोध्या का विवाद कानून से बाहर रखे ताकि भाजपा अपनी सांप्रदायिक राजनीति करती रहे।
  •  हिंदुओं के जितने भी सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिंक संगठन बने हैं, उनका एक मात्र उद्देश्य मुसलमानों का विनाश करना है और शूद्रों को दास बनाना है। हिंदू राजतंत्र का शासन वापस लाकर ब्राह्मण्ाों को पृथ्वी का देवता बनाकर पूज्य बनाना है।

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