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5 साल से नहीं हो रहा फसल बीमा: क्लेम का अधिकार नहीं मुआवजे की दया पर निर्भर 36.79 लाख से अधिक किसानों की उद्यानिकी फसल

PM Fasal Bima Yojana: विधायक अर्चना चिटनीस ने सदन में ये मुद्दा उठाया, जिसका जवाब कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने दिया।

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Rahul Sharma
5 साल से नहीं हो रहा फसल बीमा: क्लेम का अधिकार नहीं मुआवजे की दया पर निर्भर 36.79 लाख से अधिक किसानों की उद्यानिकी फसल

हाइलाइट्स

  • पांच साल से उद्यानिकी फसलों का नहीं हो रहा बीमा
  • उद्यानिकी फसलों से जुड़े हैं एमपी के 36.79 लाख किसान
  • मध्य प्रदेश के 26.57 लाख हेक्टेयर पर होती है उद्यानिकी की खेती
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PM Fasal Bima Yojana: मौसम की मार के कारण मध्य प्रदेश की उद्यानिकी फसल यदि खराब होती है तो किसानों को क्लेम का अधिकार नहीं है, बल्कि आरबीसी 6/4 के तहत मिलने वाले मुआवजे की दया पर निर्भर है। ये कहना है किसान नेताओं का।

मामला उद्यानिकी फसल का पांच साल से पीएम फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमा ही नहीं हो रहा है। ऐसे में उद्यानिकी फसल से जुड़े 36.79 लाख से अधिक किसान फसल खराब हो जाने पर आरबीसी 6/4 के तहत मिलने वाले मुआवजे पर निर्भर है। मध्य प्रदेश में चल रहे मानसून सत्र के पांचवे दिन अर्चना चिटनीस (MLA Archana Chitnis) ने यह मुद्दा सदन में भी उठाया।

26.57 लाख हेक्टेयर पर 4 करोड़ टन उत्पादन

मध्य प्रदेश में उद्यानिकी फसल का बहुत बड़ा रकबा है। 26 लाख 57 हजार 908 हेक्टेयर भूमि पर 4 करोड़ 40 हजार 547 टन उद्यानिकी से जुड़ी फसलों का उत्पादन है। इससे प्रदेश के 36 लाख 79 हजार 935 किसान जुड़े हुए हैं।

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96 लाख टन फल और 2 करोड़ टन सब्जी का उत्पादन

मध्य प्रदेश में 4 लाख 56 हजार 964 हेक्टेयर पर 96 लाख 11 हजार 117 टन फलों का उत्पादन और 12 लाख 29 हजार 378 हेक्टेयर पर 2 करोड़ 44 लाख 32 हजार 583 टन सब्जी का उत्पादन किया जाता है।

फूल और औषधि का भी रकबा बढ़ा

प्रदेश में किसान तेजी से उद्यानिकी फसलों की ओर रूख कर रहा है। यहां 2570 हेक्टेयर पर सुगंधित फसल का उत्पादन किया जाता है।

वहीं 41 हजार हेक्टेयर पर 4 लाख 71 हजार टन फूल और 45 हजार 525 हेक्टेयर पर 1 लाख 20 हजार टन औषधि का उत्पादन होता है।

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बीमा कंपनी के लिए 6 बार बुलाए टेंडर

बुरहानपुर से बीजेपी विधायक अर्चना चिटनीस ने 5 जुलाई को यह मुद्दा उदन में उठाया।

कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाह (Minister Narayan Singh Kushwaha) ने बताया कि खरीफ वर्ष 2020 से रबी 2022-23 के लिए 6 बार टेंडर जारी किये गए।

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लेकिन दरें अधिक होने से योजना का क्रियान्वयन नहीं हो सका। रबी 2022-23 से रबी 2023-24 के लिए निविदा बुलाई गई, लेकिन एक ही निविदा आने से निविदा नहीं खोली गई।

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2019 तक मिलता रहा है बीमा

ऐसा नहीं है कि मध्य प्रदेश में उद्यानिकी फसलें कभी बीमा (PM Fasal Bima Yojana) के दायरे में आई ही नहीं। एमपी में ही वर्ष 2019-20 तक उद्यानिकी की फसलें बीमा दायरे में रही हैं।

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सिर्फ इस एक साल की बात करें तो 2019-20 में उद्यानिकी से जुड़े 3 लाख 46 हजार 974 किसानों ने फसल बीमा कराया था।

इनमें खरीफ सीजन में 90 हजार 990 और रबी सीजन में 2 लाख 55 हजार 984 किसानों ने फसल बीमा कराया था।

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अंतिम बार 2.88 लाख किसानों को मिला था लाभ

प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ (Benefit Of PM Fasal Bima Yojana) उद्यानिकी से जुड़े 2 लाख 88 हजार 896 किसानों ने साल 2019-20 में लिया था।

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फसल खराब होने पर 19412.36 लाख रुपये बीमा क्लेम के रूप में किसानों को मिले थे। वर्ष 2014-15 से 2019-20 तक किसानों को इसका लाभ मिलता रहा।

इसके बाद से ही उद्यानिकी फसलों का बीमा (PM Fasal Bima Yojana) प्रदेश में नहीं हो रहा है।

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उज्जैन में सबसे ज्यादा उद्यानिकी से जुड़े किसान

मध्य प्रदेश में उद्यानिकी (Horticulture Crops Of MP) से 36 लाख 79 हजार 935 किसान जुड़े हैं।

संभागवार बात करें तो सबसे ज्यादा उज्जैन संभाग में 7 लाख 84 हजार 253 किसान उद्यानिकी से जुड़े हैं।

वहीं सबसे कम नर्मदापुरम संभाग में 1 लाख 23 हजार 590 किसान उद्यानिकी से जुड़े हैं।

भोपाल संभाग में 2.85 लाख, ग्वालियर में 4.17 लाख, इंदौर में 5.49 लाख, जबलपुर में 4.30 लाख, रीवा में 5.14 लाख और सागर संभाग में 5 लाख 74 हजार किसान उद्यानिकी से जुड़े हैं।

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