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Holi Bhai Dooj Upaye 2022 : फाल्गुन माह में इस बार दो पूर्णिमा, इस दिन मनेगी होली की भाई दूज, व्रत कथा, मुहूर्त और महत्व

Holi Bhai Dooj Upaye 2022 फाल्गुन माह में इस बार दो पूर्णिमा, इस दिन मनेगी होली की भाई दूज, व्रत कथा, मुहूर्त और महत्व Holi Bhai Dooj Upaye 2022 -this-time-two-full-moons-in-the-month-of-falgun-bhai-dooj-of-holi-will-be-celebrated-on-this-day-fast-story-muhurta-and-importance-pd

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Preeti Dwivedi
Holi Bhai Dooj Upaye 2022 :  फाल्गुन माह में इस बार दो पूर्णिमा, इस दिन मनेगी होली की भाई दूज, व्रत कथा, मुहूर्त और महत्व

नई दिल्ली। फाल्गुन माह का खास Holi Bhai Dooj Upaye 2022 त्योहार यानि होली का आगमन होने वाला है। इसके बाद भाई—बहन का पवित्र त्योहार यानि भाई—दूज आएगा। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इस बार दो पूर्णिमा होने से भाई—दूज की तिथि में परिवर्तन होगा। आइए जानते हैं भाई—दूज की तिथि और मुहूर्त और महत्व।

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होली भाईदूज तिलक और पूजा विधि
होली भाईदूज के दिन भाई बहनों को प्रात:काल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर श्रीविष्णु जी और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद भाई को तिलक करने के लिए कुमकुम, सिंदूर, अक्षत, चंदन, फल, फूल, मिठाई, काले चने, सुपारी या सूखा गोला रखकर पूजन की थाली सजाएं। भाई को चौक पर बिठाकर शुभ मुहूर्त में उनका तिलक करें। इसके बाद पान, सुपारी, गोला, बताशे, फल, फूल, मिठाई और चने आदि सभी चीजें भाई को दें। आरती कर उनका मुंह भी मीठा कराएं। भाई भी बहनों को सामर्थ्य के उपहार के साथ—साथ उनकी रक्षा का वचन दें।

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इस दिन आ रही हैं पूर्णिमा —

पूर्णिमा तिथि —
प्रारंभ — 17 मार्च को दोपहर 12:40
समाप्ति — 18 मार्च को दोपहर 12:38

प्रतिपदा —
प्रारंभ — 18 मार्च को दोपहर 12:39
समाप्ति — 19 मार्च को प्रतिपदा में सूर्योदय

होली भाईदूज 20 मार्च 2022
द्वितीया तिथि प्रारंभ — 19 मार्च को दोपहर 11:37 बजे से
द्वितीया तिथि समाप्त — 20 मार्च को प्रात:काल 10:06 बजे तक

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होली भाई दूज की कथा —
भारतीय जनश्रुति में सुनाई जाने वाली कथाओं के अनुसार एक बुढ़िया थी जिसके एक बेटा और बेटी थे। बेटी का विवाह हो गया था तथा वह परदेश में रहती थी। एक दिन बेटे ने अपनी मां से आग्रह किया कि वह अपनी बहन से मिलने जाना चाहता है। इस पर उसकी मां ने उसे अनुमति दे दी। बहन के घर पहुंचने के बीच उसे कई संकटों से गुजरना पड़ा परन्तु हर बार वह वापिस लौटने का आश्वासन देकर सकुशल अपनी बहन के घर पहुंच गया। वहां पर बहन ने उसे दुखी देख उससे कारण पूछा। भाई ने उसे सब कुछ बता दिया। इस पर बहन ने भाई को सकुशल उसके घर छोड़ कर आने का वचन दिया और उसके साथ राह में निकल पड़ी। रास्ते में आने वाले सभी संकटों का सामना करते हुए उसने अपने भाई की जान बचाई। भाई दूज के अवसर पर सभी बहनें इस कहानी को सुन कर और अपने भाई का तिलक कर अपना व्रत खोलती हैं।

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